भजन संहिता 148:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उसने उनको सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है; और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।

भजन संहिता 148:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 148:6 पर टिप्पणी

इस अभाग-आलोकित भजन में परमेश्वर के सामर्थ्य और सत्ता की व्यापक उद्घोषणा है। 148वां भजन सभी र_CREATUREs को—आकाशों, पृथ्वी, समुद्र और ऊपर-नीचे रहने वाले सभी प्राणियों को—आह्वान करता है कि वे परमेश्वर की महिमा गाएं। यह पद विशेष रूप से बताता है कि उसने न केवल प्रकृति को कानूनों से बाँधा है, बल्कि उनकी स्थिरता को स्थायी बना दिया है। यह स्थिरता उसकी इच्छानुसार है और ऐसा नियम है जो कभी टलेगा नहीं।

कथन का संदर्भ: अध्याय के साथ विचार

भजन 148 परमेश्वर की महिमा की व्यापक और सर्वव्यापक उद्घोषणा है। पंक्तियाँ 1–6 आकाश, स्वर्गीय सर्ग, पृथ्वी के सभी निवासियों, पर्वतों, वनस्पतियों और हवाओं से लेकर राष्ट्रीय और सामाजिक संस्थाओं तक को उसकी स्तुति के लिए आमंत्रित करती हैं। जिस वाक्य में “और उसने उनको सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है” आता है, वह बताता है कि परमेश्वर ने जो नियम और स्थिरता बनाई है, वह क्षण भर के लिए नहीं, बल्कि सदा के लिए है। भजनकार यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के निर्देश और व्यवस्था ब्रह्मांड के प्रत्येक स्तर पर क्रम और स्थिरता बनाते हैं।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी व्यवस्था हर आयाम में स्थिर और अपरिवर्तनीय है। जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच उसका विधान निरंतर रहता है—यह उन परिस्थितियों में भी सच है जिनमें मानव अभिमान उसे चुनौती देता है। विश्वासियों के लिए इसका अर्थ है: परमेश्वर की दुनियावी नियंत्रण और सुप्रभुत्व पर विश्वास रखना; उनकी चुटकी-सी भी चेष्टा उसकी स्थिरता के विरुद्ध नहीं जा सकती।

अन्य बाइबिल पाठों से तुलना

- भजन 33:11 — परमेश्वर का विचार स्थिर है; वह अपना चेतन स्वरूप नहीं बदलता। यह स्मरण दिलाता है कि उसकी निर्माण-योजना निरंतर और भरोसेमंद है।

- भजन 102:25–27 — ब्रह्मांड के परिवर्तनशील चक्रों के बीच परमेश्वर की स्थिरता गम्भीर रहती है; पुरुष-युग के साथ उसकी सच्ची सत्ता अटल है।

- मत्ती 5:18 — ईश्वर के नियम का preserving और स्थायित्व नए नियम से बढ़कर पुरातन है; उसने कहा, “जो कुछ भी टल जाएगा नहीं।”

व्यवहारिक आवेदन

  • जीवन के अस्थिर क्षणों में परमेश्वर की स्थिरता पर भरोसा बनाए रखें—वह नियम और विधान जो हर परिस्थिति में सत्य रहता है।
  • अपने आचरण में स्थिरता दिखाएं—परिवर्तनशील भावनाओं के बावजूद नैतिक संकल्प बनाए रखना कलिश्क नहीं, बल्कि विश्वास की पुष्टि है।

संक्षेप

भजन 148:6 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर ने अपनी व्यवस्था को न केवल बनाकर छोड़ा है, बल्कि उसे सदा के लिए स्थिर बना दिया है—हमे यह स्वीकारना चाहिए कि उसकी सत्ता और कानून कभी टलेंगे नहीं। यह विश्वास हमेंCreator के महानता और उसकी पवित्र व्यवस्था के प्रति विनम्रता और भरोसा सिखाता है।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संক্ষेप अर्थ

- भजन 33:11: परमेश्वर की योजनाएं स्थिर हैं; उसकी सोच परिवर्तन नहीं होती। यह पाठ इस स्थिरता के साथ मिलकर आस्था को मजबूत करता है।

- भजन 102:25–27: सृष्टि के पुराने चक्रों के बीच भी परमेश्वर की स्थिर सत्ता अटल है, जो सांत्वना देता है।

- मत्ती 5:18: नियम की स्थिरता को नया बनाम पुराना नियम नहीं, बल्कि उनके संगत पर बल देता है—ईश्वर के कल्याणकारी क्रम में परिवर्तन नहीं आता।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 148:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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