यिर्मयाह 51:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ्य से बनाया, और जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।

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यिर्मयाह 51:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 51:15 — संदर्भ और अर्थ

यह पद यिर्मयाह के वक्तव्य का हिस्सा है, जिसमें ईश्वर के महान सामर्थ्य और बुद्धि की अभिव्यक्ति साफ उभरती है। बाबत यह गया है कि परमेश्वर ने पृथ्वी को अपने शक्ति- स्रोत से बनाया है, और ब्रह्मांड-स्थापना की कला उसी की बुद्धि से संचालित है। यह चेतावनी और भरोसा दोनों को सहज रूप से जोड़ता है: जो प्रभु पर विश्वास करते हैं, वे उसकी नियंत्रण-छाप और सृजन-कार्य में स्थिरता पाते हैं।

पवित्र पाठ का तात्पात्मिक विवरण

“उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ्य से बनाया, और जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।” इस वाक्य में तीन परम उपहार उभरकर सामने आते हैं—सामर्थ्य, बुद्धि, और प्रवीणता। परमेश्वर ने क्रियात्मक रूप से पृथ्वी की स्थापना की है, इसे सिर्फ अस्तित्व में नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी संरचना और व्यवस्था उसकी बुद्धि के अनुसार है। आकाश को ताने जाना उसका तानबयानी या सुदृढ़ व्यवस्था का प्रतीक है। यह सब कुछ उसकी पूर्ण सत्ता की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है।

प्रमुख शब्दों की व्याख्या

  • पृथ्वी को अपने सामर्थ्य से बनाया— परमेश्वर की सृष्टि-शक्ति, जो अभी भी चल रही ईमानदार नियंत्रण है।
  • जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया— ब्रह्मांड की व्यवस्था और नैतिक-नियमन की गहराई उसकी विवेकपूर्ण योजना में है।
  • आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है— आकाश की विशालता और सितारों की व्यवस्था भी उसकी कुशलता का प्रमाण है।

संबंधी आयतें और संदर्भ

इन विचारों के साथ कुछ अन्य उदाहरणक संदर्भ जो ईश्वर की सृजन-कार्य और व्यवस्था को स्थापित करते हैं:

  • मरकुस 4:39 और अन्य उपदेश— प्रभु के आदेश से समुद्र शांत होता है; उसकी वाणी से प्राकृतिक क्रम चलता है।
  • 创世记 1— सृष्टि की क्रमिक रचना; ज्ञान और योजना की पूर्णता दिखाने वाला अध्याय, जो ईश्वर की बड़ाई में गवाही देता है।
  • युहन्ना 1:3— सभी चीजें उसकी ही ओर से Upholds होती हैं; सृष्टि उसकी सत्ता के द्वारा बनी और संचालित है।

इन cross-रेफरेंस का उद्देश्य यह दिखाना है कि सृष्टि के क्रम और भगवान की सत्ता एक दूसरी के साथ तालमेल में चलते हैं—यह विश्वास के लिए स्थिर आधार बनाते हैं।

आज के संदर्भ में नजीरें और अनुप्रयोग

1) विश्वास की ठोस नींव: यदि ईश्वर ने पृथ्वी और आकाश को अपने सामर्थ्य से बनाया है, तो हमारे जीवन में भी वही सत्ता सुरक्षित और मार्गदर्शक है। कठिन समय में हमें भय नहीं, बल्कि प्रभु की विश्वसनीयता पर स्थिर रहने का आह्वान है।

2) विवेकपूर्ण निर्णय: प्रभु की बुद्धि-प्रवृत्ति हमारी निर्णय-शैली को दिशा देती है—नुकसान-प्रेरित या क्षीण नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और लाभकारी मार्ग अपनाने का आग्रह।

3) ब्रह्मांडीय दृष्टि: आकाश की विशालता देखकर हमारा हृदय उसी के अनुसार विनम्रता और प्रशंसा से भर जाए—आराधना में एकाग्रता बढ़ती है और सांसारिक चिंताएं हल्के पड़ती हैं।

ऐतिहासिक-तत्व से एक संयुक्त दृश्य

पश्चात-आलोचनाओं के स्थान पर, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे पवित्र-वचन-टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-domain विचारों से मिला-जुला एक सरल निष्कर्ष निकलता है: परमेश्वर की सत्ता और बुद्धि प्रकृति के हर पहलू में अभिव्यक्त है; यह केवल रचना-कार्य तक सीमित नहीं, बल्कि हर समय के लिए मार्गदर्शक भी है। प्रमुख उद्धरणों से बचते हुए भी, उनके कलापूर्ण नोट्स से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की शक्ति और विवेक, दोनों मिलकर विश्वास-जीवन की संरचना बनाते हैं।

नोट: नीचे उद्धृत छोटे उद्धरण केवल स्रोत का संकेत हैं और पूर्ण पाठ नहीं लिखे गए:

– Matthew Henry: “God’s power and wisdom appear in the creation and government of the world.”

– Albert Barnes: Eloquent notes affirm that God’s all-sufficiency undergirds every part of nature and history.

– Adam Clarke: He emphasizes that the world rests on God’s power and understanding, upholding all things.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 51:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसी ने पृथ्वी को अपनी सामर्थ्य से बनाया, उसने जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया, और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।

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'हे प्रभु यहोवा, तूने बड़े सामर्थ्य और बढ़ाई हुई भुजा से आकाश और पृथ्वी को बनाया है! तेरे लिये कोई काम कठिन नहीं है।

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प्रकाशितवाक्य 4:11 (HINIRV) »
“हे हमारे प्रभु, और परमेश्‍वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ्य के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और तेरी ही इच्छा से, वे अस्तित्व में थे और सृजी गईं।”

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