यिर्मयाह 31:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“उन दिनों में मैं सारे इस्राएली कुलों का परमेश्‍वर ठहरूँगा और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है।”

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यिर्मयाह 31:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 31:1 पर टिप्पणी — एक परमेश्वर के अपने लोगों के प्रति स्थिर योजना

प readers के लिए संक्षिप्त परिचय

यिर्मयाह नबीनिर्देशन के समय की कठिनाईयों के बीच भगवान अपने चुने हुए लोगों के लिए एक आश्वासन देता है: वह उनके बीच है और वे उसकी प्रजा हैं। यह वचन दर्शाता है कि परमेश्वर का संकल्प स्थिर है — वह इस्राएल के सभी कुलों को अपने साथ जोड़ेगा और उन्हें एक समुदाय के रूप में स्थापित करेगा। यह वादा केवल लौटे हुए बंधुओं के लिए नहीं, बल्कि एक विशिष्ट संरक्षण और उद्धारण की प्रेरणा बनता है कि परमेश्वर अपने सम्बन्धों को मजबूत कर रहा है।

पद का पाठ और संदर्भ

यिर्मयाह 31:1 में परमेश्वर स्वयं उद्घोषित करते हैं कि वे “सारे इस्राएली कुलों का परमेश्वर ठहरूँगा” और वे “मेरी प्रजा ठहरेंगे।” यह वचन यिर्मयाह के नबीत्व के परिप्रेक्ष्य में उस समय के ऐतिहासिक विश्वास-व्यवधान के भीतर भी एक गहन आश्वासन प्रस्तुत करता है: ईश्वर अपने लोगों के बीच निवास करेगा और वे उसकी नज़रों में एकत्व पाएंगे।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

– भगवान का लोगों के बीच स्थायित्व: यह वादा बताता है कि परमेश्वर स्वयं अपने लोगों के साथ रहता है, न कि उनके भाग्य से विक्षिप्त।
– सामूहिक पहचान: “सारे इस्राएली कुल” एकता और विरासत को रेखांकित करता है, जहाँ हर जाति-गुट भी एकात्मता के साथ उद्धार के वादों में शामिल है।
– वाचा-स्थिरता: यद्यपि समाज स्वयं टूट-फूट का अनुभव कर रहा है, परमेश्वर की वाचा अडिग है और वह अपने निवास को बनाए रखता है।

अन्य बाइबल अंशों के साथ तुलनात्मक विचार

  • यहोषू 1:9 — परमेश्वर के साथ दृढ़ साहस और उसकी उपस्थिति की घोषणा, जो बताती है कि ईश्वर अपने लोगों के बीच रहता है।
  • यिर्मयाह 24:7 — “मैं उनका परमेश्वर बनूँगा और वे मेरी प्रजा होंगे”— परमेश्वर की निष्ठा और दोनों ओर के संबंध की गहराई का अनुमान देता है।
  • यूहन्ना 14:23 — यीशु के शब्दों में, पिता और पुत्र का साथ, जो विश्वासियों के लिए आत्मा के द्वारा समान निवास का संकेत देता है।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का “साझा निवास” का विचार एक tendría-आधार है: वह अपने लोगों के भीतर रहता और उनके साथ जुड़ता है, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।

व्यावहारिक अन्वय/आवेदन

  • विश्वास में स्थिरता: कठिन दिनों में भी विश्वासियों को याद रखना चाहिए कि परमेश्वर उनके साथ है और वह उन्हें अकेला नहीं छोड़ता।
  • समुदाय की एकता: “सारे इस्राएली कुलों” की यह कल्पना आज भी चर्च के भीतर एकता और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व कीedu को प्रकट करती है।
  • उद्धार की आशा: यह वचन एक दीर्घकालिक लक्ष्य देता है कि परमेश्वर एक नई स्थिति में अपने लोगों को संरक्षित करेगा और उनमें पवित्रता बढ़ेगी।

क्रॉस-व_REFERENCES और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

– यिर्मयाह 31:7–9: विश्वासियों के लिए पुनर्स्थापन और एकता की युक्ति। यह दिखाता है कि परमेश्वर टूटे-फूटे रिश्तों को भी फिर से जोड़ना चाहते हैं।

– यूहन्ना 17:21: पिता और पुत्र के एकत्व का उद्देश्य — विश्वासियों के साथ एकता में रहने के लिए। यह वही आधार देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ कैसे जुड़ता है।

– यिर्मयाह 31:3: प्रेम-आकर्षण और सतत स्नेह की भाषा, जो वाचा-निर्धारण के पीछे की प्रेरणा बताती है।

संक्षिप्त सार

यिर्मयाह 31:1 की वाणी दर्शाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच निवास बनाकर उनके साथ एक आत्मीय, स्थिर संबंध रखना चाहते हैं। यह न केवल ऐतिहासिक इस्राएल के लिए है, बल्कि विश्वसनीय ईश्वर की पूरी कहानी का केंद्र है: वह अपने लोगों को एक परिवार बनाकर उनके जीवन की दिशा निर्धारित करता है। यदि हम इस वादे को अपने जीवन में ग्रहण करें, तो हमारी आस्था में नई स्थिरता और समुदाय के लिए नई प्रतिबद्धता उभरती है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): नीचे आधिकारिक पाठ से नहीं, बल्कि उनके विचारों के सार को उद्धृत किया गया है ताकि मूल अर्थ और प्रेरणा स्पष्ट रहे:

– “ईश्वर अपने निवास के साथ अपने लोगों को एकजुट रखते हैं; यह उनके चरणों में सहारा और उनके दिलों में विश्वास का धैर्य बनता है।”

– “व्यापक समूह के भीतर एकता, परमेश्वर की सच्ची उपस्थिति और उस की वाचा की स्थिरता की पुष्टि है।”

नोट: यदि आप चाहें तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सटीक संक्षिप्त उद्धरणों के लिए विशिष्ट शीर्षकों/खण्डावली के अनुसार खोजकर दे सकता हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 31:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उस समय तुम मेरी प्रजा ठहरोगे*, और मैं तुम्हारा परमेश्‍वर ठहरूँगा।”

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मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्‍वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूँगा। (यहो. 1:9, व्य. 31:6)

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यिर्मयाह 30:24 (HINIRV) »
जब तक यहोवा अपना काम न कर चुके और अपनी युक्तियों को पूरी न कर चुके, तब तक उसका भड़का हुआ क्रोध शान्त न होगा। अन्त के दिनों में तुम इस बात को समझ सकोगे।

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