Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 31:26 का अर्थ
इस वचन में प्रभु के_msg_ दर्शाता है कि कुछ क्षणों के लिए शांति और जागरूकता पुनः लौटती है। यह बताता है कि भय और उद्वेग के समय में भी परमेश्वर एक नई जागृति, आशा और नींद की मीठी अनुभूति प्रदान कर सकते हैं—यानी भीतर की शांति का अनुभव, संसारिक चिन्ता के परे एक चेतना की राहत।
पृष्ठभूमि
यिर्मयाह के दिनों में इजराइल और यहूदिया के नागरिकों को भारी संकटों का सामना करना पड़ा—उन्हें दया, धैर्य और उद्धार की आवश्यकता थी। इस पंक्ति में यिंद्रयधर्मी संदेश एक विश्राम की अनुभूति के रूप में आता है, जब परमेश्वर अपने दयालु संरक्षण का स्मरण कराते हैं और फिर उनकी आँखों के सामने भविष्य की आशा खुलती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार (Theme in brief)
प्रेरक cross-references
- उद्धार के समय आत्मशांति: रोम 15:13 के संदर्भ से प्रेरणा मिलती है कि शांति का परमेश्वर विश्वासियों के भीतर आशा और आनंद भर दे। (व्याख्या: विश्वास के कारण मन में आशा का परिणामस्वरूप धैर्य और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।)
- मन की शांति का आना: फिलिप्पियों 4:7 से प्रेरणा कि परमेश्वर की शांति, जो सर्व कुछ से अधिक है, आपके विचारों को और दिलों को मसीह यीशु में स्थिर रखे।
- परमेश्वर के दिन का अमन: यशाय 26:3 में स्थिर विश्वास से दिल को शांति मिलती है, जो कठिन समय में स्थायित्व देता है।
उद्धरण—एतिहासिक टिप्पणियाँ (संक्षेप)
यदि पड़ोसी टिप्पणीकारों के शब्द देखें, तो मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क ने इस प्रकार की अनुभूतियों को अपने विश्लेषণে उद्धृत किया है: यह विचार—"आत्मिक जागृति and आराम"—परमेश्वर के साथ विश्वास का परिणाम है। नीचे संक्षेप में उनके सामान्य भाव बताते हैं:
- मैथ्यू हेनरी: संकट के समय परमेश्वर की उपस्थिति के कारण दिलों में चैन लौटता है और विश्वास की नींव मजबूत होती है। (संक्षेपित विचार)
- अलबर्ट बर्न्स: आंतरिक शांति परमेश्वर की कृपा के साथ जुड़ी होती है; वह कहते हैं कि यह शांति विचारों को भी निश्चिंत बनाती है। (संक्षेपित विचार)
- एडम क्लार्क: आस्था के द्वारा प्राप्त शांति अंतःकरण को स्थिर बनाए रखती है, जो भय और चिंता पर विजय देती है। (संक्षेपित विचार)
निष्कर्षजनक व्यावहारिक takeaway
कठिन समय में भी, प्रभु पर भरोसा बनाए रखना चाहिए ताकि मन फिर से जाग्रत हो सके। यह वचन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की नज़र से, शांति और आशा केवल परिस्थिति के अनुसार नहीं, बल्कि उसके अवसरानुरूप हमारे भीतर उभरती है। आप अपनी दिनचर्या में निराशा के क्षणों में भी प्रार्थना और स्मरण करें—परमेश्वर की सच्ची राहत भीतर से आती है और वह जीवन के हर क्षेत्र में स्थिरता प्रदान करती है।