Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 31:5 — पाठ की तुरंत पृष्ठभूमि
यिर्मयह भविष्यद्वक्ता कोरिएन शासन के कठिन समय के बीच एक आशा-पूर्ण संदेश प्रस्तुत करते हैं। इस पद के साथ परमेश्वर अपने लोगों के प्रति नवीनीकृत प्रतिबद्धता और पुनर्स्थापना के उद्देश्य को उद्घाटित करते हैं। यह वचन शमरन के पहाड़ों पर अंगूर की बारियाँ लगाने की तस्वीर के रूप में भविष्य की समृद्धि और सुरक्षा का संकेत देता है, जो यह दर्शाता है कि विपत्ति के बाद भी ईश्वर अपने लोगों को फल-फूल दिया करेगा।
ईश्वर के प्रति विश्वास और आस्था का संकेत
यह वचन यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का दयालु כल और संरक्षण स्थिर है, भले ही तत्काल परिस्थितियाँ त्रुटिपूर्ण क्यों न हों। अंगूर की बारियाँ लगना और उनका फल मिलना एक प्रतीक है—कृष्णीय समृद्धि, स्थिरता, और नए जीवन की आशा—जो यह बताती है कि ईश्वर अपने लोगों के जीवन में पुनर्जागरण और खुशहाली लाते हैं। यह संदेश विशेषकर बंधन-काल के बाद रोमांचक पुनर्निर्माण की उम्मीद देता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र की व्याख्या
- “अंगूर की बारियाँ फिर लगाएगी”: इस चित्र में देवता का पुनर्जागरण-कार्य और समुदाय के लिए नई उन्नति दिखती है। एक बार नहीं, बल्कि बारियों की पुनर्स्थापना—नए जीवन के संकेत।
- “जो उन्हें लगाएँगे, वे उनके फल भी खाने पाएँगे”: यह वाक्य यह कहता है कि भागीदारी और प्रयास दोनों के साथ आशीष मिलती है; परमेश्वर उन लोगों के साथ हैं जो फसल काटकर अपने समुदाय को आंचलिक आहार देते हैं।
समानांतर ग्रंथों से संबंध
कई पुरानी टिप्पणीकारों के अनुसार यह पुनर्स्थापना की समकालीन योजना को दर्शाता है, जहाँ परमेश्वर अपने वचनों को पूरा करते हैं।
पूर्वजनों के टुकड़े: प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संक्षेप में दृष्टीकोण
Matthew Henry के अनुसार यह वचन विश्वासियों के लिए प्रेरणा है कि परमेश्वर अपने लोगों को फिर से जीवन-यात्रा पर लौटाते हैं और फल-फूल से आश्वस्त करते हैं। Albert Barnes इसे चयनित वचनों के साथ जोड़कर देखाते हैं कि सुरक्षा और आशीष बढ़ेगी जब लोग परमेश्वर के मार्ग पर चलते हैं। Adam Clarke इसे परिच्छेदों के आलोक में समझाते हुए कहते हैं कि पुनर्स्थापना की योजना कानून-प्रेरित नहीं बल्कि दयालु क्रिया के रूप में होती है।
इन स्रोतों के मिलेजुले विचार इस वचन को एक समावेशी संदेश देते हैं: विश्वास और समुदाय के साथ परमेश्वर की आशीषें लौटती हैं, और हर कार्य में उसकी सच्ची सत्ता का प्रमाण मिलता है।
छोटे उद्धरण (चयनित): स्पष्टता के लिए
“अंगूर की बारियाँ फिर लगाएगी” — Matthew Henry के शब्दों में यह पुनर्स्थापना की निश्चित चेतावनी है।
आज के संदर्भ में लागू करने योग्य निष्कर्ष
- आशा बनाये रखें: भीषण समय के बाद भी ईश्वर का संकेत है कि फल और सुरक्षा लौटेंगे।
- सहभागिता जरूरी है: समुदाय मिलकर काम करे तो आशीष स्पष्ट होगी।
- विश्वास की स्थायित्व: कठिन समय में भी ईश्वर के वचनों की सच्चाई पर अडिग रहें।
कcross-रेफरेंस
यशायह 35:1-2 — पथ-प्रदर्शक संकेत कि प्रकृति और समुदाय पुनरुत्थान से भरे जाते हैं, एक साथ आ कर।
यिर्मयाह 30:18-22 — पुनर्स्थापना की योजना की पुष्टि, और परमेश्वर के लोगों के लिए उनके कब्र से बाहर आने की प्रतीक्षा।
यिर्मयाह 32:41 — अंततः परमेश्वर की महिमा और उनके लोगों की सुरक्षा का स्थायित्व।
सार: यह वचन एक बार फिर परमेश्वर की करुणा और उनकी योजना की स्थिरता का स्मरण कराता है—भीतरी परीक्षा के भीतर भी वे पुनः जीवन और फल-फूल लाते हैं, और हमें विश्वास, सहभागिता, और आशाओं से भर देता है।