यिर्मयाह 26:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के आरम्भ में, यहोवा की ओर से यह वचन पहुँचा,

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यिर्मयाह 26:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 26:1 का सरल अर्थ

यह वचन बताता है कि यहोवा ने यहोशिया के बेटे यहूदा के राजा यहोयाकीम के समय यह यिर्मयह को संदेश भेजा। अर्थ यह है कि परमेश्वर की चेतावनी, निर्देश और भविष्यद्वाणी राजा और उसकी व्यवस्था के लिए उसी आरम्भ से आरम्भ होती है, जब वह बात दुनिया के लिए उजागर होती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह मसीही-युग की शुरुआत में एक गम्भीर चिट्ठी लेकर आता है: देश के सामने नये शासनकाल की अवस्था, राजा यहोयाकीम का शासन-समय और यरूशलेम की धार्मिक-राजनीतिक स्थिति। यहोवा के वचनों का लेखक-न्याय, दया और चेतावनी का संदेश यहूदा को सुनाते हैं कि परमेश्वर उनकी पापों के कारण प्रत्युत्तर दे रहे हैं, और वे परिणाम भुगतेंगे यदि他们 पलटकर धर्मी नहीं बनते।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • यह वचन बताता है कि परमेश्वर समय-समय पर विशिष्ट राजाओं के राज्य आरम्भ पर अपनी भाषण देता है, ताकि राज्यनीति और धार्मिक जीवन एक साथ परखा जा सके।
  • यिर्मयाह का समयकाल पाप और प्रतिज्ञा दोनों को प्रकाशमान बनाता है—कृत्यों के अनुसार परिणाम और परमेश्वर की उद्धार-योजना की उम्मीद साथ-साथ चलती है।
  • यह एक संकेत है कि मार्ग से भटकना समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है—राजा से लेकर धार्मिक नेताओं तक।

थीमेटिक बिंदु

  1. धार्मिक और राजनीतिक जीवन का एकता—यहोवा की वाणी राजनीतिासन को भी दिशा देती है।
  2. न्याय और दया की संतुलित शासन-रचना—समय पर चेतावनी के साथ उद्धार का मार्ग भी प्रकट होता है।
  3. प्रतिज्ञा के पथ से विचलन पर अनुशासनात्मक परिणाम—समय के साथ पथ परिवर्तन की आवश्यकता।

अनुसार cross-references (संक्षेप अनुमानित व्याख्या)

1) यिर्मयाह–2:3: परमेश्वर के प्रति वफादारी के महत्व पर विचार देता है कि क्यों राजा और प्रजा दोनों को एक साथ खड़ा रहना चाहिए।

2) दानियेल 9:25-27: समय के आचरण और उद्धार-योजना के मिश्रण पर प्रकाश डालता है कि क्या संचालक और समुदाय परमेश्वर की योजना के साथ चलते हैं तो उद्धार संभव है।

3) 1 राजा 8:60: एकता और ध्यानावली को मंदिर के अगूंठे में सद्भावना के साथ स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

संक्षिप्त अनुप्रयोग

- अपने राज-व्यवहार और धार्मिक कार्यों में ईमानदारी बनाये रखें; यदि नयी नीति या निर्देश आ रहे हों, तो उनके पीछे सत्य, न्याय और दया को प्राथमिकता दें।

- नेता और समुदाय मिलकर परमेश्वर की वाणी के अनुरूप निर्णय लें ताकि परिणाम बुरे नहीं हों।

कथन-सार

यह वचन यह बताता है कि परमेश्वर समय-समय पर अपने संदेशों के माध्यम से राजा और राष्ट्र को दिशा देता है; यह चेतावनी और उद्धार, दंड और कृपा के चक्र को समझाने के लिए है ताकि समुदाय अंततः ईमानदारी और भक्ति की राह पर चले।

उद्धृत प्रयोगात्मक टिप्पणी

संयोगवश यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों से छोटे उद्धरण देखते हैं, तो वे संकेत देंगे कि परमेश्वर के शासन में राजनीति और धर्म एक ही धुरी पर चलते हैं; परन्तु यहाँ पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 26:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 इतिहास 36:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 36:4 (HINIRV) »
तब मिस्र के राजा ने उसके भाई एलयाकीम को यहूदा और यरूशलेम का राजा बनाया और उसका नाम बदलकर यहोयाकीम रखा; परन्तु नको उसके भाई यहोआहाज को मिस्र में ले गया।

यिर्मयाह 27:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 27:1 (HINIRV) »
योशिय्याह के पुत्र, यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के आरम्भ में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा।

2 राजाओं 23:34 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 23:34 (HINIRV) »
तब फ़िरौन-नको ने योशिय्याह के पुत्र एलयाकीम को उसके पिता योशिय्याह के स्थान पर राजा नियुक्त किया, और उसका नाम बदलकर यहोयाकीम रखा; परन्तु यहोआहाज को वह ले गया। और यहोआहाज मिस्र में जाकर वहीं मर गया।

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