यिर्मयाह 26:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए अब अपना चालचलन और अपने काम सुधारो, और अपने परमेश्‍वर यहोवा की बात मानो; तब यहोवा उस विपत्ति के विषय में जिसकी चर्चा उसने तुम से की है, पछताएगा।

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यिर्मयाह 26:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 26:13 का संक्षेप एवं पाठ-परिप्रेक्ष्य

यिर्मयाह ने समय-समय पर युवाओं को चेतावनी दी कि ईश्वर की आज्ञाओं के विरुद्ध चलना 결국 विपत्ति को जन्म देता है। इसVerse में भविष्यवक्ता कहता है कि आप अपने चालचलन और कर्म सुधारें, ईश्वर यहोवा की बात मानें; तब वह उस विपत्ति के बारे में जो उसने तुमसे कही है, पछताएगा। यह संदेश तत्कालीन य roaming में मूरत-पूजा, भ्रष्टाचार और राजनीतिक-नैतिक गिरावट के बीच एक अवसर-समझौते का संकेत है: नयी राह अपनाने से परमेश्वर स्वयं व्यवस्था के अनुसार परिणाम बदल सकता है।

मुख्य अर्थ

यह verse आह्वान है कि लोग अपनी नीयत और व्यवहार को नवीनीकृत करें। विधान यह है कि यदि वे ईश्वर के निर्देश मानकर अन्याय से दूर रहते हैं, तो ईश्वर उन भविष्यवाणी-खतरों से भी पीछे हट सकता है जिनके बारे में उसने सचेत किया है। यह उद्धार-प्रेरक भी है: परिवर्तन से ही परिस्थिति बदलती है।

दो प्रमुख विषय

  • व्यवहार में परिवर्तन: गलत आचरण से लौटना और परमेश्वर के कानून के अनुसार जीवन बिताना।
  • विश्वास और अनुकंपा: ईश्वर अपने लोगों के लिए दया और मार्गदर्शन बनाये रखते हैं, यदि वे इमानदारी से उनकी बात मानें।

संयुक्त रिश्ते-पाठ

1) यिर्मयाह 7:23-24 में कहा गया कि परमेश्वर अपनी राहें बताता है ताकि लोग उनका अनुसरण करें; प्रतिफल में वे शरथ और शान्ति पाएँ।

2) यिर्मयाह 7:28-29 में भविष्यवक्ता यह भी कहता है कि स्थिरता के अभाव में सामाजिक शील गिरता है; परन्तु यदि लोग सुधरें, तो भविष्य की आशा बन सकती है।

3) दानियेल 9:13-14 में यह दिखता है कि परमेश्वर की करुणा तब खुलती है जब लोग उनकी व्यवस्था को मानते हैं।

व्यवहारिक विचार

- प्रतिदिन थोड़े से समय में परमेश्वर के निर्देशों पर विचार करें; छोटे-छोटे से उपायों को नियमित रूप से अपनाएं।

- गलत व्यवहारों के लिए आत्म-आलोचना और क्षमा माँगना सीखें; समुदाय के साथ सत्य और न्याय पर खड़े रहें।

- कठिन समय में भी ईश्वर की कथित बातें याद रखें और धैर्य के साथ सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते जाएँ।

cross-references और संक्षिप्त विवरण

  • यिर्मयाह 7:23-24 — ईश्वर की राहों को जानकर उनका अनुसरण करना सुरक्षा देता है।
  • यिर्मयाह 7:28-29 — शील के गिरने पर कठोर परिणाम, परन्तु सुधार पर आशा बनी रहती है।
  • दानियेल 9:13-14 — नैतिक परिवर्तन से करुणा और प्रतीक्षा खुलती है।

संक्षिप्त समापन

यिर्मयाह 26:13 कहता है: एक वास्तविक परिवर्तन का अवसर है—अपने चालचलन और काम सुधारो, और परमेश्वर की बात मानो। यदि आप सच्चे मन से लौटते हैं, तो विपत्ति के बारे में जो भविष्यवाणी कही गई है, उसका प्रभाव घट सकता है। यह वचन आज भी निजी जीवन और समाज के लिए मार्गदर्शक संकेत है कि धर्म-आचरण में सुधार से परमेश्वर की ओर से नई आशा खुलती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 26:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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