यिर्मयाह 26:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब यहोयाकीम राजा और उसके सब वीरों और सब हाकिमों ने उसके वचन सुने, तब राजा ने उसे मरवा डालने का यत्न किया; और ऊरिय्याह यह सुनकर डर के मारे मिस्र को भाग गया।

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यिर्मयाह 26:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 26:21 का अर्थ और संदर्भ

यह पद यह बताता है कि यहोयाकीम राजवंश के समय पवित्रपुरुष यूरियाह धर्मी को राजा יהयाकीम के हाथ से हत्या के प्रयास का सामना करना पड़ा, और नगरपालक वीरों की धमकियों के कारण वह भय से मिस्र भाग गया। कुल मिलाकर यह संदेश देता है कि नबी के लिए प्रतिशोध और विरोध आम बात है, पर परमेश्वर का उद्देश्य आगे बढ़ता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह की किताब में ईश्वरीय संदेश नेयामत के चारों ओर राजनीतिक उथल-पुथल को उजागर किया है। यहोयाकीम के राजा बनने के बाद यिर्मयाह कई बार राजपरिवार और सेनेड्रियन दबाव का सामना करता है। नैतिक एवं धार्मिक संकट के समय यूरियाह का भाग जाना इस कड़ी का एक दृश्य है: एक ईमानदार नबी की रक्षा करने के बजाय राजधर्म के दबाव में उसका जीवन खतरे में पड़ जाता है।

व्याख्यात्मक सूचनाएं

1) तूफानी दबाव: राजा और उसकी स्टाफ ने नबी के संदेशों से असहमत होते हुए उसे खत्म करने का विचार किया, जो दिखाता है कि धार्मिक सत्य कहने वाले कभी-कभी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष करते हैं।

2) भागना की विवशता: यूरियाह का मिस्र भागना बताता है कि कभी-कभी ठोस सत्य से बचना सुरक्षित लग सकता है, पर भागना आंतरिक विश्वास या परमेश्वर की सुरक्षा से विमुख होना नहीं है।

3) परमेश्वर की योजना: ऐतिहासिक आलोचना यह दर्शाती है कि परमेश्वर के संदेशवाहक पर किया गया विरोध भी अंततः परमेश्वर के उद्धारकार्य को रोक नहीं सकता।

अन्वेषण योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस

  • यिर्मयाह 11:21-23 — नबी के विरुद्ध प्रतिशोध की आशंका और प्रभु की सुरक्षा का विश्वास।
  • यिर्मयाह 38:4-6 — नबी के जीवन के लिए सत्ता का दबाव और उसकी रक्षा की अप्रत्याशा संघर्ष के बीच।
  • यशायाह 40:31 — भय के बावजूद ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना।

इन संदर्भों में स्पष्ट होता है कि नबी के जीवन की सुरक्षा और संदेश का प्रासंगिकता परमेश्वर के भविष्यवाणी-कार्य से जुड़ी है, और विपरीत परिस्थितियाँ भी उसे दबाने नहीं दे सकतीं।

शब्दार्थयुक्त संक्षेप

  • यिर्मयाह – परमेश्वर के संदेशवाहक, जो बुरे समय में भी सच बोलता है।
  • यहोयाकीम – यहोवा द्वारा स्थापित राजा, जिसके शासन के दौरान नबीय ज्ञापन आता रहा।
  • मिस्र – भागने का दृश्य दर्शाता है कि संकट के समय विकल्प कैसे बनते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 26:21 का संदेश यह है कि ईश्वर के दूत के विरुद्ध सत्ता का प्रतिशोध होता है, पर मनुष्य की सुरक्षा और संदेश की सत्यता तब भी नहीं टूटती जब दलदल में उसे भागना पड़ता है। नबी की जीवनी में यह घटना यह सिखाती है कि भय के बावजूद विश्वास बनाए रखना है और परमेश्वर की योजना के अनुसार आगे बढ़ना है।

संदेश का व्यावहारिक takeaway

  • नौकरी-राजनीति और दबाव के बीच नैतिक निर्णयों की प्राथमिकता बनाएं।
  • अपना भरोसा परमेश्वर पर रखें, भागना चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों—परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।

उद्धृत मौलिक टिप्पणीकारों से संक्षेपित विचार:

यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रमुख बिंदु संक्षेप में मिलते हैं—पर मुख्य धार नीचे दी गई है: नबी के विरुद्ध विरोध का सामना, भय के क्षणों में भी ईमान की परीक्षा, और परमेश्वर की राजधानी योजना की निरंतरता। आवश्यक सटीक उद्धरण इस प्रविष्टि में स्थान के भीतर संकर नहीं हैं, बल्कि उनके विचारों के संकेतस्वरूप संदर्भित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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