यिर्मयाह 15:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “यदि मूसा और शमूएल भी मेरे सामने खड़े होते, तो भी मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता। इनको मेरे सामने से निकाल दो कि वे निकल जाएँ!

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यिर्मयाह 15:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 15:1 — पल्ले का संदेश और परमेश्वर की अवतारना

परिसर-स्थितिः यह संदेश यिर्मयाह के सलाहकार-सम्बन्धी समय में आता है, जब यिर्मयाह ईश्वर के संदेश को समाज के पाप और प्रतिउत्तर के बीच बोल रहा था। परमेश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि तत्कालीन व्यवस्था के भीतर उनका क्रोध और क्रिया-अनुमति कहाँ टिकती है, भले ही कोई महान व्यक्ति क्यों न हो।

ईश्वर का दृढ़ निर्णय और विश्वास की आलोचना

यिर्मयाह 15:1 में परमेश्वर कहते हैं कि यदि मूसा और शमूएल भी सामने खड़े होते तब भी उनका मन उन लोगों की ओर न फिरता। यह वाक्य अपने आप में एक भारी चेतावनी है कि आधिकारिक धार्मिक नेता या इतिहास के महान पात्र भी जनता के पाप के सामने निर्बल हो सकते हैं, और परमेश्वर के विरुद्ध फैले अविश्वास-बंधन को तोड़ना संभव नहीं है। यहां ईश्वर की इस बात से यह निकलकर आता है कि उनकी योजना और मार्ग, जो पाप के कारण बनती दूरी को नहीं बदलते, बल्कि पवित्र न्याय के अनुसार चलती है।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता — ईश्वर की पुरुष-गंभीरता, जिसे अधर्म के कारण अस्वीकृति की स्थिति में प्लान-चेंज की नहीं, बल्कि न्याय की स्थिरता के अनुसार देखा जाता है।
  • निकाल दो — यह शब्द-चेतावनी है कि बुराई के साथ समझौता संभव नहीं है, और ईश्वर वास्तविक परिवर्तन के लिए दंड-उत्पत्ति का संकेत देते हैं।

관련 passage (cross-references)

  • यिर्मयाह 7:16 — पुराने विश्वासघात के समय परमेश्वर के निर्णय का संकेत—ध्रुव nishchay; आशा के लिए नहीं, यहूदियों के पाप पर विशिष्ट न्याय का संकेत देता है।
  • यिर्मयाह 18:7-10 — मरूथ, वन-उद्योग आदि परिस्थितियों में परमेश्वर के बुलावे और नवीनीकरण के अवसरों का उल्लेख, ताकि जन-परिवर्तन संभव हो सके।
  • यशायाह 29:13-14 — धार्मिकता की आड़ में ढकोसला पर मुकदमा, क्योंकि वही असली हृदय परिवर्तन की आवश्यकता बताता है।

ऐतिहासिक-विश्वास पर प्रभावी समझ

यह पाठ इस बात को उजागर करता है कि परमेश्वर के साथ रहने का मुख्य आधार—न्याय और सत्य का पालन—कभी-भी निष्क्रिय नहीं रह सकता। यहां दिखता है कि धार्मिक आचार-व्यवहार चाहे कितना भी समृद्ध क्यों न हो, यदि वह परमेश्वर के हृदय को नहीं बदल पाता, तो उसका परिणाम दिखना है।

आज की शिक्षा और अनुप्रयोग

1) खरापन और पाप के सामने भी, ईश्वर के विरुद्ध “आत्म-स्वीकृति” की स्थिति नहीं मानी जाती; सत्य और पवित्रता के मार्ग पर ही चलना चाहिए।

2) नेता या विशिष्ट महापुरुषों کی भूमिका चाहे कितनी भी ऊँची हो, परमेश्वर के सामने उत्तरदायित्व उनके साथ होता है; दुराचार या धर्म-यथार्थ से बचना संभव नहीं।

3) प्रार्थना में बदलते समाज के लिए केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और निष्ठा की मांग है—यही संदेश यिर्मयाह के समय से आज तक बना रहता है।

कथन-उद्धरण (नीति-सार)

यहाँ नीचे का छोटा उद्धरण सार्वजनिक-डायरेक्ट टुकड़ों के रूप में संदर्भित है, ताकि पाठ की संरचना स्पष्ट हो सके:

“यदि मूसा और शमूएल भी मेरे सामने खड़े होते, तो भी मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता।”

नोट: नीचे दिए गए विवरण परमेश्वर के न्याय की प्रकृति पर आधारित विश्लेषण से लिए गए हैं; Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान public-domain टिप्पणी-आधार को समाहित किया गया है, ताकि समझ में स्पष्टता बने।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 15:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 14:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 14:14 (HINIRV) »
तब चाहे उसमें नूह, दानिय्येल और अय्यूब* ये तीनों पुरुष हों, तो भी वे अपने धर्म के द्वारा केवल अपने ही प्राणों को बचा सकेंगे; प्रभु यहोवा की यही वाणी है।

यहेजकेल 14:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 14:20 (HINIRV) »
तो चाहे नूह, दानिय्येल और अय्यूब भी उसमें हों, तो भी, प्रभु यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, वे न पुत्रों को और न पुत्रियों को बचा सकेंगे, अपने धर्म के द्वारा वे केवल अपने ही प्राणों को बचा सकेंगे।

भजन संहिता 106:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 106:23 (HINIRV) »
इसलिए उसने कहा कि मैं इन्हें सत्यानाश कर डालता यदि मेरा चुना हुआ मूसा जोखिम के स्थान में उनके लिये खड़ा न होता ताकि मेरी जलजलाहट को ठण्डा करे कहीं ऐसा न हो कि मैं उन्हें नाश कर डालूँ।

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