Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 15:1 यिर्मयाह 15:2 यिर्मयाह 15:3 यिर्मयाह 15:4 यिर्मयाह 15:5 यिर्मयाह 15:6 यिर्मयाह 15:7 यिर्मयाह 15:8 यिर्मयाह 15:9 यिर्मयाह 15:10 यिर्मयाह 15:11 यिर्मयाह 15:12 यिर्मयाह 15:13 यिर्मयाह 15:14 यिर्मयाह 15:15 यिर्मयाह 15:16 यिर्मयाह 15:17 यिर्मयाह 15:18 यिर्मयाह 15:19 यिर्मयाह 15:20 यिर्मयाह 15:21



यिर्मयाह 15:21 का मुख्य बिंदु: परमेश्वर की दया से उद्धार और दुष्टों के पंजे से छुटकारा
यह वचन दिखाता है कि ईश्वर अपने डराने वाले विरोधियों के सामने भी यहूदियों को सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। यिर्मयाह ने यह प्रार्थना-भरी स्थिति में परमेश्वर से राहत चाही, और देवता की कृपा से उद्धार की आशा दिखाई है। इस संदर्भ में “उद्धार” का अर्थ है भय, नुकसान, रोक-टोक और दमन से मुक्ति; और “दारुण उपद्रवी” वे शक्तियाँ हैं जो नीयत से नहीं, वरन् हिंसा और दबाव से भविष्य को दबाने का प्रयास करती हैं।
भाषिक और साहित्यिक संदर्भ
यिर्मयाह 15:21 में ईश्वर प्रत्यक्ष व प्रतिज्ञा के रूप में कह रहे हैं कि वे उपद्रवी लोगों के पंजे से छुड़ा लेंगे। यह एक राहत-भरी घोषणा है जिसमें प्रभु की संहिता और संरक्षण स्पष्ट है। यहनुभवजनक शब्दावली बताती है कि परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए कुछ-कुछ समय में “पंजे” की प्रतीकात्मक भाषा से शक्ति दिखाते हैं—बाधाओं, खतरों और अत्याचारों के विरुद्ध एक ठोस प्रतिरक्षा।
पढ़ने का theological significance
पवित्र-वचन संदर्भ (cross-references)
1) दानिएल 3:24-25: आग में डाले जाने पर ईश्वर की रक्षा के प्रतीक; यह दिखाता है कि दुष्टों के पंजों से उद्धार संभव है जब परमेश्वर सच्चाई में साथ हो।
2) यिर्मयाह 32:8-9: ईश्वर की सुरक्षा के लिए आशावादी दृष्टिकोण और भरोसा; उद्धारकर्ता के हाथों में जीवन-यात्रा सुरक्षित रहती है।
3) रोम 8:31-38: ईश्वर के प्रेम की सुरक्षा और भीषण समय में भी नहीं छूटना—उद्धार की संकल्पना आत्म-स्थिरता देती है।
स्वतंत्र विचार: पूछताछ के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 15:21 में परमेश्वर स्पष्ट करते हैं कि वे अपने लोगों को उपद्रवी शक्तियों के पंजों से छुड़ा लेंगे। यह वाक्या न केवल तत्काल संरक्षण का आश्वासन देता है, बल्कि विश्वास की नींव को भी मजबूत करता है कि परमेश्वर भय और दबाव के बीच भी अपनी सत्ता से मुक्त करता है। यह दृश्य हमें ईश्वर की कट्टर कृपा और सच्चे उद्धार के अनुभव की ओर आकर्षित करता है—जहाँ भय के समय भी प्रभु की सुरक्षा और मार्गदर्शन रहता है।
पूर्वलिखित टिप्पणीधाराओं के प्रेरणा-स्रोत में मैथ्यू हेनरी, अाबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार मिलते हैं, जिनमें से किसी भी पंक्तियों के सीधे संकलन का पूर्ण उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है, पर उनके संकेत यह दिखाते हैं कि उद्धार की प्रक्रिया में ईश्वर की कृपा, सुरक्षा और विश्वास की भूमिका कैसे स्पष्ट होती है।