Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 15:13 का सीधा अर्थ
इस वचन में पिता-रेवत के अनुसार परमेश्वर कहता है कि तेरे सब पापों के कारण जो देश-भर में हुए हैं, उसके कारण वह तेरी धन-सम्पत्ति और खजाने, बिना दाम दिये लुटा देगा। यह पूर्व-नतीजे की चेतावनी है: sin के परिणामस्वरूप धन-सम्पत्ति का नुकसान और विपत्ति आनी अनिवार्य है।
संदर्भात्मक पृष्ठभूमि
यिर्मयाह नबी के समय यहूदा ईश्वर के विरुद्ध बहुत बार विघ्न डाल रहा था—राजनीतिक उथल-पुथल, सामाजिक भ्रष्टाचार, और मंदिर-आडंबर। नबी यिर्मयाह यह संदेश दे रहा है कि परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के कारण पाप-ग्रस्त समाज पर दण्ड आयेगा, और इसका आघात जनता के धन-सम्पत्ति पर भी होगा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
गंभीर टिप्पणियाँ और तात्पर्य
यह चेतावनी बतलाती है कि निष्ठा-भंग और अन्याय लंबे समय तक टिक नहीं पाते। परमेश्वर के न्याय का आना सामाजिक-आर्थिक अस्थिरता लाता है ताकि लोग अपनी नीतियाँ और विश्वास पुनः समायोजित करें। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि धन-संपदा एक अस्थाई पूंजी है, जिसे परमेश्वर के प्रति निष्ठा और भलाई के साथ उद्देशित किया जाना चाहिए।
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंस और सार
- यिर्मयाह 6:13–14: सामाजिक भ्रष्टाचार के कारण न केवल धन में कमी, बल्कि मानसिक शांति भी खो जाती है।
हील-उद्धृत विचार (संक्षेप):
Matthew Henry के अनुसार: “दुखद परिणाम तब आते हैं जब लोग धन और आराम को परमेश्वर की स्तुति के ऊपर मान लेते हैं।” (लेकिन यह युक्तीपूर्ण उल्लेख केवल सार-सारणी हेतु है; पूर्ण पाठ नहीं देता।)
Albert Barnes के अनुसार: “धन-हानि पाप की प्रकृति का फल है; जब लोग असत्य और अन्याय को सुरक्षा मान लेते हैं, धनक्षय आ जाता है।”
Adam Clarke के अनुसार: “ईश्वर के न्याय से बचना कठिन है; यह पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर भी परिणाम दिखाता है।”
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
- अपनी धन-संपदा को ईश्वर के साथ संतुलित करना चाहिए।
- सामाजिक-नैतिकता और निष्पक्षता पर जोर दें, ताकि न केवल धन-हानि से बचा जा सके, बल्कि परमेश्वर के साथ स्थायी सम्बन्ध बना रहे।
संक्षेप निष्कर्ष
यिर्मयाह 15:13 यह सूचित करता है कि पाप-आचरण का सामाजिक और आर्थिक परिणाम अवश्य आता है। परंतु दंड-घटा के बीच भी परमेश्वर की प्रतिज्ञा है—यदि नेता और समुदाय निरन्तरता पूर्वक पश्चात्ताप और परिवर्तन की राह चुनें, तो आशा की राह खुली रहती है।
सूचना: ऊपर के उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त संदर्भ दिये गये हैं।