Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52



यिर्मयाह 21:1 का पठन-संदेश
यिर्मयाह बाइबल का वह भाग है जहाँ परमेश्वर का संदेश पुराने योरोप-राज्य की राजनीतिक हलचल और सामाजिक अनास्था के बीच उजागर होता है। इस पद में राजा सिदकिय्याह के समय यिर्मयाह के पास एक नया वचन पहुँचा है। यह वचन उस समय आया जब पवित्र-संस्थापक पवहूर के पुत्र मल्कीय्याह और मासेयाह याजक के पुत्र सपन्याह के हाथ से यह कहला भेजा गया। संदर्भ यह बताता है कि राज्य के नेता और काठियायुक्त अधिकारी किसी न किसी प्रकार से यिर्मयाह के संदेश को चुनौती दे रहे थे, और परमेश्वर अपने दूत के जरिए सीधे अपने दूत को प्रेरित कर उनके सामने स्थापित कर रहा था।
मुख्य विचार
यह वचन स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने मसीह-युग के संदेश को सीधे और विशुद्ध माध्यमों से केन्द्रित करता है—यिर्मयाह, जो एक भगवान-प्रेमी विश्वासी के रूप में, राज्य के दबावों के बावजूद सच बोलता है। राजा के पास आए इस संदेश का उद्देश्य यह बताना है कि परमेश्वर सत्ता-शासन के भीतर भी संदेशवाहक बनकर समय-समय पर सचेत करता है और भविष्य के निर्णयों की दिशा देता है।
तीन प्रमुख विषय
व्यावहारिक अनुशीलन
आज के संदर्भ में यह पाठ बताता है कि परमेश्वर के दूत, प्रेरित संदेश और उद्धार का संदेश सत्ता के दबाव के बावजूद सत्य और नैतिक स्पष्टता के साथ आता है। विश्वासियों के लिए यह सीख है कि हमारे निर्णय में परमेश्वर की वाणी की प्राथमिकता हो और किसी भी दबाव पर उसका मान रखने के लिए तैयार रहें।
क्रॉस-रेफरेंस
यशायाह 30:21 — जब आप किसी मार्ग में हों, तो एक कान आपके दिल के निकट रहता है; वही मार्ग जो परमेश्वर के संकेत से निकलता है।
यिर्मयाह 1:9 — प्रभु ने यिर्मयाह के मुँह में शब्द रखे ताकि वह प्रचलित प्रवृत्तियों के विरुद्ध भी सत्य बोले।
2 तीम initial 4:2 — पुकारों का उत्तर देते हुए साफ़ और धीर-धार: दायित्व निभाएं, चाहे परिणाम कितने भी कठोर क्यों न हों।
पाप-निर्मूलन और आशा
यह पद निष्कर्ष देता है कि परमेश्वर के संदेश की कसौटी प्रकट सत्य है, और अस्थिर राजनीति के बीच भी भविष्य-निर्देशन की आशा बनी रहती है। यह आशा हमारे जीवन में ईमानदार और नम्र बने रहने की प्रेरणा देती है।
संक्षिप्त सार
यिर्मयाह 21:1 यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने दूतों के माध्यम से समय-समय पर अपने संदेश को पहुंचाते हैं—राजा और प्रशासनिक नेताओं के बीच भी सत्य और नैतिकता की राह को बनाए रखना आवश्यक है। इस बीच विश्वसनीय चिह्न यह है कि प्रेरणा और मार्गदर्शन निर्भीकता के साथ प्रस्तुत किया जाता है ताकि लोग सही निर्णय ले सकें।
एंथोलॉजी चिन्तन: यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि आध्यात्मिक नेतृत्व को राजनीतिक दबाव नहीं रोकना चाहिए; परमेश्वर की वाणी उच्चतम लक्ष्य है और उसका पालन जीवन के हर क्षेत्र में निर्णय-संरचना की कुंजी है।