Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 4:1 — संदर्भित परिदृश्य और संदेश
यह पाठ यिर्मयाह के समय के धार्मिक-राजनीतिक संकट में आता है, जब यहोवा अपनी अवहेलना और इस्राएल की आध्यात्मिक प्रस्थान के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। प्रभु कह रहे हैं कि यदि इस्राएल लौटे, तो वे उनके पास लौट आएँ; यदि वे घिनौनी वस्तुओं को परमेश्वर के सामने से दूर करें, तो उन्हें आवारा बनना नहीं पड़ेगा। यह वाणी न सिर्फ व्यवहारिक सुधार की मांग है, बल्कि 敬畏 और नैतिक क्रम के पुनःस्थापन का आह्वान है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
- परमेश्वर मोड़ते हुए भी प्रेम को स्थिर रखते हैं; वे पथभ्रष्टता के बावजूद पवित्रता की राह सुझाते हैं।
- विश्वास में वापसी और पवित्र जीवन की मांग, यह बताती है कि भक्ति और नैतिकता ईश्वर के साथ सामंजस्य के बिना अधूरी है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
- “इस्राएल”: परमेश्वर के चुने हुए लोगों के समूह के लिए एक पहचान है, जो आंतरिक समर्पण और आज्ञापालन से जुड़ा है।
- “लौट आए”: फिर से भरोसे, विश्वास की एकाग्रता और परमेश्वर के चित्त के अनुरूप जीवन की पुनःस्थापना।
- “घिनौनी वस्तुएं”: देवत्व के लिए अभिश्रद्ध वस्तुएँ या पाप, जिन्हें हटाने पर आस्था की नई दिशा मिलती है।
संबद्ध पद
यह पाठ अन्य ठहरावों से जुड़ता है जहाँ परमेश्वर पाप से वापसी और पवित्र जीवन की ओर आकर्षित करते हैं। उदाहरणस्वरूप: यहोवा का पुकारना कि वे दर्शन में लौटें; पवित्रता और निष्ठा के कारण आशीष की तैयारी।
यही समय के लिए प्रयोग
समय-प्रसंग और अन्य शिक्षण स्रोत
प्राचीन टिप्पणीकारों के संकेत इस प्रकार हैं:
मैथ्यू हेनरी/एलबर्ट बार्न्स/आसाम क्लार्क के समान ध्वनि-रेखांकन से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपनी अवहेलना पर कसता है परन्तु कभी-कभी स्मरण-उद्धृतियाँ के साथ आशा भी देता है कि लौटना संभव है।
हमारे दिन के लिए नज़दीकी अर्थ
यिर्मयाह 4:1 की यह आज्ञा हमें स्मरण दिलाती है कि ईश्वर के पास लौटना तभी संभव है जब जीवन से अन्यायी वस्तुएँ दूर हों और विश्वास की एक नई दिनचर्या स्थापित हो। व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और समुदायिक सत्य-जीवन का संतुलन बनाए रखना परमेश्वर के साथ गहरे संबंध को पुनःस्थापित करने का मार्ग है।
चरित-उद्धरण (सीधे उद्धरण नहीं, परिचयात्मक संदर्भ)
यदि आप चाहें, तो नीचे दिये गए निर्देशानुसार हल्के-फुल्के उद्धरण देखें: मैथम्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और आडम क्लार्क ने इस प्रकार के संदेशों में अहंकार-विरोध और पवित्रता की महत्ता पर प्रकाश डाला है—परन्तु यहाँ पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दिया गया है।