यिर्मयाह 4:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस कारण पृथ्वी विलाप करेगी, और आकाश शोक का काला वस्त्र पहनेगा; क्योंकि मैंने ऐसा ही करने को ठाना और कहा भी है; मैं इससे नहीं पछताऊँगा और न अपने प्राण को छोड़ूँगा।”

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यिर्मयाह 4:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 4:28 पर विचार

मुख्य नुक्ता: परमेश्वर की ठान दी गयी योजनाओं के अनुसार पृथ्वी और आकाश विलाप करेंगे, क्योंकि उसे ऐसा करना निश्चित रूप से बोलना और करना था; यह घटनाक्रम एक परम निष्कर्ष की ओर संकेत है, जिसमें विध्वंस और पश्चात्ताप के बाद नई शुरुआत संभव होती है। यह वाक्य एक कठोर, परन्तु आश्वस्त संदेश देता है: परमेश्वर के निर्णयों के विरुद्ध भागना संभव नहीं; वह अपनी पवित्र हुकूमत में न्याय और उद्धार दोनों के लिए जिम्मेदार है।

पहेली-सीखा: साहित्यिक संदर्भ

यिर्मयाह की किताब में यह वाक्यर्ती ध्वनि उन समय की पृष्ठभूमि दर्शाती है जब यहूदा के नगरों पर परमेश्वर का प्रकोप नजदीक था। संदर्भ में “पृथ्वी विलाप करेगी” और “आकाश शोक का काला वस्त्र पहनेगा” जैसी छायादार उपमाएं दिखाती हैं कि प्राकृतिक सृष्टि भी मानव बुराइयों के प्रभाव से प्रभावित हो रही है। व्यवस्था-निष्ठ प्रेषण में यह निष्कर्ष निकलता है कि परमेश्वर का निर्णय आकाश-पाताल तक गूंजता है और उसका परिणाम निस्संदेह होगा।

धार्मिक महत्त्व

यहां यहूदी-नियति में एक गम्भीर चेतावनी है कि sin के विरोध में परमेश्वर का क्रोध और न्याय स्पष्ट है। साथ ही, यह आश्वस्त करता है कि परमेश्वर फैसला लेने में अतिशय न बनी-रहते नहीं; वह पूर्ण विश्वास के साथ कहता है कि वह पछतावा नहीं करेगा और न प्राण को छोड़ देगा—यानी वह अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेगा। पाठक को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि परमेश्वर के भय में जीवन कैसे बदले, और असामान्य विपत्तियाँ भी उसके चयनित मार्गों का हिस्सा हो सकती हैं ताकि उद्धार की दिशा स्पष्ट हो सके।

क्रॉस-रेफरेंसेस (सार-संदर्भ) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • यशाय 13:13 — आकाश के गर्जन और पृथ्वी के कम्पन की भूमिका, जब परमेश्वर अपने निर्णयों को पूर्ण करते हैं; यह भी समान अलंकरण देता है कि आकाश-भूमि एक साथ reagieren करते हैं।
  • यिर्मयाह 7:20 — यहूदियों के अविश्वास और परिणामस्वरूप आने वाली क्लेश की चेतावनी; नैतिकता और दायित्व का स्मरण कराती है कि परमेश्वर की पवित्रता कितनी गम्भीर है।
  • रोमियों 8:22 — समस्त सृष्टि मानवीय पाप के कारण उत्पन्न विक्षोभ को अनुभव करती है; यहाँ से उद्धार की आशा का संकेत मिलता है कि दुख के बीच भी परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।

इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि प्रकृति और इतिहास दोनों परमेश्वर के न्याय और उद्धार के लिए मंच हैं, और मानव की चूक के साथ-साथ उसकी कृपा भी प्रकट होती है।

यात्रा-पर問い (आत्म-चिन्तन के लिए)

  • मैं अपने जीवन में ऐसी कौन-सी चीज़ें पहचानता/पहचानती हूँ जो आज परमेश्वर के न्याय के साथ जुड़ती हैं?
  • क्या मेरी जिंदगी आकाश और पृथ्वी की चकित कर देने वाली प्रतिध्वनि के अनुरूप है—जो निर्भय, दृढ़ और सत्यनिष्ठ हो?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 4:28 हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर के निर्णय स्थिर और निश्चयपूर्ण हैं। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी भयावह क्यों न लगें, वे एक उद्देश्य की ओर ले जाती हैं—पृथ्वी-आकाश की विलाप के पीछे भी उसकी पवित्र न्याय और उद्धार की योजना काम कर रही है। हमारे जीवन में भी उसी क्रम को मानना और उसकी दिशानिर्देशों पर चलना सत्य की रक्षा करता है।

उद्धरण संदर्भ (सिर्फ तुलनात्मक उपयोग के लिए)

यदि आपके पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से किसी उद्धरण की सटीक संरचना चाहिए, तो नीचे दिए गए छोटे उद्धरण केवल संदर्भ-उद्धरण के लिए हैं:

Matthew Henry—“...पवित्र निर्णयों के अनुसार” (सार-सम्मेलन के लिए संदर्भित विचार)

Albert Barnes—“यह कहना कि मैं पछताऊँगा नहीं” का दृढ़ बयान है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य पर अडिग है

Adam Clarke—“आकाश और पृथ्वी के विलाप”—प्रकृति भी मानवीय असफलताओं के कारण दुखी होती है

नोट: ऊपर के उद्धरण केवल पहचान-पत्र के रूप में लिखे गए हैं; यदि आप सटीक वाक्य चाहते हैं, तो उनके सार्वजनिक-डोमेन टेक्स्ट से सीधे देखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 4:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं आकाश को मानो शोक का काला कपड़ा पहनाता, और टाट को उनका ओढ़ना बना देता हूँ।”

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