Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 32:1 — पहले सन्निकटन और संदर्भ
यह वचन यहूदा के राजा सिदकिय्याह के शासन के दसवें वर्ष में आया, जो नबूकदनेस्सर के राज्य के अठारहवें वर्ष के समान ही एक निर्णायक समय था। यिर्मयाह की यह घोषणा उस ऐतिहासिक परिदृश्य को संकेतित करती है जिसमें Judah कुल मिलाकर दबाव और अस्थिरता के समय से गुजर रहा था, जब राजा और जनता दोनों ही परमेश्वर की बात सुनने के लिए उत्सुक थे या असुरक्षित थे। इस पाठ में नबूकदनेस्सर के शासन की छाया स्पष्ट है और यहूदियों के लिए एक समय-सारिणी खुलती है जिसमें परमेश्वर की योजना और मानव-क्रिया दोनों एक साथ घटित हो रही हैं।
परमेश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्टता
वचन दर्शाता है कि परमेश्वर समय-समय पर अपने भविष्यवाणियों को व्यक्त करते हैं और उन तथ्यों को इतिहास की पटल पर रखकर नबियों के दायित्व को चिह्नित करते हैं। यहाँ आकर यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर के निर्देश और योजनाएं सांसारिक सत्ता से ऊपर हैं; वह अपने उद्देश्यों के अनुसार घटनाओं को नियंत्रित करता है, भले ही मानव स्वार्थ या दुष्ट शक्तियाँ चाहे कुछ भी कर लें।
महत्वपूर्ण शब्द और प्रभावशाली इमेज
- “यहोवा की ओर से”: यह वाक्य परमेश्वर की मौलिक सार्वभौमिक सत्ता और प्रेरणा को दर्शाता है।
- “यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा”: नबी के दायित्व और पवित्र संदेश का प्रसार दर्शाता है, जो राजा के समय के राजनीतिक संकट के बीच आ रहा है।
संबद्ध प verses (cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर इतिहास के मंच पर क्रिया-प्रवृत्ति रखते हैं और नबी के द्वारा उनकी योजना का उद्घोष होता है, ताकि लोक उनके चरम उद्देश्य की ओर प्रेरित हों।
आज के दिन के लिए अनुप्रयोग
- समय-स्थिति पर घबराने के बजाय विश्वास रखें: हमारे जीवन में भी कभी-कभी दबाव और विपत्ति आ सकती है; परन्तु परमेश्वर के समय-सारिणी पर भरोसा बनाये रखें।
- नबी-आवृत्ति के समान, हमारे जीवन में भी Keith-आवाजों, उदाहरण और प्रार्थनाओं के माध्यम से परमेश्वर की दिशा मिलती है; ध्यान दें कि परमेश्वर की योजना कभी मंजूर होती है, भले ही वह देखने में धैर्य की मांग करे।
- परिस्थिति चाहे राजनीतिक या व्यक्तिगत अस्थिरता जैसी हो, प्रभु की सत्ता और वचनों पर भरोसा रखें; वह अपने संदेशों के साथ हमारे भीतर आशा और स्थिरता डालते हैं।
कथा-निर्देश और दृष्टिकोण
इस पाठ में पाठक को यह स्मरण कराया गया है कि परमेश्वर के वचनों का सच और उनके निर्णयों की पवित्रता समय-समय पर प्रमाणित होती है। यह यकीन दिलाता है कि दुष्ट शक्तियाँ चाहे कितनी भी बढ़ जाएं, प्रभु उद्धार के मार्ग को स्थिर रखते हैं और उनकी कृपा के अनुसार परिणाम दिखते हैं।
उद्धरण संदर्भ (संक्षेप): नीचे Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के कुछ स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध होने पर केवल वही शाब्दिक अंश बताए जाते हैं:
“धैर्य और विश्वास के साथ परमेश्वर के समय के अनुसार ही निर्णय लेने चाहिए; क्योंकि उसकी योजनाएं हमारी समझ से परे सही तौर पर संचालित होती हैं।” (Adam Clarke)
“परमेश्वर का संदेश वह है जो सीधे दिल तक पहुँचता है; नबी के द्वारा वह समुदाय के लिए चेतावनी और आशा दोनों देता है।” (Albert Barnes)