Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 32:40 का पाठ प्रस्तुतिकरण
यिर्मयाह नबी के समय में याकूब के वंश के लिए परमेश्वर का वादा और उद्धार की आशा दृढ़ किया गया। यहाँ परमेश्वर यह वचन देता है कि वह उन्हीं के साथ न तो भटकेंगे, न उन्हें विस्मृत करेंगे, बल्कि उनके मन में भय डालकर उनका पुनःस्थापन करेंगे। यह वाचा हर प्रकार के विश्वासियों के लिए स्थिर और भरोसेमंद है—कि परमेश्वर अपना काम पूरी लगन और दृढ़ता से निभाते हैं।
मुख्य सार
यह वाचा बताती है कि चाहे परिस्थिति कैसे भी हो—व्रत-उद्धार, विवेक-नियमन, और भक्ति—परमेश्वर अपना प्रेम और उद्धार कर्म नहीं छोड़ेंगे। उनकी योजना उनके लोगों के साथ स्थायी और उन्नत है; वे उन्हें अपने भय से अगुआ कर उनके भीतर एक नया जीवन पैदा करना चाहते हैं, ताकि वे सदा उनके साथ रहना चाहें।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पवित्रशास्त्र के संकेत
यह वचन अन्य उद्धार ग्रंथों से जुड़कर बताता है कि नया करार केवल क्रियाओं से नहीं, बल्कि मन के परिवर्तन से ठहरता है:
व्यावहारिक विचार
इस वचन से यह प्रेरणा मिलती है कि हमारा दैनिक मार्गभ्रमण न होकर, हमारे भीतर परमेश्वर का भय और विश्वास बढ़े। कठिनाइयों में भी एक आशा रहें—परमेश्वर अपने लोगों के साथ है, उनकी सहायता करते हैं, और उन्हें एक नए दिल के साथ अपने समीप लाते हैं। यह परिवर्तन प्रार्थना, उपवास, और सत्य के अनुग्रह से संभव होता है।
कथन-नोट्स (प्रेरक दृष्टिकोण)
मिश्रीत विचारों के अनुसार, यह वचन न्यू-करार के स्थायित्व और परमेश्वर की करुणा के एक ठोस प्रमाण के रूप में देखा जाता है। मॉडर्न पादरी-नीतियों में भी यह माना गया है कि परमेश्वर स्वयं हमारे भीतर भय उत्पन्न कर उसकी आज़ादी और प्रेम को गहराता है।
संक्षिप्त समापन
यिर्मयाह 32:40 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की वाचा सर्वकालिक है—वह हमारा भला चाहते हैं और हमारे मन के भीतर सत्य-भय को उठाकर हमें उनके साथ स्थिर रहने की प्रेरणा देते हैं। यह ईमान के लिए एक मजबूत आधार है कि हम भी उनके प्रेम में दृढ़ रहें और कभी उनसे दूर न जाएँ।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस
लूका 22:20, 1 कुरिन्थियों 11:25, 2 कुरिन्थियों 3:6 के संदर्भ में यह संभव है कि आप समझें कि नया करार और उद्धार की प्रक्रिया कैसे मन, भय और विश्वास के अनुकूल बनती है—और कैसे यह सब यीशु के स्मरण-क्षणों से जुड़ता है।