यिर्मयाह 32:30 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि इस्राएल और यहूदा, जो काम मुझे बुरा लगता है, वही लड़कपन से करते आए हैं*; इस्राएली अपनी बनाई हुई वस्तुओं से मुझको रिस ही रिस दिलाते आए हैं, यहोवा की यह वाणी है।

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यिर्मयाह 32:30 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 32:30 का संदर्भ और महत्व

यिर्मयाह का यह भाग बिड़बिडा समय की वास्तविकता को उद्घाटित करता है: यरूशलोंम के लोगों ने बार-बार प्रभु के प्रति अपना निष्ठाविहीन रुख दिखाया है, जबकि विपत्ति का समय निकट है। इस्राएल और यहूदा—दोनों ने बचपन से ही वही रास्ता अपनाया है जो परमेश्वर को अप्रसन्न करता है: मन से नहीं, बल्कि बहानों से और मूर्तिपूजा के उपायों से उन्हें संतुष्टि मिली। यह वचन भगवान की क्रोध, और उनके लोगों के व्यवहार की एक स्पष्ट जाँच है कि कैसे वे अपने बनाए वस्तुओं के पीछे दौड़ते हैं और परमेश्वर की सच्ची आराधना में कमी रखते हैं।

मुख्य अर्थ

वचन स्पष्ट करता है कि प्रभु को उनकी पुरानी, बार-बार दोहराई गई बुराई ही सबसे बड़ी बाधा लगती है—किशोर अवस्था की तरह निरंकुश और अस्थिर आचरण। वे जो वेदना और भय से जूझ रहे हैं, वे भी वही व्यवहार दोहराते हैं, जिससे परमेश्वर को दुख होता है। यहूदा-इस्राएल से परमेश्वर की चेतावनी और उनकी निर्भरता में कमी दिखती है; मूर्तिपूजा और अपनी-अपनी कलाओं के लिए धन-समृधि का सहारा लिया गया है, न कि परमेश्वर के वचनों और उद्धार के भरोसे पर।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • स्व-निर्भरता बनाम ईश्वर-आश्रय: लोग अपनी सामग्री और निर्माणों पर भरोसा करते हैं, परंतु परमेश्वर के साथ उनका संबंध कमजोर पड़ जाता है।
  • हृदय की असंतुष्टि और अस्थिरता: लड़कपन जैसी नीति—चालाकी और बहाने—स्वास्थ्यपूर्ण आस्था को रोकती है।
  • न्याय और दया: भगवान की नीतियाँ उनके उद्धार और पवित्रता से जुड़ी हैं; बुराई की निरंतर पुनरावृत्ति का परिणाम दंड के रूप में सामने आता है।

अनुसंग-जिन्हें पढ़ना उपयुक्त है

नीचे के संदर्भ सीधे इस अध्याय के अंतर्गत बौक्सर संकेत देते हैं:

  • यिर्मयाह 7:30-34 — परमेश्वर का क्रोध और शहर के पतन की चेतावनी; धर्म नेजोशी नहीं रही।
  • यिर्मयाह 11:13-14 — मूर्तिपूजा और विश्वासघात के कारण उद्धार के अवसर घटते हैं।
  • यिर्मयाह 33:3 — परमेश्वर की आकाश-सीढ़ी से प्रार्थनाओं की गवाही।

व्यावहारिक विचार

आज के विश्वासी के लिए यह वाक्य स्मरण दिलाता है कि हमारे आरेख और औपचारिक धार्मिक कर्म तभी सार्थक होते हैं जब वे हमारे ईश्वर-सम्बन्ध को प्रकट करें। हमारी जीवन-योजना अगर पैसे, प्रतिष्ठा या शक्तिशाली वस्तुओं पर टिकी है, तो हम सच में ईश्वर के मार्ग से विचलित हो रहे हैं। परमेश्वर की वाणी को प्राथमिकता दें, और उन ‘बनाए गए उपायों’ के बजाय उसका चमत्कारिक उद्धार-संदेश अपनाएं।

पठन-योग्य बिंदु

यहाँ दो से तीन व्यवहारिक कदम सुझाए जाते हैं:

  • अपने कर्मों के पीछे ईश्वर की योजनाओं की शर्त समझें और उनके अनुसार चलें।
  • अपने आश्रय के स्रोतों की समीक्षा करें—क्या वे प्रभु की इच्छा को बढ़ाते हैं या उसे शांत करते हैं?
  • कसमों और अधिनियमों के पीछे दिल की सच्चाई को केंद्र में रखें; मन-धारणा में ईश्वर की उपस्थिति को प्रधान मानें।

क्रॉस-रेफरेन्स और संक्षेप निष्कर्ष

यिर्मयाह 7–9 के उल्लेखित भाग इस वचन के साथ संकेत करते हैं कि परमेश्वर अपनी पवित्रता के कारण अत्यंत संवेदनशील हैं; यदि हमारा हृदय मूर्तिपूजक-धारणाओं से घिरा रहे, तो उद्धार पथ मुश्किल हो जाता है। यिर्मयाह 32:27 भी यह स्मरण कराता है कि “मैं परमेश्वर, बड़ा और सभी के ऊपर” हूँ; अंततः वही सही मार्ग दिखाते हैं।

सार: यह वचन बताता है कि भक्त का दोषी आचरण और मूर्ति-उपासनाएं ईश्वर के साथर्धर्म को विचलित कर देती हैं। क्रोध के समय में भी वह पवित्रता बनाए रखने के लिए बुलाते हैं, ताकि उद्धार का दर्पण हमें दिखे।

याद रहे: अगर पाठ को उद्धरण चाहिए हों, तो मैट्यू-हेनरी, ऐल्बर्ट बर्न्स या एडम क्लार्क की संक्षिप्त पंक्तियाँ कान्तिपूर्ण संदर्भ के रूप में उद्धृत की जा सकती हैं; किन्तु पूर्ण वाक्य नहीं, केवल आवश्यकता अनुसार संक्षेप।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 32:30 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि जिस समय मैंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश में से निकाला, उस समय मैंने उन्हें होमबलि और मेलबलि के विषय कुछ आज्ञा न दी थी।

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व्यवस्थाविवरण 9:7 (HINIRV) »
इस बात का स्मरण रख और कभी भी न भूलना, कि जंगल में तूने किस-किस रीति से अपने परमेश्‍वर यहोवा को क्रोधित किया; और जिस दिन से तू मिस्र देश से निकला है जब तक तुम इस स्थान पर न पहुँचे तब तक तुम यहोवा से बलवा ही बलवा करते आए हो।

यशायाह 63:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 63:10 (HINIRV) »
तो भी उन्होंने बलवा किया और उसके पवित्र आत्मा को खेदित किया; इस कारण वह पलटकर उनका शत्रु हो गया, और स्वयं उनसे लड़ने लगा। (प्रेरि. 7:51, इफि. 4:30)

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