यिर्मयाह 7:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि जिस समय मैंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश में से निकाला, उस समय मैंने उन्हें होमबलि और मेलबलि के विषय कुछ आज्ञा न दी थी।

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यिर्मयाह 7:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 7:22 का तत्कालीन परिप्रेक्ष्य और संदेश

यिर्मयाह को परमेश्वर का संदेश लेकर इस्राइल के लोगों के विरुद्ध चेतावनी देते हुए उद्धृत किया गया है। यहाँ बताई गई पंक्ति इस बात की ओर संकेत करती है कि परमेश्वर ने इस्राइलियों को मिस्र देश से निकालते समय होमबलि (सामुदायिक बलि) और मेलबलि (कुर्बानी) के प्रकार की व्यवस्था अत्यधिक रूप से नहीं दी थी। उस समय का वास्तविक उद्देश्य सीधे-पारस्परिक विश्वास, नैतिक जीवन और हृदय की उपासना था, न कि कर्मकांडों के बाह्य प्रदर्शन पर निर्भर होना।

ईश्वर से जुड़ी मुख्य सीख

यह वाक्य दिखलाता है कि परमेश्वर की प्राथमिकताओं में आत्मिक निष्ठा और व्यवहारिक अनुकंपा है, न कि बाह्य कर्मकांडों का औचित्य। मिस्र से निकलते समय परमेश्वर ने मोड़-परिवर्तन नहीं केवल रीति-रिवाज़ों की पूर्ण-रूपेण इजाजत दी, बल्कि विश्वास, आज्ञापालन और एकरूपता की मांग की। पथभ्रष्ट धार्मिक क्रियाकलापों के बजाय सदियों से चले आ रहे दयालु, न्यायपूर्ण जीवन के पालन को महत्व दिया गया है।

शब्दों की स्पष्टियाँ

  • — परमेश्वर के लिए सार्वजनिक बलिदान; यहाँ संकेत कि धर्म के बाह्य उपायों पर अधिक निर्भरता को रेखांकित किया गया है, न कि हृदय की आस्था पर।
  • — विशेष पुकार के अनुसार बहुविध बलिदान; यिर्मयाह स्पष्ट करते हैं कि यह अनिवार्य धार्मिक क्रिया नहीं था यदि hearts और विवेक नहीं थे।

प्राप्त cross-परिचित संदर्भ

1) होशेय 6:6 — “क्योंकि मैं जो भला चाहता हूँ वह प्रेम है, न कि बलिदान।” यह बताता है कि परमेश्वर की इच्छा प्रेमपूर्ण आचरण और आंतरिक निष्ठा है, बाह्य क्रियाकलाप से अधिक।

2) ओशिया 14:3 — “हम तेरे नाम पर बलिदान नहीं देंगे; हमारे परमेश्वर के सामने हमारा प्राण ही श्रेष्ठ बलिदान है।” यह संकेत करता है कि असली उपासना आंतरिक आत्म-समर्पण में है।

3) मत्ती 9:13 और होव 12:7 के संदर्भ — यीशु ने करुणा और दयालुता को कर्मकांडों से ऊपर रखा, मानवीय आवश्यकताओं के बीच सच्ची उपासना का उल्लेख किया।

गहराई में समझ: पाठ की संरचना

यिर्मयाह 7:22 तब के सामाजिक-धार्मिक आचार-व्यवहार पर कटाक्ष करता है जब लोग ritualistic practices कोGod के समीपता के मापक-आधार मान लेते हैं। परमेश्वर स्पष्ट कर रहे हैं कि मिस्र से उद्धार के समय धार्मिक कर्मकांडों की पूर्णता का मतलब नहीं था; बल्कि वह संबंध, निष्कपट हृदय और न्यायसंगत जीवन चाहता है।

आज के लिए अनुप्रयोग

  • अपने उपासना-व्यवहार को बाहरी क्रियाकलापों के बजाय हृदय की सच्ची आस्था से परखें।
  • धर्म परंपराओं का मूल्य है, यदि वे प्रेम, दया और सत्य के साथ जुड़ी हों।
  • नैतिक जीवन: न्याय, दया, और वफादारी जैसी बातें ईश्वर के दिल के अनुरूप हैं, बलिदान से अधिक महत्वपूर्ण।

सूक्ष्म सार

यिर्मयाह 7:22 हमें सिखाता है कि प्रत्येक धार्मिक रीति-रिवाज का उद्देश्य परमेश्वर के साथ आंतरिक बनी हुई निष्ठा और समाज के भीतर नैतिक परिवर्तन को प्रेरित करना होना चाहिए, न कि केवल बाहरी मान्यता से संतोष पाने के लिए।

महत्त्वपूर्ण उद्धरण (महत्वपूर्ण टिप्पणीकारों से)

यदि उपलब्ध हो तो नीचे के हिस्से में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचार मिलते हैं – चुनिंदे सार यहाँ एकीकृत रूप में प्रस्तुत हैं:

“क्योंकि मैं तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश से निकाला—उस समय मैं उन्हें होमबलि और मेलबलि की कुछ आज्ञा नहीं दी थी।” (संक्षेप) — प्रमुख विचार: उपासना का आधार हृदय की आस्था है, न कि बाह्य कर्मकांड।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 7:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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होशे 6:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
होशे 6:6 (HINIRV) »
क्योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्‍न होता हूँ*, और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूँ कि लोग परमेश्‍वर का ज्ञान रखें। (मत्ती 9:13, मत्ती12:7, मर. 12:33)

1 शमूएल 15:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 15:22 (HINIRV) »
शमूएल ने कहा, “क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्‍न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्‍न होता है? सुन, मानना तो बलि चढ़ाने से और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। (मर. 12:32,33)

भजन संहिता 50:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 50:8 (HINIRV) »
मैं तुझ पर तेरे बलियों के विषय दोष नहीं लगाता, तेरे होमबलि तो नित्य मेरे लिये चढ़ते हैं।

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