Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 7:1 यिर्मयाह 7:2 यिर्मयाह 7:3 यिर्मयाह 7:4 यिर्मयाह 7:5 यिर्मयाह 7:6 यिर्मयाह 7:7 यिर्मयाह 7:8 यिर्मयाह 7:9 यिर्मयाह 7:10 यिर्मयाह 7:11 यिर्मयाह 7:12 यिर्मयाह 7:13 यिर्मयाह 7:14 यिर्मयाह 7:15 यिर्मयाह 7:16 यिर्मयाह 7:17 यिर्मयाह 7:18 यिर्मयाह 7:19 यिर्मयाह 7:20 यिर्मयाह 7:21 यिर्मयाह 7:22 यिर्मयाह 7:23 यिर्मयाह 7:24 यिर्मयाह 7:25 यिर्मयाह 7:26 यिर्मयाह 7:27 यिर्मयाह 7:28 यिर्मयाह 7:29 यिर्मयाह 7:30 यिर्मयाह 7:31 यिर्मयाह 7:32 यिर्मयाह 7:33 यिर्मयाह 7:34



यिर्मयह यह कहता है: लोथें आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का आहार होंगी
मुख्य प्रभाव: यह पद यह दर्शाता है कि पथभ्रष्ट लोगों के कारण परमेश्वर की विधि-प्रवृत्तिें टूटती जा सकती हैं और परिणाम स्वरूप वे गायब हो जाते हैं—न तो शांति मिलती है न सुरक्षा. यह चेतावनी उनके घृणित कर्मों के कारण आशीर्वाद-वंचित भविष्य की ओर इशारा करती है: जहाँ हर स्थल पर तबाही और निर्वासन की स्थिति बनती है।
साहित्यिक संदर्भ का ढांचा
यिर्मयाह का संदेश अत्यंत नाजुक समय में आया जब यहूदा राज्य पर ईश्वरीय निर्णय तेज था। यह शोक और अभिशाप की भाषा है जिसमें Nahum के समान कठोरता नहीं, बल्कि करुणात्मक पुकार है कि लोग अपने पथ से पलट जाएँ। किताब के इस भाग में अध्याय 7 के पाठ्यांशों में नीति और नैतिकता की गिरावट को उजागर किया गया है, ताकि लोग अपने कर्मों के परिणाम समझें।
थेओलॉजिकल कॉन्टेक्स्ट (धार्मिक दृष्टि)
यह भविष्यवाणी धर्म-गुरु के दायित्वों के उल्लंघन पर आधारित है। परमेश्वर के निर्णय के साथ साथ दया और चेतावनी का संतुलन दिखता है: पाप के परिणाम स्पष्ट हैं—जो लोग बुरे कर्म करते हैं, उन्हें प्राकृतिक और समाजिक संकटों का सामना करना पड़ता है। यह संदेश यह भी दिखाता है कि ईश्वर व्यवस्था के भीतर न्याय के साथ-साथ अनुग्रह भी संचालित करता है।
cross-references (उल्लेख और संबंध)
संक्षेपण: शास्त्री-टीका के अनुसार यह पाठ करीब से एक चेतावनी है कि बुरे कर्मों का सामूहिक परिणाम कैसे समाज को नष्ट कर सकता है।
आत्म-चिन्ता के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 7:33 एक चेतावनी है: पाप के परिणाम कभी-कभी कई सामाजिक रूपों में दिखाई देते हैं—लोथें पंछी और पशुओं के द्वारा उद्धृत एक चित्रात्मक भाषा है जिसमें जीवन की सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है। परमेश्वर अपराध के विरुद्ध न्याय और दया दोनों को चलाते हैं; हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी पथ-चाल से सुधरें और नैतिक जीवन की दिशा अपनाएं।
नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सम्बद्ध टिप्पणियों से संकलित संकीर्ण उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि आप चाहें तो मैं उनके पक्के उद्धरणों को संक्षेप में जोड़ सकता हूँ ताकि पाठ का परिशिष्ट और बोध बढ़े।