Old Testament
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यिर्मयाह 46:1 — वचन के विषय में एक प्रायः प्रसिद्ध उद्घोष
यिर्मयाह के पुस्तक में यह वचन बतलाता है कि यहोवा का संदेश किन-किन जाति-जातियों के बीच पहुँचा है और किस प्रकार भविष्यसूचक दृष्टि से यह संदेश परमात्मा के अपने लोगों के लिए है। यह संदर्भ युद्धों, न्याय और दया के समन्वय को दर्शाता है, जहाँ भविष्यवक्ता यिर्मयाह के द्वारा परमेश्वर ने विभिन्न राष्ट्रों के आचार-व्यवहार और उनके भाग्य का दृष्टान्त प्रस्तुत किया है।
पाठ के साथ अध्याय में यह वचन क्या पकड़ाता है
46:1 में कहा गया है कि यहोवा का वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, विशेषकर जाति-जाति के विषय—यानी न केवल यहूदियों, बल्कि अनेक देशों की राजनीतिक-धार्मिक गतिशीलता को ध्यान में रखकर—वह संदेश जो परमेश्वर ने उन सबके लिए रचा है। यह उद्घोष परमेश्वर की सार्वभौमिकता को दर्शाता है: उसका न्याय और उसकी चंगाई, दोनों ही कृपा की चादर तले बहते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस Verse से मुख्य शिक्षा यह निकलती है कि परमेश्वर का वचन समय-सीमा नहीं जानता; वह बाहरी प्रकार से विभेदित जातियों के बीच भी प्रभावशाली है। संदेश चाहे राजा-रजाओं तक पहुँचे या छोटे राष्ट्रों तक—सबके ऊपर एक ही ईश्वरीय व्यवस्था है। यहूदियों के कारणों के साथ-साथ अन्यजातियों के लिए भी सावधानियाँ, चेतावनियाँ और अवसर एक साथ प्रस्तुत होते हैं।
अन्य बाइबिल संदर्भों के साथ तालमेल
- जैतियों के देशों के प्रति परमेश्वर की योजना स्पष्ट होती है जब हम यशयाह और दानिएल के ग्रंथों में अलग-अलग राष्ट्रों के साथ उसकी वितरण न्याय की बात पढ़ते हैं।
- यिर्मयाह के अन्य भागों में भी यह विचार आता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ-साथ गर्मी, ठंड, उन्नति-ग्लानि से ऊपर उठकर संसार के लिए भी एक उद्देश्य रखता है। यह संदेश एक वैश्विक दृष्टि को प्रस्तुत करता है—न केवल उनके इकलौते अस्तित्व के लिए, बल्कि सभी जातियों के लिए उद्धार का मार्ग भी खुला है।
- नए नियम में प्रभु यीशु के आगमन के साथ यह उद्घोष उजागर होता है कि नमूदार प्रेम और मसीही मिशन सभी जातियों तक फैला है; इसलिए यह वचन पुराने और नए नियम की एक समान धारा को मजबूत करता है।
कठिनाई और उपयोगी अनुप्रयोग
व्यावहारिक रूप से, यह बताता है कि किसी भी जाति के व्यक्ति के साथ ईश्वर की योजना में स्थायी मूल्य है; हमारी भूमिका है कि हम उनके लिए प्रार्थना करें, उनका न्याय करें और सचेत रूप से उनकी भलाई में योगदान दें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ
- अन्य देशों के प्रति परमेश्वर के विचार के बारे में प्रयोगात्मक संदर्भ: यहूदियों के साथ-साथ अन्य राष्ट्रों के लिए भी दिव्यता की योजना का संकेत।
- नए नियम में बुलाये गये निर्णायक मिशन: जाति-भेद से ऊपर उठकर पूरे संसार के लिए救 का संदेश।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 46:1 यह याद दिलाता है कि परमेश्वर का वचन सार्वभौमिक है और संसार के सभी जातियों तक पहुँचता है। यह संदेश न्याय, दया और उद्धार का एक संयुक्त कार्यक्रम है जो इतिहास के प्रत्येक मोड़ पर परमेश्वर की चंगाई-योजना को दर्शाता है।
छोटा-सा संदर्भ-नोट
यहाँ मानक पठन में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के उद्धृत सारांश छोटे शब्दों में उपलब्ध हैं; केवल यदि उनके स्पष्ट उद्धरण सीधे उपलब्ध हों, तो उन शब्दों का उल्लेख किया गया है:
“This verse confirms that the word of the Lord comes to Jeremiah concerning many nations.”
नोट: उपर्युक्त उद्धरण सीधे पाठ से लिया गया नहीं है; यदि उपलब्ध हो तो दी जाएगी।