Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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मुख्य व्याख्या बिंदु
यिर्मयाह 46:5 में भारतवंशी राज्य मिस्र-क्षेत्र के विरुद्ध यहोवा के दायित्व के रूप में आने वाले भय को उद्घाटित करता है: शूरवीर पीछे हट गए, क्योंकि यहोवा की वाणी चारों ओर भय ही भय है। यह संदेश यह दर्शाता है कि परमेश्वर की चेतावनी और राज्य-व्यवस्था की असुरक्षा के समय मानव-युद्ध की चालें निर्भर नहीं रहीं; परमेश्वर के शासन के सामने हथियार और साहस भी लाचार हो जाते हैं।
पाठ-संदर्भ व साहित्यिक संदर्भ
पाठ का एक केंद्रीय विचार यह है कि परमेश्वर के संदेश का आना युद्ध के मैदान पर भय और विचलन पैदा कर देता है। मुक्त-आत्मा से भरे हुए सैनिक भी इस तरह के अदृश्य आशीर्वाद-भय के सामने विकल्प बनाते हैं: न डरना है, न पीछे हटना, बल्कि परमेश्वर की योजना पर विश्वास रखना। इसके अनुसार प्रचलित ऐतिहासिक संदर्भ में यannter के युग में यहोवा की आवाज़ के कारण सेनाओं की कीर्तिगाथा टूट जाती है।
शाब्दिक-गहराई और Θεο-आकर्षण
यह वचन यह बताता है कि भय और विफलता कई बार युद्ध के नियंत्रक तत्व होते हैं, खासकर तब जब यहोवा की वाणी स्पष्ट रूप से आ जाए। मसीह-पूर्व इतिहास में यह भाव दर्शाता है कि परमेश्वर अपने दासों के लिए सुरक्षा और निर्देश देता है; मानव योद्धाओं की सामर्थ्य उन स्थितियों में सीमित हो जाती है जहाँ परमेश्वर की योजना सर्वोपरि हो।
सोच-विचार के प्रश्न
आध्यात्मिक महत्व और क्रॉस-रेफरेंसेस
- चेतावनी और भय: भोर के दूतों के संदेश के साथ भय की अनुभूति अक्सर जुड़ती है; उद्धारकर्ता के समय में भी भय से ऊपर उठना पड़ता है।
- विश्वास बनाम भय: इस ऐसे समय में विश्वास की भूमिका शक्तिशाली दिखाई देती है; यहोवा की उपस्थिति भय को परास्त कर देती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस:
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 46:5 हमें सिखाता है कि परमेश्वर की वाणी युद्ध के मैदान में भय का कारण बनती है—पर वही वाणी सुरक्षा और अपने लोगों को सही दिशा दिखाती है। कठिन समय में भय से पार पाना तभी संभव है जब हमारी आस्था यहोवा की एकाग्र योजना पर टिके।
पुस्तक-स्तर के संदर्भ (संदर्भ-वाक्यांश)
यह टिप्पणी यिर्मयाह की गतिशीलता को उभारती है कि कैसे नीतियों और युद्ध की स्थितियाँ परमेश्वर की योजना के अनुरूप ढलाई जाती हैं, और किस प्रकार चारों ओर फैला भय प्रत्यक्ष रूप से एहतियात और निर्णय-निर्माण को प्रभावित करता है।
नोट: नीचे दिए गए प्रत्यक्ष उद्धरण केवल प्रकाशन-पूर्व टिप्पणी के समन्वय में हैं; मारक उद्धरण के रूप में प्रविष्ट नहीं हैं, पर यदि आवश्यक हों तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलन से छोटे-आख्य उद्धरण अनुमति के अनुसार शामिल किए जा सकते हैं.