Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यिर्मयाह 46:15 पर नज़र: बलवन्त जन नाश क्यों?
यिर्मयाह के नबूवत में मिज़ाज यहूदिया के विरुद्ध आने वाले दुखद घटनाओं को समझाने की कोशिश करता है। इस पद में मिस्र के युद्धकालीन संदर्भ के भीतर यह दर्शाया गया है कि बलशाली सेनाओं के खड़े रहने के स्थान, रक्षा-रेखा, सुरक्षा-आशा क्षीण हो जाती है जब यहोवा उन्हें ढकेल देता है। यहाँ कहा गया है कि उनके बलवन्त जन क्यों नाश हो गए—यानी वे क्यों परास्त हुए— और इसका कारण यह है कि यहोवा ने उन्हें ढकेल दिया। यह उद्धरण संपूर्ण रूप से यहूदियों के प्रति न्याय और चित्त-तोड़ चेतावनी को प्रस्तुत करता है कि परमेश्वर की योजनाओं के अलावा कुछ भी स्थिर नहीं है।
केंद्रीय अर्थ
पौराणिक युद्ध-योजना में गढ़ी गई महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मानव शक्ति और सैन्य सामर्थ्य सब एक क्षण में ढह सकता है जब परमेश्वर की सत्ता इसे दिशा दे दे। “ढकेलना” यहाँ प्रेरित करता है कि ईश्वर ही इतिहास के कदमों को संचालित करते हैं—राजाओं के कदम, सेनाओं की मरम्मत, और मोरचे की चोटियाँ। इसलिए, शत्रु चाहे कितने भी बलवान हों, उन पर अंतिम नियंत्रण परमेश्वर के हाथ में है।
कुंजी विषय
संबंधित पद
1) यिर्मयाह 49:29—घेरा गया भवन और तेज़ हवाओं से रक्षा नहीं मिलती; केवल परमेश्वर की योजना ठोस रहती है।
2) वेदना के समय सेतु: प्रमुख शास्त्र यह दर्शाते हैं कि जब ईश्वर नियंत्रण लेते हैं, तब मानव शक्ति बदल जाती है; वहाँ धैर्य और विश्वास की आवश्यकता होती है।
व्यावहारिक विचार
जब जीवन के किसी कठिन क्षण में हम अपने प्रयासों से आगे नहीं बढ़ पाते, तब यह स्मरण रखें कि परमेश्वर की योजना अधिक गहराई से चल रही हो सकती है। भयमान समय में परमेश्वर के दोष-न्याय के सिद्धांत पर विश्वास रखने की शिक्षा मिलती है: वह हमारी रक्षा में है, और कभी-कभी हमें ढकेलकर सही दिशा में ले जाता है ताकि हम अपनी निर्भरता उसकी ओर केंद्रित करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 46:15 का संदेश यह है कि परमेश्वर की इच्छा के बिना कोई बल नहीं टिकता—हाँ, यहाँ यह दिखाया गया है कि बलवन्त जन भी कभी-कभी उनकी ढकेलने से परास्त होते हैं। यह संतुष्टि नहीं, बल्कि चेतावनी है कि हमारी शक्ति परमेश्वर की योजना के समक्ष कबूल और समर्पित होनी चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंस
यिर्मयाह 50:24—ईश्वर के निर्देशों के बाहर खड़े रहते हुए प्रतिफल कैसे दबता है; विश्वास बनाए रखने से उद्धार संभव होता है।
नीतिगत दिशा के लिए साझा संकेत: सन्निकट विवादों में भी परमेश्वर की योजना की दिशा में तन-मन-धन लगाकर उसकी विधि को मानना चाहिए।