Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 46:1 यिर्मयाह 46:2 यिर्मयाह 46:3 यिर्मयाह 46:4 यिर्मयाह 46:5 यिर्मयाह 46:6 यिर्मयाह 46:7 यिर्मयाह 46:8 यिर्मयाह 46:9 यिर्मयाह 46:10 यिर्मयाह 46:11 यिर्मयाह 46:12 यिर्मयाह 46:13 यिर्मयाह 46:14 यिर्मयाह 46:15 यिर्मयाह 46:16 यिर्मयाह 46:17 यिर्मयाह 46:18 यिर्मयाह 46:19 यिर्मयाह 46:20 यिर्मयाह 46:21 यिर्मयाह 46:22 यिर्मयाह 46:23 यिर्मयाह 46:24 यिर्मयाह 46:25 यिर्मयाह 46:26 यिर्मयाह 46:27 यिर्मयाह 46:28



यिर्मयाह 46:24 का स्पष्ट अर्थ
यह पद मिस्र के राजा और उसकी राजधानी की एक बड़ी शर्म तथा पराजय को व्यक्त करता है। मिस्री कन्या (या मिस्र की मशहूर बेटी) लज्जित होगी—यानी मिस्र की प्रतिष्ठा धूमिल होगी—और वह उत्तर दिशा के लोगों के वश में कर दी जाएगी। यह भविष्यवाणी एक सामरिक दृष्टि से है: बाबुल के सैनिकों के आगे मिस्र अधीन हो जाएगा।
पिछला संदर्भ और पृष्ठभूमि
यिर्मयाह मौसीय प्रचार के दौर में यहूदा और यहूदी लोगों पर आने वाले निकट और दूर के दंड के संदेश देता है। यिर्मयाह 46 अध्याय में बाबुल के शासन के विरुद्ध मिस्र का भाग्य दर्शाया गया है। 46:20–22 में मिस्र की शरीयत और सैन्य स्थिति का आकलन दिया गया है; 23–24 में मिस्र की गाथा के अंत की भविष्यवाणी है—कि उसकी सत्ता क्षीण होगी और उसकी स्थिति ढह जाएगी, जिससे उसका सम्मान क्षति होगी।
विश्लेषण बिंदु
11 (संरचित) प्रमुख विचार
अन्य प्रासंगिक पद/ऊपन्यास
यहां नीचे कुछ अन्य संदर्भ दिए जाते हैं जो मिस्र और ग़ुलामी के विषय से जुड़ते हैं:
इन cross-references से यह स्पष्ट होता है कि मिस्र की सत्ता के क्षय का विचार पवित्र लेखन में बार-बार आया है और यह मानव-योजना बनाम परमावधान की परस्पर निर्भरता को दर्शाता है।
व्यावहारिक takeaway
हम यह समझें कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी स्थिर दिखें, परमेश्वर की योजनाएँ अधिक स्थिर और विश्वसनीय हैं। डर या भागदौड़ को छोड़कर, परमेश्वर के साथ नैतिक और ईमानदार विश्वास बनाए रखें, क्योंकि वह कबूल कर देता है कि संकट के समय भी उसकी रक्षा और मार्गदर्शन मिल सकता है।
उद्धृत स्रोतों से योगदान (संक्षेप)
इस टिप्पणी में नीचे दिए गए सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से संकलित बोध का समन्वय किया गया है:
मैथ्यू हेन्री के विचारों के संक्षेप: मिस्र की शक्ति के क्षय में आध्यात्मिक-सत्ता की अस्थिरता दिखती है; यह एक चेतावनी है कि लोग अपने सामर्थ्य पर नहीं, परमेश्वर की सहायता पर टिके रहें।
ऐलबार्ट बार्न्स के विचार: परमेश्वर के निष्कासन और साथ ही अन्याय का परिणाम—न्याय और दया के संतुलन के बारे में विचारोच्चार।
एडम क्लार्क के विचार: इतिहास-आधारित दृष्टिकोण से मिस्र का भाग्य परखा गया है; युद्ध और नीति के क्षेत्रों में परमेश्वर की सत्ता स्पष्ट रूप से निर्णायक है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण: हालाँकि यहाँ सीधे पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं, परन्तु उपरोक्त टिप्पणीकारों के सार के अनुसार, मिस्र के लिए यह होशियार-घोषणा है कि उसकी गरिमा और सत्ता एक दिन पराजित होगी, क्योंकि परमेश्वर की योजना अधिक स्थिर है।