Old Testament
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यशायाह 66:15 — भव्य क्रोध और खोजकर्ताओं का दिन
सीधे शब्दों में अर्थ: परमेश्वर यहोवा अद्भुत शक्ति और निर्णायक प्रकोप के साथ आता है; उसकी आक्रोश आग-जलती, चढ़ती लपटों और बवंडर-सी गाड़ियों के रूप में प्रकट होगा, ताकि वह क्रोध और चितौनी को पूर्ण प्रगट करे।
पद के संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यशायाह की पुस्तक में यह अध्याय भविष्यवाणी का अंत-युग चित्र प्रस्तुत करती है। यहोवा के मार्ग और न्याय के आह्वान के साथ, उन लोगों के लिए चेतावनी है जो परमेश्वर के विरुद्ध आत्म-मौन, उद्धार के नहीं, बल्कि तिश्नागी दृष्टिकोण अपनाते हैं। इस पद में दिव्य क्रोध की दिव्य प्रकाशन स्पष्ट है—यह आग और रथों के रूप में प्रकट होता है, जो भस्म करनेवाली और जलानेवाली चितौनी के साथ है।
विश्लेषणात्मक बिंदु
कथा-सम्पादन से सीखी गई बातें
अनुबंधित पाठ-क्रॉस-रेफरेंसे
1) प्रकाशित क्रोध और न्याय के मुहाने पर लिखा गया 2 थिस्स. 1:8—यह बताता है कि ईश्वरीय दंड अत्यंत शक्तिशाली हो सकता है, किंतु वह जो विश्वास नहीं करता, उसके लिए पवित्र दंड है।
2) यह्र: यह वही ध्वनि है जो दया और भय दोनों को एक साथ सन्निहित करती है; न्याय के साथ उद्धार का संदेश भी है।
3) नीतिवचन में वर्णित पवित्रता के परीक्षण, जहाँ परमेश्वर के पवित्र क्रोध के समय पर निवर्तमान रहते हुए, हमें सही मार्ग की दिशा में बढ़ना चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आप-के-जीवन में: परमेश्वर के न्याय का डर, उससे जुड़ी आस्था और पवित्रता को बनाए रखना आवश्यक है। यदि हम अपने हृदय को स्वार्थ और पाप से दूर रखते हैं, तो आग केवल क्रोध नहीं, बल्कि उद्धार की राह भी खोल सकती है। दैनिक उपलब्धियों में सत्य और नैतिकता के साथ चलें; तब ईश्वर के आह्वान का समय भय से नहीं, आशा से का door बन सकता है।
सूत्र-उद्धरण (Essentials)
यहाँ इस पाठ से संबद्ध प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के नतीजे इस प्रकार समाहित होते हैं:
Matthew Henry: आग का चित्रण न्याय के साथ दया का संयोजन बताता है—जो परमेश्वर के साथ गन्ने की तरह जुड़ता है, उसे क्रोध नहीं, शांती मिलती है।
Albert Barnes: क्रोध की यह प्रस्तुतिकरण यह दर्शाती है कि परमेश्वर की दिव्य सत्ता अत्यंत व्यापक है; वह रथ और बवंडर के साथ क्रोध और चितौनी देता है ताकि पाप का निष्कर्ष स्पष्ट हो।
Adam Clarke: यह उद्धार और न्याय के बीच संतुलन को उजागर करता है—क्रोध और आग परमेश्वर की पवित्रता के प्रकटन हैं जो मुश्किल क्षणों में सत्य की रक्षा करते हैं।
नोट: ऊपर के उद्धरण संक्षिप्त सार दिए हैं; पूर्ण-पाठ उद्धरण केवल मूल टिप्पणी-ग्रंथों में उपलब्ध हैं।