यशायाह 66:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जैसे इस्राएली लोग अन्नबलि को शुद्ध पात्र में रखकर यहोवा के भवन में ले आते हैं, वैसे ही वे तुम्हारे सब भाइयों को भाइयों को जातियों से घोड़ों, रथों, पालकियों, खच्चरों और साँड़नियों पर चढ़ा-चढ़ाकर मेरे पवित्र पर्वत यरूशलेम पर यहोवा की भेंट के लिये ले आएँगे, यहोवा का यही वचन है।

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यशायाह 66:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 66:20 पर टिप्पणी

यह पद यह दर्शाता है कि यहोवा के भवन में अयोध्या से नहीं, बल्कि जातियों से बहिरागत लोग भी यरूशलेम के पवित्र पर्वत पर आकर एकत्र होंगे और हर समुदाय के सदस्य अपनी-अपनी जातियों से होकर पवित्र भेंट के रूप में भागीदारी करेंगे। संदर्भ में यह भविष्यवाणी है कि नए समझौते के समय राष्ट्र-राष्ट्र मिलकर एक ऐसी सभा बनेंगे जिसमें परमेश्वर की महिमा पूरी दुनिया में फैलती है।

मुख्य अर्थ

भविष्यवाणी यह दर्शाती है कि यहोवा की यरूशलेम की पूजा—जो पहली प्रवृत्ति में यहूदी समाज के भीतर सीमित थी—अब विश्व-व्यापी हो जाएगी। शुद्धता के रीतिरिवाजों के बावजूद पवित्र पर्वत पर आने वाले लोगों का समावेश यह दिखाता है कि नियत समय में सभी जातियाँ उद्धार के पथ पर बुलाए जाएंगी और यहोवा की महिमा सब जगह छा जाएगी।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • जातियों का प्रवेश: पूर्व में यहूदीपन-पूर्वक सीमित परमेश्वर के भवन का अनुचित विचार अब ढहता है; कामना है कि सभी जातियाँ उद्धार में प्रवेश करेंगी।
  • विनिमय और भागीदारी: अन्नबलि-शास्त्र के प्रतीकों के साथ लोक-विसर्जन नहीं, बल्कि सामंजस्य और एकता की तस्वीर प्रस्तुत होती है—हर जाति अपना योगदान देगी।
  • यरूशलेम का महिमामंडन: यही वह स्थान है जहाँ परमेश्वर का आना और उसकी भेंट का प्रयोजन अंततः पूरा होगा।

संबंधित पारायियाँ (क्रॉस-रेफरेंसेस)

1) इशायाह 2:2-4 — विश्व-योजनावली में यह संदेश कि राष्ट्र पावन पर्व पर एकत्र होंगे और लड़ाइयाँ भूल जाएँगे। यह दृश्य इस भविष्यवाणी से संगत है कि सभी लोग परमेश्वर के सत्य को मानेंगे।

2) रोमियों 15:9-12 — पॉल की बताई गई भूमिका कि Gentiles भी यहोवा के तुल्य आराधना में सहभागी होंगे; यह पारस्परिक स्वीकार्यता और एकता की राह दिखाता है।

3) मत्ती 28:18-20 — संसार के सभी जातियों को शिष्य बनाने की आह्वानियां यह दर्शाती हैं कि विश्वभर में ईश्वर का मिशन संतुष्टि से पूरा होगा।

व्यावहारिक विचार

हम अपने दिनचर्या में देखें कि परमेश्वर के उद्देश्य सभी के लिए खुले हैं। यहशिक्षा हमें प्रेरित करती है कि विभाजन-पूर्वक न रखें, बल्कि दया, आदर, और समान भागीदारी के साथ समुदाय बनाएं। चाहे हम किस जाति, संस्कृति या पृष्ठभूमि से हों, सभी को परमेश्वर की भेंट के लिए बुलावा है।

संक्षेप

यशायाह 66:20 एक उज्जवल भविष्य की तस्वीर है जिसमें सभी जातियाँ यहोवा के पवित्र पर्वत पर आकरउसकी भेंट में सम्मिलित होंगी। यह केवल रूढ़ परंपरागत पूजा नहीं है, बल्कि समस्त पृथ्वी पर यहोवा की महिमा का विस्तार है—हर देश, हर भाषा, हर जाति के लोग एक साथ ईश्वर की कृपा को स्वीकार करेंगे।

एचआईएनआईआरवी अनुवाद के महत्त्वपूर्ण तत्व—यह पाठ यह दर्शाता है कि पवित्रता की परंपराओं के साथ-साथ बहुधर्मीय समावेशन परमेश्वर की योजना का भाग है; यह एक व्यापक, विश्व-स्तरीय आराधना का विचार प्रस्तुत करता है।

मूल उद्धरण (संलग्न, जहाँ उपयुक्त)

मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से मिलने वाले संक्षिप्त पाठ-उद्धरणों के स्थान पर, नीचे दी गई प्रमुख धारणाओं का संयुक्त सार दिया गया है —

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 66:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं उत्तर से कहूँगा, 'दे दे', और दक्षिण से कि 'रोक मत रख;' मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ; (भज. 107:2,3)

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