यशायाह 56:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनको मैं अपने पवित्र पर्वत पर ले आकर अपने प्रार्थना के भवन में आनन्दित करूँगा; उनके होमबलि और मेलबलि मेरी वेदी पर ग्रहण किए जाएँगे; क्योंकि मेरा भवन सब देशों के लोगों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा। (मला. 1:11, मर. 11:17, 1 पत. 2:5)

पिछला पद
« यशायाह 56:6
अगला पद
यशायाह 56:8 »

यशायाह 56:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 56:7 पर टिप्पणी (HINIRV)

मुख्य निष्कर्ष: यह वाक्य ईश्वर के घर को सभी जाती के लोगों के लिए खुला और निष्ठावान-प्रार्थना-स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण द्योतक है; परमेश्वर का घर अब केवल इब्रानी राज्य या विशेष जातियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह सबके लिए है, जहाँ प्रार्थना और समर्पण के साथ आस्तायें दी जाती हैं।

पाठ-संदर्भ की रचना-आख्यान

56:7 का पंक्तिबद्ध संदेश यह संकेत करता है कि प्रभु अपने पवित्र पर्वत पर सभा स्थल की महिमा को साझा करते हैं—जो तब्रिक में मंदिर के साथ जुड़कर आस्था के एक वैश्विक परिदृश्य की ओर इशारा करता है। घर-ईश्वर के रूप में यह भवन, जहाँ प्रार्थना के बीच व्यक्ति-जाति की विभाजन रेखाओं को परिणत किया जाता है, वह ‘‘प्रार्थना का भवन’’ बन जाता है।

आध्यात्मिक महत्व और साहित्यिक संदर्भ

यह वचन विश्लेषक दृष्टिकोण से एक उद्धार-आह्वान है कि परमेश्वर के घर की दया और समानता का संदेश सभी तक पहुँचे। यह यशायाह-उक्ति एक भविष्यवाणी है जो पुरानी व्यवस्था के मंदिर-केन्द्रित विचार से आगे बढ़कर नये सामुदायिक रीति-रिवाजों की ओर संकेत करती है।

पवित्रगृह का बहुपक्षी अर्थ

  • प्रार्थना का घर: यह स्थल केवल एक भौतिक भवन नहीं, परन्तु श्रद्धा, विनय और सामूहिक पूजा का स्थान है जहाँ सभी जातियाँ एकत्र होती हैं।
  • मेलबलि-होमबलि की ग्रहणीयता: पूजा के कर्म अब विविधता के साथ स्वीकार्य होते हैं; यह एक समावेशी युग की ओर इंगित करता है।
  • सम्पूर्ण राष्ट्रों के लिए: यह संदेश यह स्पष्ट कर देता है कि परमेश्वर का उद्देश्य एक वैश्विक कुटुम्ब बनना है, जिसमें न किसी के साथ भेदभाव है न कोई दूरी।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके अर्थ

1) माला. 1:11 — “मेरे घर में प्रार्थना के लिए सभी जातियाँ आ जाएँगी”; यह प्रेरक संदर्भ यह रेखांकित करता है कि ईश्वर का घर एक खुली invitation का केंद्र है।

2) मर 11:17 — “घर मेरी प्रार्थना का घर कहलाना चाहिए” (वस्तुतः मंदिर-धर्म की गरिमा और प्रार्थनात्मक उपस्थिति का महत्व); इससे यह पुष्टि होती है कि आस्था का उद्देश्य देव-आशा के साथ प्रत्यक्ष रिश्ता है।

3) 1 पतरस 2:5 — “रहो, स्वयं भी परमेश्वर के भवन का भाग” के रूप में विश्वसनीय निकाय बनना; नई-नई सामूहिक संरचना में विश्वासियों का भागीदारी का स्थान दर्शाता है।

पूर्ववर्ती विचारों से सम्बंध

यह वचन यशायाह के संदेश-खंड के साथ संबद्ध है जो उद्धार-योजना में जातीय विभाजन को गिराकर एकीकरण की प्रेरणा देता है। साथ ही यह भविष्य की त्रासदी-परिहार की प्रतीक्षा में भी एक आशा देता है कि हर देश-समाज परमेश्वर के उपहार-सम्बन्ध में प्रवेश करेंगे।

विचार-विमर्श के प्रश्न

- क्या मेरा पूजा-जीवन आज भी अलग-अलग समाजों के लिए खुला है या मैं कुछ दूरी बनाकर रखने का आचरण दिखाता/दिखाती हूँ?

- क्या मैं अपने समुदाय में सभी के लिए एक स्वागत-भाव बनाये रखने के लिए सचेत कदम उठाता/उठाती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 56:7 एक प्रकाशमान आश्वासन है—परमेश्वर का घर, प्रार्थना का स्थान, सारे राष्ट्रों के लिए एक साझा मंच बनता है। यह चरित्र-परंपरा को नवीन दृष्टि देता है: भिन्नताएँ भी मानवीय एकता के साथ पूरक बन सकती हैं जब जीवन-आस्था का केंद्र प्रार्थना और सेवा में हो।

मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संकेत

मुख्य उद्धरण (यदि उद्धृत हों तो):

मैथ्यू हेनरी के अनुसार यह घर—जहाँ लोग ईश्वर के सामने एक होकर प्रार्थना करें—ईश्वर की मेहमाननवाज़ी का दृश्य है; सभी सीमाओं को तोड़कर आस्तावों की स्थापना।

अल्बर्ट बार्न्स: यह वचन यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने घर को सभी जातियों के लिए खोलते हैं, जिससे प्रार्थना की एक सार्वभौमिकता उभरती है।

एडम क्लार्क: यह भविष्यवाणी मंदिर-आधारित सीमाओं से मुक्त एक आध्यात्मिक स्थल की ओर संकेत करती है, जहाँ परमेश्वर का सम्मान और पूजा एक सामूहिक अनुभव बनता है।

नोट: ये संकलन पाठ के साथ संगत रूप से संदर्भित धाराओं के आधार पर समझाने के लिए हैं और इनमें पाठ-विशेष उद्धरणों की संक्षिप्त पुष्टियाँ शामिल हैं; संपूर्ण वाक्यों के उद्धरण नहीं दिये गए हैं ताकि पाठ का मूल अर्थ सुरक्षित रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 56:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मरकुस 11:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 11:17 (HINIRV) »
और उपदेश करके उनसे कहा, “क्या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है।” (लूका 19:46, यिर्म. 7:11)

मलाकी 1:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मलाकी 1:11 (HINIRV) »
क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है; क्योंकि अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (प्रका. 15:4)

यशायाह 2:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 2:2 (HINIRV) »
अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें