Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



मुख्य पाठ-वाचन: यशायाह 56:8 पर दृष्टि
यशायाह 56:8 में परमेश्वर यहोवा इकट्ठे किए हुए लोगों की गिनती और समागम की बात एक ठोस आश्वासन के रूप में देते हैं: जो लोग रीति-रिवाज़ से बाहर होते आते हैं, उन्हें भी वे विश्वास के बुलावे के साथ जोड़ना चाहते हैं। यह वाणी हमें यह बताती है कि परमेश्वर का लक्ष्य विश्वव्यापी स्वागत है—जो कुछ भी अपूर्ण या बाहरी था, वह सब उनकी योजना में स्थान पाते हैं।
कथा-संदर्भ के भीतर ( literary context )
यशायाह की पुस्तक में परमेश्वर के न्याय और करुणा दोनों का चित्र मिलता है। यहाँ “निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठे करनेवाला” के रूप में परमेश्वर की पंक्ति उन लोगों के लिए आश्वासन है जो बाहर हैं या विशिष्ट समुदाय के भीतर नहीं माने जाते। यह उद्धार का उद्घोष है—यहूदियों के साथ-साथ अन्य जातियों के लिए भी पहुँच पाने का संकेत। यूहन्ना 10:16 के संदर्भ में इसे यीशु के व्यापक उद्देश्य से जोड़ा गया है कि वह एकत्र करने के नियम को पूरा करें, न कि एक ही विशिष्ट समूह तक सीमित रहें।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व ( theological significance )
पूर्वपीठ ( cross-references )
मुख्य विचार के साथ ये संपर्क विचार करें:
संक्षिप्त व्याख्या: ये संदर्भ दर्शाते हैं कि परमेश्वर का उद्धार-कार्य जाति-जाति में फैला है और मुक्त करने वाला लक्ष्य हर दिल तक पहुँचना है।
जीवंत प्रश्न ( questions for reflection )
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 56:8 का संदेश न केवल एकत्र होने की बात है, बल्कि यह परमेश्वर के दिल की व्यापक दृष्टि को दर्शाता है—जो कुछ नियत थे वे भी स्वागत पाकर पूजा-उद्धार का हिस्सा बनेंगे। यीशु की वाणी में यह योजना और स्पष्ट होती है कि ईश्वर का परिवार बहुल है, और हर भावना-रักษित मानव में उसकी कृपा का प्रवेश संभव है।