यशायाह 56:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

प्रभु यहोवा, जो निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठे करनेवाला है, उसकी यह वाणी है कि जो इकट्ठे किए गए हैं उनके साथ मैं औरों को भी इकट्ठे करके मिला दूँगा।” (यूह. 10:16)

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यशायाह 56:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य पाठ-वाचन: यशायाह 56:8 पर दृष्टि

यशायाह 56:8 में परमेश्वर यहोवा इकट्ठे किए हुए लोगों की गिनती और समागम की बात एक ठोस आश्वासन के रूप में देते हैं: जो लोग रीति-रिवाज़ से बाहर होते आते हैं, उन्हें भी वे विश्वास के बुलावे के साथ जोड़ना चाहते हैं। यह वाणी हमें यह बताती है कि परमेश्वर का लक्ष्य विश्वव्यापी स्वागत है—जो कुछ भी अपूर्ण या बाहरी था, वह सब उनकी योजना में स्थान पाते हैं।

कथा-संदर्भ के भीतर ( literary context )

यशायाह की पुस्तक में परमेश्वर के न्याय और करुणा दोनों का चित्र मिलता है। यहाँ “निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठे करनेवाला” के रूप में परमेश्वर की पंक्ति उन लोगों के लिए आश्वासन है जो बाहर हैं या विशिष्ट समुदाय के भीतर नहीं माने जाते। यह उद्धार का उद्घोष है—यहूदियों के साथ-साथ अन्य जातियों के लिए भी पहुँच पाने का संकेत। यूहन्ना 10:16 के संदर्भ में इसे यीशु के व्यापक उद्देश्य से जोड़ा गया है कि वह एकत्र करने के नियम को पूरा करें, न कि एक ही विशिष्ट समूह तक सीमित रहें।

धर्मशास्त्रीय महत्त्व ( theological significance )

  • विश्वसनीय विश्वसनीयता: परमेश्वर अपने चुने लोगों को केवल पृथ्वी पर सीमित नहीं रखते बल्कि उन्हें करुणा और निमत्रण के साथ समूचे संसार में फैलाते हैं।
  • समावेशन का उद्देश्य: विभाजन को पाटना और एक नया, बहुजातीय समुदाय बनना—प्रभु के घर में सभी के लिए स्थान।
  • निकटता और बुलावा: हर उस व्यक्ति के लिए आशा जो यह समझता है कि वह बाहर है या नाममात्र का है—अब उसे भी बुलावा प्राप्त है।

पूर्वपीठ ( cross-references )

मुख्य विचार के साथ ये संपर्क विचार करें:

  • यशायाह 42:6–7: जातियों के बीच रोशनी और अंधकार में उद्धार—प्रभु की राह का आह्वान.
  • यरमियाह 31:31–34: नई वाचा में सभी का शामिल होना—दिल की बदली कार्यप्रणाली.
  • रोमियों 11:25–26: इस्राएल के समयबद्धपन के पीछे ईश्वर की पूर्ण योजना—जातियों का समाकलन।

संक्षिप्त व्याख्या: ये संदर्भ दर्शाते हैं कि परमेश्वर का उद्धार-कार्य जाति-जाति में फैला है और मुक्त करने वाला लक्ष्य हर दिल तक पहुँचना है।

जीवंत प्रश्न ( questions for reflection )

  • क्या मैं अपने समुदाय या चर्च में कभी ऐसे खड़े हूँ जहाँ मैं केवल खास लोगों के लिए खुला महसूस करूँ? क्या मैं समावेशन का उदाहरण देता/देती हूँ?
  • मैं कैसे प्रभु के बुलावे को अपनी निजी सीमाओं से बाहर निकालकर दूसरों तक पहुँचाऊँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 56:8 का संदेश न केवल एकत्र होने की बात है, बल्कि यह परमेश्वर के दिल की व्यापक दृष्टि को दर्शाता है—जो कुछ नियत थे वे भी स्वागत पाकर पूजा-उद्धार का हिस्सा बनेंगे। यीशु की वाणी में यह योजना और स्पष्ट होती है कि ईश्वर का परिवार बहुल है, और हर भावना-रักษित मानव में उसकी कृपा का प्रवेश संभव है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 56:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यूहन्ना 10:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यूहन्ना 10:16 (HINIRV) »
और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उनका भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। (यशा. 56:8, यहे. 34:23, यहे. 37:24)

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यशायाह 60:3 (HINIRV) »
जाति-जाति तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएँगे। (प्रका. 21:24)

यशायाह 66:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 66:18 (HINIRV) »
“क्योंकि मैं उनके काम और उनकी कल्पनाएँ, दोनों अच्छी रीति से जानता हूँ; और वह समय आता है जब मैं सारी जातियों और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवालों को इकट्ठा करूँगा; और वे आकर मेरी महिमा देखेंगे।

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