यशायाह 56:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“परदेशी भी जो यहोवा के साथ इस इच्छा से मिले हुए हैं कि उसकी सेवा टहल करें और यहोवा के नाम से प्रीति रखें और उसके दास हो जाएँ, जितने विश्रामदिन को अपवित्र करने से बचे रहते और मेरी वाचा को पालते हैं,

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यशायाह 56:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायह 56:6 पर टिप्पणी—परदेशी को भी यहोवा की वाचा और सेवा से लगाव

मुख्य व्याख्या: इस आयत में यहोवा के लिए मैत्रीपूर्ण संबंध उन लोगों तक विस्तृत हो रहा है जो देशी नहीं हैं—परदेशी भी उन शाश्वत वचन-पालन और परमेश्वर की सेवा में भागीदारी के अधिकारी बनते हैं जो यहोवा चाहता है। यह संदेश परमेश्वर की दयालुता, उद्घाटन और आस्था के व्यापक प्रवेश को दर्शाता है: यहोवा का आदर और उसकी प्रतिष्ठा सभी जातियों के लिए खुली है; सेवक, वाचा पालन और पवित्र दिन के मान-सम्मान से यह सम्बन्ध मजबूत होता है।

साहित्यिक संदर्भ

यशायाह 56 चयापांचे के समय में भगवान लोगों के भीतर की धर्मनिष्ठा, धार्मिक दिखावों के खिलाफ चेतावनी और विविध प्रवृत्तियों के भीतर एक सामान्य और सार्वभौमिक पहलू प्रस्तुत करता है। यहाँ परमेश्वर के घर में विविधता स्वीकार्य है—परदेशी भी जो उसकी इच्छा में भाग लेते हैं वे सत्यापित सेवक बनते हैं। इसका अंश यह संकेत देता है कि वैध धार्मिक पहचान अब जातीय या परंपरागत सीमा से आगे बढ़कर आंतरिक आस्था और दैनिक पालन में आधारित है।

अनुभागीय निष्कर्ष

- यहोवा की सेवा में जुड़ना विशुद्ध दायित्व नहीं, बल्कि आस्था का पुरस्कार है, जिसमें परदेशी भी शामिल हैं।

- विश्रामदिनों के पवित्रता और वाचा का पालन इस संबंध की ठोस पहचान बनाते हैं।

धार्मिक महत्व

यह आयतक यह दर्शाती है कि धर्मनिष्ठता और भक्ति के क्षेत्र में सीमा-रेखा बदल रही है; यहोवा का आकर्षण और उसकी सेवा में स्थिरता सभी के लिए समान अवसर है। यह स्पष्ट संकेत है कि वह सार्वभौमिक ग्रहण है—जो लोग उसकी इच्छा मेंिष्ठा का पालन करते हैं वे भी वहन करते हैं।

पवित्रशास्त्रीय सम्बन्ध

  • पूर्ववर्ती संदर्भ: यहोवा के नाम के लिए प्रेम और वाचा का पालन—जो जातीय सीमाओं के पार जाकर सार्वभौमिक स्वागत को बढ़ावा देता है।
  • नवीन संदर्भ: नए नियम में भी यह उद्घोषना दोहरायी गई है—येसु के शरीर में विश्व-आस्था की व्यापकता, ऐसे विश्वासियों के लिए जिन्होंने कर्म और विश्वास दोनों में समर्पण दिखाया।
  • आत्मिक अनुप्रयोग: परमेश्वर के साथ संबंध दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कर्मों में प्रकट होता है—दिनचर्या, प्रार्थना और सेवा के साथ।

क्रॉस-रेफरेंसे

1) निर्गमन 12:16 से संबंध: पवित्र दिन का पालन और वचा की पवित्रता—परदेशी भी उसका लाभ उठाने को पात्र रहते हैं, यदि वे उस आह्वान को मानते हैं।

2) रोम 2:14-15 के साथ प्रेरणा: जातीय सीमाओं के पार नैतिक विवेक और आस्थागत व्यवहार का मानक।

3)गा 2:28-29 के संदर्भ में: सभी जातियाँ एक ही विश्वास के ताने-बाने में बंधी हैं।

प्रश्न-चर्चा के निमंत्रण

  • क्या मैं अपने जीवन में यहोवा के नाम के अनुसार विश्राम और सेवाभाव को वास्तविक बना रहा/रही हूँ?
  • क्या मैं इतिहास-परंपरा से परे जाकर परदेशीय आवाज़ों को सुनकर उनकी सहभागिता को प्रोत्साहित करता/करती हूँ?
  • क्या मेरा दैनिक आचरण वाचा के पालन में ठोस रूप से दिखता है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

56:6 यह संदेश देता है कि यहोवा का घर सभी के लिए खुला है—परदेशी भी उसकी सेवा से जुड़कर विश्रामदिनों की पवित्रता और वाचा के पालन के साथ उसे मानते हैं। इसका उद्देश्य एकाधिकता को पवित्रता में जोड़ना है: आस्था का समावेश और परमेश्वर-भक्ति की एकरूपता.

महत्वपूर्ण उद्धरण (मथा-Henry, Barnes, Clarke)

यद्यपि इस पाठ पर ये commentators सीधे उद्धरण नहीं दे रहे हैं, उनके संयुक्त विचार इस प्रकार पुष्ट होते हैं: यह संदेश कि उद्धार और सेवाभाव जातीय सीमा से ऊपर है—“विदेशी भी यहोवा के नाम में अपनी व्रत्ति बनाते हैं”—ऐसी धारणा पर उन्होंने गहराई से विचार किया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 56:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 50:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 50:5 (HINIRV) »
वे सिय्योन की ओर मुँह किए हुए उसका मार्ग पूछते और आपस में यह कहते आएँगे, 'आओ हम यहोवा से मेल कर लें, उसके साथ ऐसी वाचा बाँधे जो कभी भूली न जाए, परन्तु सदा स्थिर रहे।'

यशायाह 56:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 56:2 (HINIRV) »
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो ऐसा ही करता, और वह आदमी जो इस पर स्थिर रहता है, जो विश्राम दिन को पवित्र मानता और अपवित्र करने से बचा रहता है, और अपने हाथ को सब भाँति की बुराई करने से रोकता है।”

यशायाह 58:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 58:13 (HINIRV) »
“यदि तू विश्रामदिन को अशुद्ध न करे* अर्थात् मेरे उस पवित्र दिन में अपनी इच्छा पूरी करने का यत्न न करे, और विश्रामदिन को आनन्द का दिन और यहोवा का पवित्र किया हुआ दिन समझकर माने; यदि तू उसका सम्मान करके उस दिन अपने मार्ग पर न चले, अपनी इच्छा पूरी न करे, और अपनी ही बातें न बोले,

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