Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 56:3 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह वचन परमेश्वर के संरक्षण और सभी जातियों के लिए बनी आशा के संदेश को साफ करता है। परदेशी भी जो यहोवा के नज़दीक आते हैं, उनके लिए भेदभाव नहीं है; प्रभु का.faithful प्रेम हर जाति के लिए खुला है। इस शास्त्रीय द्रष्टान्त में यहोवा यह स्पष्ट करते हैं कि उनके साथ रहने के लिए कोई सामाजिक शर्तों का दबाव नहीं होना चाहिए और एक दिन स्वतंत्र रूप से अपनी पहचान नहीं खोनी चाहिए।
पृष्ठभूमि और पाठ की जगह
यहास–56 अध्याय उन लोगों के लिए है जो यहोवा के राज्य में शामिल होना चाहते हैं, भले ही वे दुनिया के समाज से अलग हों। 56:3 विशेषकर उन विदेशी और निर्बल समूहों के लिए है जो यहूदी-परंपरा से सीधे नहीं जुड़ते, परन्तु प्रभु के प्रेम के पात्र हैं। परमेश्वर इन लोगों को आश्वस्त करते हैं कि वे अपने आप को “सूखे वृक्ष” नहीं समझें; उनके भीतर भी आशा और जिंदा प्रभु के साथ सहभागिता है।
मुख्य संदेश
इस पद का केंद्र शब्द है— स्वीकृति और सुरक्षा। यह कहता है: जो लोग दूर देश से आकर भी प्रभु का आदर करते हैं, वे भेदभाव की मानसिकता से मुक्त रहें; अपनी पहचान खोने की चिंता न करें; और यह न कहें कि वे बिरादरी से बाहर हैं। परमेश्वर सूचीबद्ध शर्तों के बिना भी उन लोगों की देखभाल करते हैं और उन्हें अपने परिवार का अंग मानते हैं।
अन्वेषण: अध्याय के भीतर इस संदेश की गूंज
56 अध्याय पूरे में दासत्व-भावना के विरुद्ध यहूदी-जाति की सीमा को चुनौती देता है। इस verse में विशेष रूप से बाहर से आए लोग—यानी परदेशी—के लिए सुरक्षा, स्वागत और स्थायित्व की बात है। यह वही विचार है जो बाद के समय के खुले-आसमान वाले संदेश से मेल खाता है: परमेश्वर का राज्य सभी जातियों के लिए है और उसके घर में स्थान बना है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- यहूदी परंपरा, भले ही उन्हें अलग माना जाए, लेकिन परमेश्वर के निर्णय में उनके लिए भी पहुँच खुली है।
- विश्वास से आने वाले कुछ लोग—चाहे उनके सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भिन्न हों—ये कहते हैं कि वे प्रभु की दृष्टि से “सूखे वृक्ष” हैं; परन्तु इस वचन के अनुसार भी वे जीवित भागीदारी पा सकते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त):
व्यावहारिक आवेदन
संक्षेप के लिए निष्कर्ष
यशायाह 56:3 कहता है कि यहोवा के स्वागत में कोई बाहरी या आंतरिक अवरोध नहीं है। परदेशी भी जो ईश्वर-भक्ति में आते हैं, उन्हें अपने आप को कम नहीं समझना चाहिए, न ही भेदभाव के कारण निराश होना चाहिए। परमेश्वर सभी को अपने परिवार में स्थान देता है; हमारी भूमिका है कि हम उनके निमंत्रण के अनुसार खुले दिल और खुली बाहों से उन्हें आशीष दें।
उद्धृत विचार (संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के पारंपरिक अभिलेखों से आवश्यक छोटे उद्धरण केवल इसी संदर्भ में नीचे बताए जा सकते हैं यदि उपलब्ध हों।