यशायाह 56:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो परदेशी यहोवा से मिल गए हैं, वे न कहें, “यहोवा हमें अपनी प्रजा से निश्चय अलग करेगा;” और खोजे भी न कहें, “हम तो सूखे वृक्ष हैं*।”

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यशायाह 56:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 56:3 पर टिप्पणी (HINIRV)

यह वचन परमेश्वर के संरक्षण और सभी जातियों के लिए बनी आशा के संदेश को साफ करता है। परदेशी भी जो यहोवा के नज़दीक आते हैं, उनके लिए भेदभाव नहीं है; प्रभु का.faithful प्रेम हर जाति के लिए खुला है। इस शास्त्रीय द्रष्टान्त में यहोवा यह स्पष्ट करते हैं कि उनके साथ रहने के लिए कोई सामाजिक शर्तों का दबाव नहीं होना चाहिए और एक दिन स्वतंत्र रूप से अपनी पहचान नहीं खोनी चाहिए।

पृष्ठभूमि और पाठ की जगह

यहास–56 अध्याय उन लोगों के लिए है जो यहोवा के राज्य में शामिल होना चाहते हैं, भले ही वे दुनिया के समाज से अलग हों। 56:3 विशेषकर उन विदेशी और निर्बल समूहों के लिए है जो यहूदी-परंपरा से सीधे नहीं जुड़ते, परन्तु प्रभु के प्रेम के पात्र हैं। परमेश्वर इन लोगों को आश्वस्त करते हैं कि वे अपने आप को “सूखे वृक्ष” नहीं समझें; उनके भीतर भी आशा और जिंदा प्रभु के साथ सहभागिता है।

मुख्य संदेश

इस पद का केंद्र शब्द है— स्वीकृति और सुरक्षा। यह कहता है: जो लोग दूर देश से आकर भी प्रभु का आदर करते हैं, वे भेदभाव की मानसिकता से मुक्त रहें; अपनी पहचान खोने की चिंता न करें; और यह न कहें कि वे बिरादरी से बाहर हैं। परमेश्वर सूचीबद्ध शर्तों के बिना भी उन लोगों की देखभाल करते हैं और उन्हें अपने परिवार का अंग मानते हैं।

अन्वेषण: अध्याय के भीतर इस संदेश की गूंज

56 अध्याय पूरे में दासत्व-भावना के विरुद्ध यहूदी-जाति की सीमा को चुनौती देता है। इस verse में विशेष रूप से बाहर से आए लोग—यानी परदेशी—के लिए सुरक्षा, स्वागत और स्थायित्व की बात है। यह वही विचार है जो बाद के समय के खुले-आसमान वाले संदेश से मेल खाता है: परमेश्वर का राज्य सभी जातियों के लिए है और उसके घर में स्थान बना है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

- यहूदी परंपरा, भले ही उन्हें अलग माना जाए, लेकिन परमेश्वर के निर्णय में उनके लिए भी पहुँच खुली है।

- विश्वास से आने वाले कुछ लोग—चाहे उनके सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भिन्न हों—ये कहते हैं कि वे प्रभु की दृष्टि से “सूखे वृक्ष” हैं; परन्तु इस वचन के अनुसार भी वे जीवित भागीदारी पा सकते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त):

  • रोमियों 11:17–24: घड़ी में यह विचार उभरता है किGentiles भी शाखाओं के रूप में पर्वत-आयत्त होते हैं और परमेश्वर की योजना में शामिल हैं। यह verse 56:3 के समान समर्थक आश्वासन देता है कि बाहर से आए भी अंग बन सकते हैं।
  • योएल 2:28–29: संसार के सभी प्रान्तों में प्रभु के दिव्य आत्मा के आभाव से पुरुष तथा स्त्री, जाति–धर्म के भेदभाव के बिना भरी जाती है; यह समर्थन करता है कि राष्ट्रों के लोग भी उद्धार की अगुवाई पाते हैं।
  • इफिसियों 2:11–22: एक नया सामुदायिक ढांचे का निर्माण, जहाँ विभिन्न जातियाँ एक ही ईश्वर के पुत्र-परिवार का हिस्सा बनते हैं—यह 56:3 के दायरे में आने वाले विश्वास का व्यावहारिक परिणाम है।

व्यावहारिक आवेदन

  • चरित्र: अपने समुदाय के बाहर रहने वाले भाइयों के प्रति स्वागत और सम्मान बनाए रखें, ताकि प्रभु के घर की दीवारें और मजबूत हों।
  • आस्था: यहोवा के वचन पर भरोसा करें कि वह हर दिल को देखता है और हर किसी को अपना स्थान देता है।
  • साझा समुदाय: प्रभु के समय-समाज में शामिल होना चाहते हों तो स्वीकृति के साथ एक दूसरे को निभाएं, भेदभाव से ऊपर उठकर एकता बनाए रखें।

संक्षेप के लिए निष्कर्ष

यशायाह 56:3 कहता है कि यहोवा के स्वागत में कोई बाहरी या आंतरिक अवरोध नहीं है। परदेशी भी जो ईश्वर-भक्ति में आते हैं, उन्हें अपने आप को कम नहीं समझना चाहिए, न ही भेदभाव के कारण निराश होना चाहिए। परमेश्वर सभी को अपने परिवार में स्थान देता है; हमारी भूमिका है कि हम उनके निमंत्रण के अनुसार खुले दिल और खुली बाहों से उन्हें आशीष दें।

उद्धृत विचार (संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के पारंपरिक अभिलेखों से आवश्यक छोटे उद्धरण केवल इसी संदर्भ में नीचे बताए जा सकते हैं यदि उपलब्ध हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 56:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और जो प्रभु की संगति में रहता है*, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।

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और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्‍वर की स्‍तुति करो, जैसा लिखा है, “इसलिए मैं जाति-जाति में तेरी स्‍तुति करूँगा, और तेरे नाम के भजन गाऊँगा।” (2 शमू. 22:50, भज. 18:49)

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“सेनाओं का यहोवा यह कहता है: ऐसा समय आनेवाला है कि देश-देश के लोग और बहुत नगरों के रहनेवाले आएँगे।

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