Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33



रोमियों 15:9 का संक्षिप्त अर्थ और संदर्भ
पद 15:9 में पौलुस यीशु मसीह के कारण अन्यजातियों के लिए परमेश्वर की स्तुति और भजन के क्रम की बात कर रहा है। यह परमेश्वर की योजना की सामंजस्यपूर्ण धारा को दर्शाता है: गोत्र से परे आने वाले लोग भी ईश्वर की महिमा के सहभागी बनते हैं, और यह उनकी कृपा का एक सामान्य परिणाम है। यह संदर्भ रोम 15 के अंतर्गत है, जहाँ प्रेरित Paulus चर्चों के बीच एकता, सहकार्य और प्रेरित-प्रेरितीय मार्गदर्शकता पर जोर देते हैं।
मुख्य विचार
इस पद का केंद्रीय संदेश है कि परमेश्वर के लिए सभी जातियाँ, चाहे वह यहूदियों में हों या अन्यजातियों में, उसकी महिमा में सहभागी बनेंगी। 2 शमूएल 22:50 और भज 18:49 से उद्धृत शब्द बताते हैं कि परमेश्वर की स्तुति और भजन का लक्ष्य सबके द्वारा पूरा होता है। इस व्यापक दायरे में प्रभु की महिमा की एकता तथा विविधता दोनों प्रतिफलित होती हैं।
मुख्य विषय
संबद्ध बाइबल अनुभाग
- रोमियों 15:9 के संदर्भ में अन्यजातियों की स्तुति के विषय में 2 शमूएल 22:50 और भज 18:49 से उद्धृत प्रेरक यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर की कीर्ति के लिए जातियाँ एक साथ आकर उसका नाम स्मरण करती हैं।
- रोमियों 11:11-12 में पेत्रास्पष्ट है कि अप्रकट जगतों के लिए Gospel का प्रचार कैसे यहूदियों और अन्यजातियों के बीच एकता को पुनः स्थापित करता है।
अनुभव और व्यावहारिक अनुप्रयोग
यदि हम सामाजिक-जातीय सीमाओं से ऊपर उठते हैं तो चर्च एक सुदृढ़ शक्ति बनता है। हर जन समुदाय की भक्ति में समावेश से परमेश्वर की स्तुति व्यापक होती है। अपने समुदाय में आप किस तरह से हर पृष्ठभूमि के लोगों को साथ लेकर भक्ति का अनुभव साझा कर सकते हैं? छोटे समूह, संघ-प्रार्थना और समावेशी तरीकों से यह संभव है।
क्रॉस-रेफरेंसेस with छोटा स्पष्टीकरण
- रोमियों 15:8-9: यीशु मसीह के द्वारा जातियों के लिए प्रवेश का सिद्धान्त—यही भजन-स्तुति की प्रेरणा बनती है।
- 2 कोरिंथियों 5:18-19: परमेश्वर की कृपा से सभी को एक नया मेल मिला है; ईसा में पुनः पुनः एकता जुड़ती है।
- भजन 22:27-31 (उद्धृत स्वरूप): सभी राज्यों और जातियों के बीच परमेश्वर के धर्म सेतु का वर्णन मिलता है।
प्राचीन टिप्पणीकारों की कुछ निहितियाँ (संक्षेप)
Matthew Henry: अन्यजातियों के लिए भक्ति में शामिल होना दिखाता है कि चमत्कारिक ग्रंथ-समन्वय परमेश्वर की दयालुता के बहुप्रकाश अवतार हैं।
Albert Barnes: यह उद्धार के व्यापक दायरे की पुष्टि है—जातीय सीमाओं को ध्वस्त कर, विश्वासियों में एकता बनती है।
Adam Clarke: कृतज्ञता की यह धारा बताती है कि परमेश्वर की स्तुति के लिए सभी जातियाँ एक साथ आ सकें—यह ईश्वर की योजना की प्रमुख निशानी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 15:9 हमें बताता है कि मसीह के माध्यम से परमेश्वर की स्तुति सभी जातियों का साझा उद्देश्य है। यह एकता, दया और भक्ति का मिलन है—जिसमें हर नाते-रिश्ता, हर पृष्ठभूमि समान रूप से ईश्वर की महिमा में सहभागी बनती है।