रोमियों 15:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तो भी मैंने कहीं-कहीं याद दिलाने के लिये तुम्हें जो बहुत साहस करके लिखा, यह उस अनुग्रह के कारण हुआ, जो परमेश्‍वर ने मुझे दिया है।

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रोमियों 15:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 15:15 का अर्थ

कहना मुश्किल नहीं कि पवित्र प्रेरित पौलुस ने यहाँ अपने लेखन में कुछ मानवीय खुलेपन के साथ लिखा है: वह अपनी बुद्धिमत्ता और जिम्मेदारी का अवसर इस विशेष दायित्व के लिए स्वीकार करते हैं कि उन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह से किन्हीं कठिनों और चूंकि-कथित बातों को याद दिलाया। यह वाक्य दर्शाता है कि प्रेरित ने अपने समय के पाठकों के लिए उस अनुग्रह की अतिरिक्त पुष्टि दी जिससे वह उन्होंने बुलाए गए उद्देश्य को पूर्ण कर सकें।

परिप्रेक्ष्य परिचय

रोमियों की पत्री की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में, पौलुस ने सम्मुख रूप से यह स्वीकार किया है कि उनके लेखन और चेतावनी-उद्धरणs विशेषकर उन बातों के लिए हैं जो गलतफहमियाँ दूर कर सकता है। यह उद्धरण उनके “याद दिलाने” के स्वर से जुड़ा है—याद दिलाने की क्रिया जिससे विश्वासियों को दृढ़ किया जा सके और परमेश्वर के अनुग्रह-कार्य की दिशा स्पष्ट रहे।

मुख्य interpretive बिंदु

  • अनुग्रह के कारण बोलना: पौलुस कहते हैं कि जो बातें उन्होंने लिखीं वह उनके अपने विचार नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह से प्रेरित हैं।
  • उच्च प्रेरणा के साथ स्पष्टता: साहसपूर्वक लिखा गया कथन यह संकेत देता है कि सत्य को सही ढंग से प्रस्तुत करना उनका दायित्व था, भले ही उसे कुछ पाठकों के लिए चुनौतीपूर्ण क्यों न लगा हो।
  • व्यापक उद्देश्य: यह उद्धरण एक बौधिक-आचार-संरचना का हिस्सा है, जिसमें मिशनरी-आइडिया और समुदाय के लिए प्रेरणा समाहित है—यानी व्याख्या से प्रेरित जीवन जीना।

संकेतक विचार

  1. अनुग्रह से प्रेरित लेखन: वह लेखन जो परमेश्वर ने दिया है, वह मानवीय कल्पनाओं से परे है और उद्धार-कार्य की स्पष्टता देता है।
  2. ध्यान देने योग्य साहस: सच को कहना और गलत को सुधारना जिम्मेदारी है, न कि आत्म-प्रशंसा।
  3. समुदाय के लिए उद्देश्य: चर्च में एकता और समझ को बढ़ाने के लिए ऐसा लिखना आवश्यक है जो सभी को लाभ दे।

क्रॉस-रेफरेंस और व्याख्या

1) 2 कुरिन्थियों 4:1-2: प्रभु के काम में खुलापन और सत्य-प्रदर्शन के साथ (अनुग्रह के कारण) निष्पक्ष रहते हैं।

2) इफिसियों 3:7-8: परमेश्वर के अनुग्रह से प्रेरित सेवा का दायित्व।

3) गलातियों 1:11-12: गोद लिये गए संदेश का स्वतन्त्र और परिवर्तन-परक प्रकटन—मानवीय विचारों के बजाय परमेश्वर के प्रेरित शब्द।

छोटी प्रत्यक्ष सीख

हम में से जो कुछ भी बोलते या लिखते हैं, उसे परमेश्वर के अनुग्रह से आकार लेना चाहिए। कठिन बातों को भी सच-सहजता और प्रेमपूर्ण ढंग से उठाने में भय नहीं होना चाहिए, ताकि विश्वासियों का विश्वास गहराए और गलतफहमी घटे।

संक्षिप्त सार

रोमियों 15:15 परमेश्वर के अनुग्रह से प्रेरित लिखित संदेश की शुद्धता और दृढ़ता को स्वीकार करता है—यही वह कारण है जिसके कारण पौलुस साहसपूर्वक, परनिंदा के बिना, सत्य की प्रस्तुति करते हैं। यह हमें स्मरण दिलाता है कि उद्धार-कार्य के लिए अलौकिक सहायता पर निर्भर रहना चाहिए, और प्रेम-भरे संवाद के साथ सच बोलना चाहिए।

विशेष उद्धरण (अगर उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसी प्रसिद्ध टिप्पणियों में से यदि किसी का उल्लेख किसी वाक्य के साथ आता है—तो वह प्राकृतिक भाषा में उसी संदर्भ के अनुसार प्रयुक्त होगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 15:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ, कि जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे; पर जैसा परमेश्‍वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।

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1 कुरिन्थियों 15:10 (HINIRV) »
परन्तु मैं जो कुछ भी हूँ, परमेश्‍वर के अनुग्रह से हूँ। और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैंने उन सबसे बढ़कर परिश्रम भी किया तो भी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्‍वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था।

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जिसके द्वारा हमें अनुग्रह और प्रेरिताई मिली कि उसके नाम के कारण सब जातियों के लोग विश्वास करके उसकी मानें,

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