Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33


romiyōn 15:21 का सरल अर्थ
इस वचन में प्रेरित पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर के सबसे पहले बुलाए गए इब्रानियों के बाहर जिस सुसमाचार की घोषणा हुई, वही महान उद्धार का संदेश दूसरों तक पहुँचकर उन तक पहुंचेगा। सार रूप में कहा जाए तो: “जो लोग पहले नहीं सुने, वे ही सुनेंगे और जो पहले नहीं देखे, वे ही समझेंगे।”
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह पंक्ति रोमियों के दमकते चर्च के संदर्भ में है, जहाँ प्रेरित पौलुस यह दिखाते हैं कि ईश्वर का योजना सारी जनजातियों के लिए है। (रोमियों 15:16-21) यह एक धारा है जो यहूदियों के साथ-साथ अन्य जातियों के लिए भी ईश्वरीय वरदान के व्यापक प्रसार को द्योतित करती है। यशायाह के संदर्भ से जुड़कर, जो संदेशा ऐसे लोगों की लाक्षणिक दृश्यता बनाता है जिन्होंने पहले नहीं सुना, वे अब देखेंगे और समझेंगे।
interpretive observations
मूल पाठ से निकले छोटे तथ्य
– उद्धरण का मूल भाव यह है कि जो लोग पहले सुने नहीं थे, वे अब सुनेंगे और समझेंगे।
मुख्य क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
संक्षिप्त मौलिक निष्कर्ष
1) ईश्वरीय उद्धार की योजना सार्वभौमिक है; 2) सुसमाचार का फैलना जोखिम नहीं, बल्कि प्रेरित के संदेश का उद्देश्य है; 3) हमारे जीवन में यह संदेश कैसे पहुँचे, इसका उत्तर प्रतिक्रिया और विश्वास में है—हम भी साझा करें।
व्यावहारिक takeaway
हम यह सीखें कि जहां भी अवसर मिले, ईश्वर के सुसमाचार को सुनकर समझाने की चेष्टा करें। निस्संसय के लिए भी यह संदेश उपलब्ध है, और उसका प्रभाव समय के साथ दिखेगा।
निष्कर्ष
रोमियों 15:21 एक प्रेरक स्मरण है कि उद्धार-योजना का दायरा सीमाओं से परे है और ईश्वर के काम में हमारी भूमिका उन लोगों तक पहुँचने की है जिन्हें अभी तक वह चिड़िया नहीं मिली है।
नोट: God-breathed commentary के समान पार्श्व-उद्धरणों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्ट उद्धरण आवश्यकतानुसार शामिल किए गए हैं।