Old Testament
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रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33



रोमियों 15:20 पर संदर्भ-आधारित टिप्पणी
पद में पवित्र भविष्यवाणी यह बताती है कि प्रेरित पॉल अपने मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करते हुए ऐसा लक्ष्य बनाते हैं कि मसीह का नाम जहां-जहां नहीं लिया गया है, वहाँ वहाँ वे सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास करें, ताकि किसी अन्य की नींव पर निर्माण न हो। यह अध्याय रोमियों में प्रेरित पॉल के मिशन-योजना के संदर्भ में है, जिसमें वे यह दर्शाते हैं कि उनका विश्वास और सेवा किस प्रकार शुद्ध और सुसंगत उद्देश्य के साथ संचालित है: आत्मिक निर्माण के लिए नए पात्रों तक पहुँचना, न कि केवल पहले से स्थापित समुदायों की सीमाओं के भीतर घूमना.
केंद्रीय अर्थ
पौल यह कहकर अपना मिशन स्पष्ट करते हैं कि उनका क्रम ऐसे स्थानों तक पहुँचना है जहाँ Christus का नाम अभी तक व्यापक रूप से प्रचारित नहीं हुआ है। उनका ध्वनि उद्देश्य है—नई नींव डालना, ताकि शिष्यत्व और समुदाय विश्वस्तर पर फैल सके। यह नीतिगत चिन्तन उनके उद्गम और उसके प्रभाव-क्षेत्र के बीच संतुलन बनाता है: मौजूदा विश्वसनीय समुदायों को ठहराव नहीं देते, बल्कि नई श्रेणियों में सुसमाचार को प्रसार देते हैं।
मुख्य विषय
संबद्ध गूढ़ार्थ (Cross-references)
1) प्रेरित पेत्रुस के मिशन की चर्चा में, नए क्षेत्रीय प्रचार और बाहरी क्षेत्रों की भागीदारी का विचार मिलता है। यह दिखाता है कि ईश्वर का वचन विश्वभर में फैले, न कि केवल विशिष्ट समूहों तक सीमित रहे।
2) रोमियों 10:14-15 के अनुसार, ‘कौन है जो उन तक न ŭ पहुँचे?’—सुसमाचार के प्रसार की अधिकतम प्राथमिकता बताती है कि प्रेषितों के विचार में बाहर के क्षेत्रों तक पहुँचना अनिवार्य है।
3) रोमियों 1:14-16 में पॉल स्वयं को नस्ल और समाज से ऊपर उठकर पूरे संसार के लिए सुसमाचार का दायित्व मानते हैं, यह संकल्प इस पद के अभियान-उद्देश्य से संगत है।
व्यावहारिक चिंतन
हम भी अपने जीवन में यह सोच सकते हैं कि जहां हमारे चर्च या समुदाय में मसीह का नाम पहले से जाना जाता है, वहाँ भी वे स्थान क्यों महत्वपूर्ण हैं जिन्हें अभी लंबी दूरी पर प्रचार की आवश्यकता है। हमारी प्रार्थना और समय-समर्पण उन क्षेत्रों के लिए हों जो अभी तक आध्यात्मिक रूप से अँधेरे में हैं। शिक्षण, नैतिक सहायता, और प्रेमयुक्त सेवा के साथ ऐसा प्रयास किया जा सकता है कि नया-नया विश्वास-जन उभरे और समाज में समग्र परिवर्तन आये।
संक्षिप्त समापन
रोमियों 15:20 वह मार्गदर्शक वाक्य है जो प्रेरित पॉल के मिशन की शुद्धता को दर्शाता है: नए क्षेत्र, नया सुसमाचार, नया ईश्वर-निर्देशन। इसका अनुसरण कर हम भी यह चाहते हैं कि हर कोना जहाँ मसीह का नाम अभी कम बोले जाते हैं, वहां उनका प्रकाश पहुँचे।
पठन-संदर्भ
यथार्थार्थिक संदर्भों के लिए नीचे तीन प्रमुख cross-refs देखें: रो. 1:14-16; रो. 10:14-15; फि. 1:12-18। प्रत्येक संदर्भ बतलाते हैं कि प्रचार-कार्य का दायरा कैसे व्यापक किया जाए और विश्वास-समुदाय कैसे दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैले।
अनुमानित उद्धरण: प्रकाशित पवित्र-पुस्तक के साथ जुड़ी मौलिक टिप्पणियाँ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों से जो महत्त्वपूर्ण वाक्य मिलते हैं वे केवल संदर्भित विचार के रूप में प्रयोग किए जाते हैं; पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।