Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33



रोमियों 15:8 — पाठ का तात्पर्य और संदर्भ
परिप्रेक्षित संदर्भ में रोमियों 15:8 पवित्र-ग्रंथों के नए और पुराने समझ के बीच की रेखा को स्पष्ट करता है। पवित्र शास्त्र का यह भाग ईश्वर के काम को पब्लिक-युग के भीतर कैसे उजागर करता है, यह दिखाता है: मसीह ने हैसियत से एक सेवक बनकर, अनुयायियों के लिए सत्य और वचन को दृढ़ किया ताकि पूर्वजों से मिली प्रतिज्ञाओं का पूर्णत्व प्रकाशित हो सके। इस वाक्य के भीतर हामी-स्वरूप विचार है कि ईश्वर अपने वचनों की विश्वसनीयता और उद्धार की योजना को सत्य/prrमान के साथ सिद्ध करते हैं।
मुख्य विचार: ईश्वर की सच्चाई और भविष्यद्वाणी की पुष्टि
मुख्य संदेश यह है: मसीह, जो परमेश्वर की सच्चाई के प्रमाण के रूप में आया, सत्यान्वेषी ईश्वर के वचन को पूरा करते हैं। मसीह का सेवकत्व, वह प्रतिज्ञाओं को दृढ़ करने के लिए है, न कि केवल एक व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में, बल्कि यह कि सभी राष्ट्रों में ईश्वर का दया और विश्वास-योग्यता प्रकट हो। यह शब्द यह भी दर्शाता है कि प्रभु का कार्यक्रम इन वस्तुओं से परे है—यह सभी जनों के लिए है।
शब्दों का अर्थ और चित्रण
“प्रतिज्ञाओं पूर्वजों को दी गई थीं”—यह बताता है कि परमेश्वर ने मनुष्यों से पहले से ऐतिहासिक, वंशानुगत Promises किए थे जो अब मसीह के माध्यम से सिद्ध होते हैं। “खटना किए हुए लोगों का सेवक”—यह एक सुदृढ़ चित्र है कि मसीह जन्म से लेकर मृत्यु तक की सेवकाई में दूसरों की दृष्टि से ऊँचे स्थान पर नहीं रहे, बल्कि वेदनात्मक और नम्रता के साथ सेवक बनकर आये। कोई भी व्यक्ति-समुदाय, चाहे वह यहूदी हो या अन्य, इस उद्धार के दायरे में आ सकता है यदि वह विश्वास से जुड़ता है।
पवित्रशास्त्र से जुड़े कुछ स्पष्ट पाठ
यहाँ कुछ समरूप विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संकेतित होते हैं, ताकि पाठ का समग्र प्रभाव समझ में आये:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और उनके प्रभाव
1) प्रकाशित वचनों का पूर्णत्व—यहे बार बार पुराने वचनों के संदर्भ में नया अर्थ खोलता है कि मसीह के आने से पूर्वजों से मिली प्रतिज्ञाओं की सत्यता प्रमाणित होती है।
2) ईश्वर की प्रेरणा-निष्ठा—सेवकत्व के माध्यम से प्रभु ने अपनी करुणा और न्याय दोनों को एक साथ रखा है ताकि सभी जातियाँ विश्वास में पनपें।
3) नए और पुराने विधान की समन्वय—यह उदाहरण देता है कि यीशु के माध्यम से अतीत की प्रतिज्ञाओं का गूढ़ अर्थ वर्तमान काल में खुलता है।
आधुनिक अनुप्रयोग
- विश्वासियों के लिए यह सीख है कि ईश्वर के वचनों के प्रति हमारा भरोसा उनकी सच्चाई पर टिका है; मसीह के सेवकत्व में हम भी दूसरों के लिए न्यौembra नहीं, बल्कि प्रेम और सेवा के उदाहरण बनें।
- चर्च सामान्य और जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकता बनाए रखेगा कि मसीह का उद्धार सभी के लिए है।
- प्रतिज्ञाओं की पुष्टि में हमारी आस्था व्यक्तिगत लाभ से अधिक ईश्वर की महिमा और शरीर के समन्वय के लिए होनी चाहिए।