Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 15:1 मत्ती 15:2 मत्ती 15:3 मत्ती 15:4 मत्ती 15:5 मत्ती 15:6 मत्ती 15:7 मत्ती 15:8 मत्ती 15:9 मत्ती 15:10 मत्ती 15:11 मत्ती 15:12 मत्ती 15:13 मत्ती 15:14 मत्ती 15:15 मत्ती 15:16 मत्ती 15:17 मत्ती 15:18 मत्ती 15:19 मत्ती 15:20 मत्ती 15:21 मत्ती 15:22 मत्ती 15:23 मत्ती 15:24 मत्ती 15:25 मत्ती 15:26 मत्ती 15:27 मत्ती 15:28 मत्ती 15:29 मत्ती 15:30 मत्ती 15:31 मत्ती 15:32 मत्ती 15:33 मत्ती 15:34 मत्ती 15:35 मत्ती 15:36 मत्ती 15:37 मत्ती 15:38 मत्ती 15:39



मत्ती 15:24 – संदर्भ का परिचय और आध्यात्मिक संदेश
पद का स्थान: यीशु केurban कटावों के बीच एक कठिन समय में यह वाक्य उनके मिट्टी के लोगों के प्रति उनके समर्पण का स्पष्ट संकेत देता है। यीशु ने कहा, “इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों को छोड़ मैं किसी के पास नहीं भेजा गया।” यह उत्तर उनके पृथ्वी के दायित्व और कार्य के दिशा-निर्देश को दर्शाता है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य क्यों है और कब उन्हें आगे बढ़ना है।
पाठ का तत्कालीन संदर्भ और साक्षात्कार का अर्थ
यह वाक्य धार्मिक नेताओं के एक प्रश्न के संदर्भ में आया है, जहां यीशु का उद्देश्य यह दिखाना है कि वह अपने ही जातीय-आयतन में सीमित नहीं हैं, फिर भी उनके क्रम में यह संदेश है कि पहले वह इस्राएली लोगों पर केन्द्रित हैं। यह संकेत देता है कि पुरुषार्थ, दया और उद्धार का चयनक्रम ईश्वर के कालक्रम में किस तरह चलता है—पहले चिह्नित लोगो, फिर व्यापक दायरा।
ईश्वर और faith के बारे में पाठ से मिलता संदेश
यह verse यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर के उद्देश्य एक विशिष्ट जनसमूह के साथ शुरू होते हैं, पर उनकी करुणा और योजना अंततः सभी तक फैलेगी। यह विश्वास देता है कि परमेश्वर समय-समय पर अपने चुनावों में निष्ठा रखते हैं, और उनके कार्यों में धैर्य और न्याय दोनों का मेल होता है। साथ ही यह बताता है कि मसीह का संदेश समय के साथ फैलाने के लिए तैयार है—परन्तु वह अभी पहले इस्राएल के बोये गये जड़ों पर मंथन कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
अन्य प्रत्यक्ष क्रॉस-रेफरेंसे
1) मत्ती 10:6: यीशु ने चिह्नित किया कि उनके पास पहले इस्राएल के घराने के लोगों के लिए भेजा गया है; इसका पठन इस पाठ के साथ संगत है—यही क्रम है।
2) रोम 1:16: पवित्र आत्मा की शक्ति से यह स्पष्ट होता है कि उद्धार पहले एक विशिष्ट वर्ग से शुरू होकर सभी तक जाएगा, ईश्वर की योजना सार्वभौमिक है।
3) लूक 4:22-30: इस हिस्से में यह स्पष्ट हो जाता है कि मसीह का संदेश जब अपने देश में अस्वीकार किया गया, तब भी उसकी महिमा और दया का दायरा बढ़ता है; पर इस पाठ में प्राथमिकता इस्राएल के लिए बनी रहती है।
आज के संदर्भ में प्रयोग
हम देखते हैं कि ईश्वर की उद्धार-योजना क्रमबद्ध है—सबसे पहले विश्वासी समुदाय और उसकी परमेश्वर-निष्ठा, फिर व्यापक आह्वान। इसका यह अर्थ है कि हम अपनी परिस्थिति में आज की भूमिका समझें: अपने समुदाय के साथ निष्ठा, सत्य और प्रेम के साथ व्यवहार करें ताकि परमेश्वर की योजना का प्रकाश अन्य जातियों तक जाने में मदद करे। अगर किसी क्षेत्र में अवसर आए कि ईश्वर का संदेश सिर्फ एक समुदाय तक सीमित है, तो हम धैर्य रखें और उनके काम में हिस्सा लें, पर साथ ही यह याद रखें कि समय के साथ मार्ग खुलते हैं।
संक्षिप्त सार
इस वाक्य के द्वारा हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर का उद्धार-कर्म एक क्रम में घटित होता है—पहले इस्राएल के खोए हुए पत्थर उठते हैं, फिर पूरी दुनिया तक यह संदेश पहुँचता है। यह न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि आज भी वह धार्मिक-उद्धार के क्रम की प्रेरणा देता है: एक समुदाय के भीतर होने वाली सच्चाई के साथ पहले समर्पण, फिर प्रेम का विस्तार।