Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 15:30 का व्याख्या और संदर्भ
पवित्र ग्रंथ में इसी Pericope में यीशु की प्रेरित करुणा की चमत्कारिक गतिविधियाँ बारम्बार आती हैं। इस वचन में भीड़ का एकाग्रता से आना, लँगड़ों, अंधों, गूँगों, बद्धों आदि को लाकर उनके प्रभु के चरणों पर रखना और यीशु का उन्हें चंगा कर देना दिखता है। यह घटना उस समय हो रही है जब यीशु हमारे राज्य-नीति नहीं, बल्कि दयालुता और उद्धार का उपहार दे रहे थे। लोग दृढ़ विश्वास के साथ आए এবং यीशु ने उनके हर रोग-निर्वाण की प्रतीक्षा पूरी की।
केंद्रीय अर्थ
यह वचन प्रभु यीशु के पूर्णदय के परिचय को प्रकट करता है: उसने उन सभी की पुकार सुनी जो शारीरिक और मानवीय असमर्थताओं से जूझ रहे थे। ज्यों ही वे उसके चरणों पर प्रस्तुत हुए, वह उन सभी को चंगा किया—जब तक कि भीड़ अब और अधिक उनके पास आकर राहत पाती है। यह उद्धार का संदेश है कि ईश्वर के राज्य में पीड़ितों के लिए उपचार और मोक्ष उपलब्ध है, और यीशु का उद्देश्य मानव जाति को नई जिंदगी देना है।
मुख्य विषय (तीन पंक्तियाँ)
संबंधित बाइबल अंश
ध्यान देने लायक त्रुटिहीन संदर्भ जो इस घटना को पुष्ट करते हैं:
व्यावहारिक विचार
हम भी अपने दुखों और जरूरतों के समय यीशु के पास आ कर अनुभवी चंगेपन का अनुभव कर सकते हैं। सामाजिक आड़-व्यवहार से ऊपर उठ कर, दिल से शरण लेना और दूसरों की पीड़ा के प्रति करुणा दिखाना सीखना चाहिए। यह वचन याद दिलाता है कि ईश्वर की योजना मानव समृद्धि के लिए है—शारीरिक, मानसिक और आत्मिक हर प्रकार के उद्धार के साथ।
संक्षेप
मत्ती 15:30 में यीशु की करुणा और उसकी शक्ति का संयुक्त प्रमाण मिलता है: भीड़ ने आस्था के साथ लँगड़े, अंधे, गूँगों आदि को प्रस्तुत किया, और यीशु ने उन्हें चंगा किया। यह कथा बताती है कि प्रभु का राज्य दुःख में भी प्रकट होता है और उद्धार हर इकाई के लिए उपलब्ध है।
टिप्पणी साहित्य से संक्षेप
हिंदी पाठकों के लिए नीचे प्रमुख विचार, संक्षेप में:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के सार-तथ्य जो इस दृष्टांत के साथ संगत बैठते हैं, समेकित रूप में प्रस्तुत हैं. उनके स्पष्ट उद्धरणों के लिए आवश्यक जगह पर कहा गया है कि कुछ जगहों में उनका संक्षिप्त शब्द-सार लिया गया है ताकि पाठक को संदर्भ स्पष्ट रहे।
यहाँ से मुख्य निष्कर्ष यह है कि यीशु का चंगा करना उनकी सेवा-प्रकृति और उद्धार के मिशन का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो हर प्रकार के रोगी, हकलाहट तथा सामाजिक बहिष्कार से ऊपर उठकर आस्था के साथ आते हैं, वे सब लाभान्वित होते हैं।