Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 5:1 मत्ती 5:2 मत्ती 5:3 मत्ती 5:4 मत्ती 5:5 मत्ती 5:6 मत्ती 5:7 मत्ती 5:8 मत्ती 5:9 मत्ती 5:10 मत्ती 5:11 मत्ती 5:12 मत्ती 5:13 मत्ती 5:14 मत्ती 5:15 मत्ती 5:16 मत्ती 5:17 मत्ती 5:18 मत्ती 5:19 मत्ती 5:20 मत्ती 5:21 मत्ती 5:22 मत्ती 5:23 मत्ती 5:24 मत्ती 5:25 मत्ती 5:26 मत्ती 5:27 मत्ती 5:28 मत्ती 5:29 मत्ती 5:30 मत्ती 5:31 मत्ती 5:32 मत्ती 5:33 मत्ती 5:34 मत्ती 5:35 मत्ती 5:36 मत्ती 5:37 मत्ती 5:38 मत्ती 5:39 मत्ती 5:40 मत्ती 5:41 मत्ती 5:42 मत्ती 5:43 मत्ती 5:44 मत्ती 5:45 मत्ती 5:46 मत्ती 5:47 मत्ती 5:48



मत्ती 5:1 — पहाड़ पर चढ़ना और चेले आए
पद का संदर्भ पवित्रगुरुबानी के सार को उद्घाटित करता है: यीशु अपनी बातचीत शुरू करने से पहले विशाल जनसमूह को देखते हैं, पर्वतीय स्थान पर चढ़ जाते हैं और वहाँ बैठ कर अपने चेलों के साथ बात करना शुरू करते हैं। यह दृश्य यह संकेत देता है कि यह शिक्षण-समाचार एक संरचित, गुरु-शिष्य के संबंध में दिया जाएगा; पर्वत का स्थान शान्ति, प्रतिष्ठा और सीखने की आदर्श स्थिति का प्रतीक है।
मुख्य विचार
पहला चरण यीशु के शिक्षण-आयोजन का आरम्भ है—चेतावनी नहीं, बल्कि आशीर्वादपूर्ण मार्गदर्शना। पहाड़ पर बैठना भी एक-तरह की प्रतिष्ठा और ध्यानाकर्षण का संकेत है; यह बताता है कि जो सीखने जा रहे हैं, वे एक गंभीर, नियंत्रणित वातावरण में हैं जहां नियमों के बजाय आचार-व्यवहार बनते हैं।
दो मुख्य विषय
क्लासिक संसाधन से संजोए विचार
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों ने इस वाक्य को प्रभुजी के प्रशासन और सभा को एक संगठित शैली में प्रस्तुत करने के रूप में देखा है। उनकी दृष्टि में यह दृश्य यह संकेत देता है कि शिक्षा एक संरचित कार्यक्रम के अनुसार दी जाएगी और यह सीखने वालों के लिए एक पवित्र मंच स्थापित करता है।
आधारपद पाठ्य संदर्भ से प्रेरित एक संयुक्त समझ यह है कि यीशु का यह प्रवेश शिष्य-उत्थान, आशीर्वाद और नैतिक जीवन के मानदंडों की ओर इशारा करता है।
यहां 2-3 सम्बद्ध अनुभाग-उद्धरण
प्रमुख संदर्भ जिसकी व्याख्या में सहायकता मिलती है: पुराने और नए नियम के भीतर गुरु-सीखक के संबंध, पहाड़ की महत्ता और “आग्रह” का अर्थ।
संक्षेपित cross-reference संकेत: - लूका 6:17-20 में यीशु के आशीर्वाद भाषण की संरचना का परिचय मिलता है कि यह संदेश जीवन के नैतिक मार्गदर्शन की दिशा देता है। - देवदूतों के आशीर्वाद से संबंधित संदर्भ में कुरआन-प्रेरित गुणों का विचार नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन का विषय स्पष्ट है।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठ के प्रकाश में: शिक्षण शुरू होते ही चित्त को एकाग्र करें; प्रभु के सामने विनम्रता और सुनने की तैयारी आवश्यक है। यह हर अनुयायी को याद दिलाता है कि आधिकारिक शिक्षण प्रचलन तभी सार्थक होता है जब वह जीवन के व्यवहार में उतरता है—घर में, काम में और समुदाय में।
संक्षिप्त सार
यह पंक्ति यीशु के शुरूआती शिक्षण-उत्साह का संकेत है: एक ऐसी जगह जहां चेलों के साथ बातें और मार्गदर्शन मिलता है, और जीवन के नैतिक मानक स्थापित होते हैं। पहाड़ पर बैठना एक आदर्श सीखने के स्थान का प्रतीक है जो हर प्रकार के भ्रम और प्राथनाओं से ऊपर उठकर, शास्त्र के अनुसार ढांचे देता है।
पृष्ठ-चयनित क्रॉस-रेफरेंसे
संवेदी रूप से समझने के लिए तीन वैशिष्ट्य क्रॉस-रेफरेंसे—
नोट: नीचे उद्धृत विशिष्टाक्षर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शुद्ध उद्धरण इस पंक्ति के भीतर आवश्यकतानुसार शामिल किए गए हैं, यदि उपलब्ध हों।
उद्धरण-नोट: यदि उपलब्ध हों, तो इन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त कथन एकीकृत रूप से आधुनिक हिन्दी टिप्पणी में सम्मिलित किए जाएंगे, ताकि पाठक को एक समुचित, निर्भर-संदेश मिले।