मत्ती 5:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि कभी शपथ न खाना; न तो स्वर्ग की, क्योंकि वह परमेश्‍वर का सिंहासन है। (यशा. 66:1)

पिछला पद
« मत्ती 5:33
अगला पद
मत्ती 5:35 »

मत्ती 5:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 5:34 — शपथ के बारे में व्रति

इस पद में यीशु अपने प्रसिद्ध ऊँचे पर्वत उपदेश के भाग के रूप में यह स्पष्ट नियम प्रस्तुत करते हैं: शपथ लेने से परहेज़ करें। वह कहते हैं कि हम न तो स्वर्ग की शपथ दें, न ही पृथ्वी पर कोई अन्य शपथ जो परमेश्वर के सिंहासन से जुड़ी हो। उद्धरण में यशायाह 66:1 का संदर्भ है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर स्वयं सर्वोच्च दिव्य सत्ता है और हमारे शब्दों की निर्भरता केवल उसी पर होनी चाहिए।

केंद्रीय समझ

यह वचन दो बातों पर बल देता है: एक, शब्दों की निर्भीकता और सचाई का महत्त्व; दो, शपथ-सम्बन्धी सामान्य सामाजिक गरिमा की बजाय सीधे सरल सत्य पर आस्था। यीशु यह कहते हैं कि व्यवहार में पूर्ण ईमानदारी एक भरोसेमंद अनुशासन है तथा शब्दों के लिए कभी-कभी शपथ का सहारा लेना आवश्यक नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि ईश्वर की सत्ता हर सत्य के आधार है।

महत्वपूर्ण विषय

  • शपथ से बचना एक तरीके से हर समय सत्य spoken करने की आदत विकसित करने की प्रेरणा है, ताकि किसी भी शब्द पर संदेह न रहे।
  • शपथ होगी तो वह “स्वर्ग का सिंहासन” या परमेश्वर के समक्ष प्रत्यक्ष गवाही की मांग को सीमित नहीं करती। इसका मतलब है कि हमारी जीवन-यात्रा में परमेश्वर के सामने निरंतर जवाबदेही है।
  • यह नीति हमें शब्द-निष्ठा के मार्ग पर चलना सिखाती है—सही, सीधे, स्पष्ट और बिना छल-फरेब के व्यवहार।

संदर्भित और परिशिष्ट विचार

कई पुरातन टीकाकारों में से एक सार यह है कि शपथ से छूटना हमारे भीतर स्थिर सत्य बोलने की संस्कृति बनाता है। मार्थेहनरी, एलबर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के टिप्पणियों में उन्होंने सजग चेतावनी दी है कि शब्दों के सत्य की कमी से सामाजिक विश्वास टूटता है, अतः आवश्यक हो कि हम हर पल सच बोलें।

अन्य संबंधित संदर्भ

– याकूब 5:12: शब्दों में न केवल शपथ की पूर्ति, बल्कि सामान्य सत्य की साधना की सलाह दी गई है।

– मत्ती 23:16–22: धार्मिक शपथ के भीतर वास्तविक ईमानदारी और सच्चे निष्ठा की दृष्टि स्पष्ट होती है।

– इब्रानी 6:16: शब्दों की शपथ से अधिक स्थायित्व के लिए परमेश्वर के बारे में विश्वास की अपेक्षा।

व्यावहारिक सुझाव

  • अपने शब्दों की सचाई पर रोज़ मेहनत करें—कभी भी कोई बात न कहें जो सच न हो।
  • किसी के साथ किए गए वचन के प्रति सम्मान बनाए रखें; उल्टा जाने पर तुरंत सुधार करें।
  • सच बोलना भय से नहीं, प्रेम और उत्तरदायित्व से प्रेरित हो।

संक्षिप्त सार

मत्ती 5:34 का संदेश है कि परमेश्वर के राज्य के साथ रहने वाले लोग अपने शब्दों में ईमानदार और निर्भीक हों, शपथ की आवश्यकता को कम करें और हर परिस्थिति में सत्य के साथ चलें। यह जीवन-चर्या हमें परमेश्वर के अधिकार के नीचे पूर्ण निष्ठा और सामाजिक विश्वास के निर्माण के लिए प्रेरित करती है।

पल्लव: यह वचन हमारी दैनिक पहचान है—हमारे बोलण और कलाप परमेश्वर के सिंहासन के अनुरूप होने चाहिए; हमारे हर वचन में Him-only की गवाही हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 5:34 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

याकूब 5:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
याकूब 5:12 (HINIRV) »
पर हे मेरे भाइयों, सबसे श्रेष्ठ बात यह है, कि शपथ न खाना; न स्वर्ग की न पृथ्वी की, न किसी और वस्तु की, पर तुम्हारी बातचीत हाँ की हाँ, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्ड के योग्य न ठहरो।

यशायाह 66:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 66:1 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “आकाश मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है; तुम मेरे लिये कैसा भवन बनाओगे, और मेरे विश्राम का कौन सा स्थान होगा? (प्रेरि. 7:48-50, मत्ती 5:34,35)

व्यवस्थाविवरण 23:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 23:21 (HINIRV) »
“जब तू अपने परमेश्‍वर यहोवा के लिये मन्नत माने, तो उसे पूरी करने में विलम्ब न करना; क्योंकि तेरा परमेश्‍वर यहोवा उसे निश्चय तुझ से ले लेगा, और विलम्ब करने से तू पापी ठहरेगा। (मत्ती 5:33)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें