मत्ती 5:47 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“और यदि तुम केवल अपने भाइयों को ही नमस्कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?

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मत्ती 5:47 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्या निष्कर्ष है?

यूहन्ना-गान या सामान्य शिष्टाचार से ऊपर उठकर यीशु कहता है कि मसीह-भक्तों को सिर्फ अपने प्रायः भाइयों को नमस्कार कर के नहीं, बल्कि सभी लोगों के प्रति प्रेम और आदर दिखाना चाहिए। यह वचन दिखाता है कि असली ख्याति और धर्मी जीवन, समुदाय के भीतर नहीं, बल्कि पूरे समाज के प्रति ईमानदार क्रिया-कलापों में है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

मत्ती 5:47 उसी भाग का हिस्सा है जिसमें यीशु पहिलौकात के बारे में उपदेश दे रहे हैं—पवित्रता, दयालुता और प्रेम का व्यापक दायरा। यहाँ वह निष्कर्ष देता है कि केवल अपने भाइयों को नमस्कार करना, सामाजिक दूरी पर ही सीमित रहना है; अन्यजातियों तक फैले प्रेम का दायरा भी आवश्यक है ताकि सचमुच परमेश्वर के राज्य का गुणधर्म प्रदर्शित हो सके।

व्याख्या के वे संकेत जो जरूरी हैं

  • परिमार्जन की गहराई: केवल निकट संबंधों तक सीमित प्रेम एक सीमा तक अच्छा है, पर वह पूर्ण नहीं है।
  • पार्कामिक व्यावहारिकता: दूसरे समुदायों और असमर्थ वर्गों के प्रति सम्मान, सहायता और शांति को व्यवहार में उतारना चाहिए।
  • धर्म का सार्वभौमिकता: ईश्वर bias नहीं देखते; सभी को समान अवसर और सम्मान देने का आह्वान है।

3 मुख्य थीम-आख्यान

  1. परिवार-केन्द्रित नैतिकता से ऊपर निकट-परगम का प्रेम
  2. समाज-सेवा और समावेशन
  3. ईश्वर-प्राप्तिप्रकाश का रूपांतरण व्यवहार में

क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-सम्बन्ध)

यही विचार दूसरे संदर्भों में भी मिलते हैं:

  • उत्पत्ति 12:3 के समान, सभी जातियों के लिए आशीष की योजना के संकेत। यह विचार कि आदरणीय व्यवहार सार्वभौमिक होना चाहिए, प्रेरित है।
  • रोमियों 12:17-18: "जो कुछ भी अन्य के साथ करते हैं, उसी के अनुसार करें"—नाप-तौल कर और शांति से व्यवहार का महत्त्व।
  • याकूब 2:8-9: प्रेम का समुत्पादन बाहर के लोगों के लिए भी खुला रखना; भेदभाव नहीं।

व्यावहारिक takeaway

हमेशा अपने समाज और समुदाय के भीतर ही नहीं, सभी लोगों के लिए सम्मान और सहयोग की अभिव्यक्ति करें। हर वर्ग के लिए दया, कर्तव्य-परायणता और नम्रता दिखाएं—यही वास्तविक धर्म है।

नोट्स

यद्यपि शब्द-चयन में विविधता हो सकती है, मूल विचार यही है कि प्रेम का दायरा सीमाओं से परे होना चाहिए और दूसरों के साथ ईमानदार, सम्मिलित व्यवहार परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।

संक्षेप

मत्ती 5:47 कहता है कि केवल अपने भाइयों को नमस्कार करना पर्याप्त नहीं; विश्व-समुदाय तक प्रेम और सम्मान फैलाने से ईश्वर के राज्य की वास्तविक पहचान विकसित होती है, और यह हमारे दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में प्रतिबिंबित होता है।

एकदम छोटा उद्धरण जो कुछ टिप्पणीकारों से मिलता है: “यदि तुम केवल अपने भाइयों को ही नमस्कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो?”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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