Old Testament
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मत्ती 5:1 मत्ती 5:2 मत्ती 5:3 मत्ती 5:4 मत्ती 5:5 मत्ती 5:6 मत्ती 5:7 मत्ती 5:8 मत्ती 5:9 मत्ती 5:10 मत्ती 5:11 मत्ती 5:12 मत्ती 5:13 मत्ती 5:14 मत्ती 5:15 मत्ती 5:16 मत्ती 5:17 मत्ती 5:18 मत्ती 5:19 मत्ती 5:20 मत्ती 5:21 मत्ती 5:22 मत्ती 5:23 मत्ती 5:24 मत्ती 5:25 मत्ती 5:26 मत्ती 5:27 मत्ती 5:28 मत्ती 5:29 मत्ती 5:30 मत्ती 5:31 मत्ती 5:32 मत्ती 5:33 मत्ती 5:34 मत्ती 5:35 मत्ती 5:36 मत्ती 5:37 मत्ती 5:38 मत्ती 5:39 मत्ती 5:40 मत्ती 5:41 मत्ती 5:42 मत्ती 5:43 मत्ती 5:44 मत्ती 5:45 मत्ती 5:46 मत्ती 5:47 मत्ती 5:48



क्या निष्कर्ष है?
यूहन्ना-गान या सामान्य शिष्टाचार से ऊपर उठकर यीशु कहता है कि मसीह-भक्तों को सिर्फ अपने प्रायः भाइयों को नमस्कार कर के नहीं, बल्कि सभी लोगों के प्रति प्रेम और आदर दिखाना चाहिए। यह वचन दिखाता है कि असली ख्याति और धर्मी जीवन, समुदाय के भीतर नहीं, बल्कि पूरे समाज के प्रति ईमानदार क्रिया-कलापों में है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मत्ती 5:47 उसी भाग का हिस्सा है जिसमें यीशु पहिलौकात के बारे में उपदेश दे रहे हैं—पवित्रता, दयालुता और प्रेम का व्यापक दायरा। यहाँ वह निष्कर्ष देता है कि केवल अपने भाइयों को नमस्कार करना, सामाजिक दूरी पर ही सीमित रहना है; अन्यजातियों तक फैले प्रेम का दायरा भी आवश्यक है ताकि सचमुच परमेश्वर के राज्य का गुणधर्म प्रदर्शित हो सके।
व्याख्या के वे संकेत जो जरूरी हैं
3 मुख्य थीम-आख्यान
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-सम्बन्ध)
यही विचार दूसरे संदर्भों में भी मिलते हैं:
व्यावहारिक takeaway
हमेशा अपने समाज और समुदाय के भीतर ही नहीं, सभी लोगों के लिए सम्मान और सहयोग की अभिव्यक्ति करें। हर वर्ग के लिए दया, कर्तव्य-परायणता और नम्रता दिखाएं—यही वास्तविक धर्म है।
नोट्स
यद्यपि शब्द-चयन में विविधता हो सकती है, मूल विचार यही है कि प्रेम का दायरा सीमाओं से परे होना चाहिए और दूसरों के साथ ईमानदार, सम्मिलित व्यवहार परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।
संक्षेप
मत्ती 5:47 कहता है कि केवल अपने भाइयों को नमस्कार करना पर्याप्त नहीं; विश्व-समुदाय तक प्रेम और सम्मान फैलाने से ईश्वर के राज्य की वास्तविक पहचान विकसित होती है, और यह हमारे दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में प्रतिबिंबित होता है।
एकदम छोटा उद्धरण जो कुछ टिप्पणीकारों से मिलता है: “यदि तुम केवल अपने भाइयों को ही नमस्कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो?”