मत्ती 5:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आँख के बदले आँख, और दाँत के बदले दाँत। (व्य. 19:21)

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मत्ती 5:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 5:38 के पासापेस: बदले की परम्परा और नए तकाज़े

यह पद क्षमा की किंतु दुराग्रह से ऊपर उठने की मांग करता है। प्रभु यीशु ने पहचाना कि लोग परम्परा के अनुसार आँख के बदले आँख, दांत के बदले दांत कथन सुनते आ रहे थे—यह दंडात्मक न्याय की सामान्य मान्यता है। परन्तु मसीह यह दिखाते हैं कि कलह और बदला चक्र को रोके बिना राज्य उन्नत नहीं होता।

पद का तत्कालीन संदर्भ

ईश्वर के राज्य के लिये सुझाई गई सड़क व्यक्तिगत प्रतिकार से नहीं, बल्कि प्रेम, क्षमा और एक नया रवैया अपनाने से बनती है। वहाँ “जो तुम्हारे प्रति गलत हो, उसके बदले तुम्हारा उत्तर दयालु और संयमित हो” का आदर्श है। मूल नीति पुराने कानून में विधि द्वारा दंड की स्पष्टता है, परन्तु यीशु उच्चतम नैतिक मानक दिखाते हैं—जिसमें प्रतिकृत कदम से अधिक ऊँचे मार्ग पर जाना होता है।

ईश्वर और विश्वाश के बारे में पाठ का उद्देश्य

यह पाठ ईश्वर की नीतियों में बदलाव की दिशा दिखाता है: क्रोध को दंडित करने के बजाय उसे जड़ से उखाड़ना। परमेश्वर की करुणा और अनुकम्पा प्रत्येक विश्वासयोग्य पर चमकती है, ताकि रिश्ते पुनः बनें, न कि विवादों से जख्म गहरे हों।

महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और चित्र

  • आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत: दण्ड-विधान का पुरानी परंपरा। इसका उद्देश्य शत्रु पर चढ़ने की नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था और दमन के चक्र को बनाए रखना था।
  • क्षमा: कठिन परन्तु वास्तविक शक्ति का प्रमाण। क्षमा से आत्मा की स्वतंत्रता और समुदाय के बीच भरोसा पुनर्जीवित होता है।
  • हमदम: प्रेम के व्यवहार में वृद्धि—अन्याय के बावजूद भी सम्मानपूर्ण व्यवहार।

अनुसरणीय पंक्तियाँ और उनसे मिलती सीख

यिर्मयाह और रोमा के साथ-साथ अन्य पुराने प्रमाण भी दिखाते हैं कि प्रेरित लोगों ने व्यक्तिगत बदले की जगह सुधार और क्षमा को प्रमुख रखा। इस पाठ के साथ जुड़े अन्य संदर्भों में, व्यावहारिक प्रेम, असहायों के लिए सहानुभूति, और शांति-निर्माण की विधियाँ उभरती हैं।

प्रयोगात्मक अनुप्रयोग

  • व्यक्ति-सम्बन्ध: जब कोई आपको ठेस पहुँचाए, तो दुष्टों के समान उत्तर देने के बजाय शान्त और समवेदनशील प्रतिक्रिया दें; यह रिश्ते को संभाले रखने की चाबी है।
  • समुदाय: कानूनी पोषण के बीच भी क्षमा की मिसाल बनें ताकि समुदाय में भय नहीं, भरोसा और सहयोग बढ़े।
  • आत्मिक जीवन: क्रोध को पकड़ना नहीं, बल्कि उसे परास्त करने के लिए प्रार्थना और आत्म-निरीक्षण को अपनाएं ताकि आत्मा मुक्त रहे।

संदर्भ-तुलना (Cross-references)

उचित संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पुराने कानून के प्रति यीशु का उत्तर कैसे नया जीवन देता है:

  • रोमियों 12:17-21: विपरीत पर कठोर प्रतिक्रिया के बजाय, बुरे के साथ भी भलाई की कोशिश करने का आह्वान, ताकि शांति बने।
  • लूका 6:27-31: "जो तुम्हारे लिए करता है, वही करो" का विस्तार—आत्मिक-निष्ठा और प्रेम के साथ कार्य करना।
  • उत्पत्ति 4:6-7 (संदर्भ): क्रोध के परिणाम, और संतुलन के साथ वचन-नियमन की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

नए आज के लिए निष्कर्ष

यह पद स्मरण कराता है कि मसीह के अनुयायी किस प्रकार एक ऐसे समाज के निर्माण में भाग लें, जहाँ बदला नहीं, बल्कि क्षमा और शांति मूलभूत विचार हों। न कि कमजोरियों पर लड़ाई, बल्कि कमजोरियों को सुधरने का अवसर मानकर प्रेम से आगे बढ़ना—यही प्रेरक परिवर्तन है।

कभी-कभी पुराने टिप्पणीकारों से मिली कुछ किरणें भी मिलती हैं: M. Henry, A. Barnes, A. Clarke द्वारा प्रस्तुत विचारों के अनुसार, कटाक्षित कानून के भीतर भी मसीह की शिक्षा एक उच्च मानक प्रस्तुत करती है: प्रतिकर के बजाय उद्धार और परिवर्त्तन।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 5:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“फिर यदि कोई किसी दूसरे को चोट पहुँचाए, तो जैसा उसने किया हो वैसा ही उसके साथ भी किया जाए,

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और तू बिल्कुल तरस न खाना; प्राण के बदले प्राण का, आँख के बदले आँख का, दाँत के बदले दाँत का, हाथ के बदले हाथ का, पाँव के बदले पाँव का दण्ड देना। (मत्ती 5:38)

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“यदि मनुष्य आपस में मार पीट करके किसी गर्भिणी स्त्री को ऐसी चोट पहुँचाए, कि उसका गर्भ गिर जाए, परन्तु और कुछ हानि न हो, तो मारनेवाले से उतना दण्ड लिया जाए जितना उस स्त्री का पति पंच की सम्मति से ठहराए।

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