Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 5:1 मत्ती 5:2 मत्ती 5:3 मत्ती 5:4 मत्ती 5:5 मत्ती 5:6 मत्ती 5:7 मत्ती 5:8 मत्ती 5:9 मत्ती 5:10 मत्ती 5:11 मत्ती 5:12 मत्ती 5:13 मत्ती 5:14 मत्ती 5:15 मत्ती 5:16 मत्ती 5:17 मत्ती 5:18 मत्ती 5:19 मत्ती 5:20 मत्ती 5:21 मत्ती 5:22 मत्ती 5:23 मत्ती 5:24 मत्ती 5:25 मत्ती 5:26 मत्ती 5:27 मत्ती 5:28 मत्ती 5:29 मत्ती 5:30 मत्ती 5:31 मत्ती 5:32 मत्ती 5:33 मत्ती 5:34 मत्ती 5:35 मत्ती 5:36 मत्ती 5:37 मत्ती 5:38 मत्ती 5:39 मत्ती 5:40 मत्ती 5:41 मत्ती 5:42 मत्ती 5:43 मत्ती 5:44 मत्ती 5:45 मत्ती 5:46 मत्ती 5:47 मत्ती 5:48


मत्थि 5:40 का अभिवचनात्मक अर्थ
अगर कोई मुझ पर मुक़द्दमे कर मुझे कुर्ता दे दे, तो उसे अंगरखा भी ले लेने दे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह दिव्य पाठ मत्ती के प्रेम-आचार के भाग—पेयुस्तक संहिता के भीतर स्थित है, जिसमें यीशु शिष्यों को प्रतिद्वंद्विता और दुष्ट व्यवहार के जवाब में परास्त होने के बजाय नैतिक उच्च मानक अपनाने के लिए बुलाते हैं। इस उपदेश का केन्द्र न्याय-संबंधी आचार-व्यवहार है, जहाँ प्रतिलोम शक्ति के सामने भी बढ़कर धैर्य, उदारता और क्षमा की राह दिखती है। कुर्ता-उद्धरण एक कॉयर-उधार के रूपक के रूप में लिया गया है; यह दर्शाता है कि व्यवहार में दुरुपयोग के समय भी शारीरिक वस्तু के बदले अधिक गहरे अधिकार और सम्मान का स्पर्श देना उचित है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
एजेंट टिप्पणियाँ — प्रसिद्ध विद्वानों से संजीदा परिप्रेक्ष्य
यहाँ माउंटेन शुरुआत का संपूर्ण उद्धरण नहीं है, परंतु दो-तीन सुविचारित शब्द हैं जिन्हें ऐतिहासिक टिप्पणीकारों ने गहरे अर्थ के साथ लिखा है:
हेनरी (Matthew Henry): “कठिन परिस्थितियों में भी क्रोध और दया के संतुलन को बनाए रखना वही वास्तविक धर्म है।”
बार्न्स (Albert Barnes): “यह शिक्षा-शिष्टाचार का सार है कि हमारा आचरण तब भी विनम्र बना रहे जब नीति-बुद्धि की मांग अस्वीकार हो।”
एडम क्लार्क (Adam Clarke): “यह दया का नियम व्यक्त करता है कि प्रत्यक्ष चोट के बदले गुण-परिणाम प्राप्त किए जाएं, और अन्याय के सामने भी संयम की राह छोड़े नहीं।”
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप उपयोग
1) मत्ती 5:39 — “परन्तु मैं तुमसे कहता हूँ, किसी ने तुम्हारे दायें गाल पर थप्पड़ मारा है, तो उसे बायां गाल भी मोड़ दो।” यह उक्ति हिंसक प्रतिशोध के विरुद्ध है और क्षमा की प्रेरणा देती है।
2) रोम 12:17-21 — कटाक्ष के बदले प्रेम से उत्तर दें; बुरी के बदले भलाई करें।
3) रव 12:17 — अन्याय के बदले धैर्य और शांति बनाए रखने का मार्ग दिखाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यवहारिक takeaway
यह वचन सिखाता है कि क्रोध या प्रतिशोध की स्थिति में भी ईमानदार आत्म-नियंत्रण और मानवीय गरिमा बनाए रखना प्रभु के राज्य के मूल्य हैं। अगर कोई आपका कुर्ता मांगकर शोषण करे, तो आप उसकी वृद्धि की राह में अभिमान के बजाय सहयोग और दयालुता का नमूना बनें। इससे अपने बारे में न केवल आप सुरक्षित रहते हैं बल्कि समाज में क्षमा और नैतिकता के प्रभाव को उजागर करते हैं।