Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 11:1 मत्ती 11:2 मत्ती 11:3 मत्ती 11:4 मत्ती 11:5 मत्ती 11:6 मत्ती 11:7 मत्ती 11:8 मत्ती 11:9 मत्ती 11:10 मत्ती 11:11 मत्ती 11:12 मत्ती 11:13 मत्ती 11:14 मत्ती 11:15 मत्ती 11:16 मत्ती 11:17 मत्ती 11:18 मत्ती 11:19 मत्ती 11:20 मत्ती 11:21 मत्ती 11:22 मत्ती 11:23 मत्ती 11:24 मत्ती 11:25 मत्ती 11:26 मत्ती 11:27 मत्ती 11:28 मत्ती 11:29 मत्ती 11:30



मत्ती 11:1 का अर्थ और महत्व
यह व verse यीशु के सार्वजनिक minist* और उनके चेलों के साथ कार्य की दिशा को स्पष्ट करता है। जब यीशु ने अपने बारह चेलों को भेजकर उन्हें नगर-नगर जाकर उपदेश और प्रचार करने का निर्देश दिया, तो वह एक विशिष्ट चरण में प्रवेश कर रहे थे: उनके शिक्षण का प्रसार स्थानीय समुदायों तक पहुँचे, ताकि लोग आत्म-ज्ञान और उद्धार के अवसर पा सकें। यह वचन हमें यीशु की सामर्थ्ययुक्त निर्देशना और उनके मिशन की संक्रमण-सी प्रेरणा देता है—श्रेष्ठ सत्ता के साथ सेवा का एक नया चरण आरम्भ।
योद्धेय मूल संदर्भ—क्या घटित हुआ था?
पूर्ववर्ती घटनाओं के संदर्भ में, यीशु ने चेलों को प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रयोजन के साथ भेजना शुरू किया। यह संदेश उनके निजी चेलों के साथ-साथ समुदाय-स्तरीय प्रभाव को भी लक्षित करता है। उनका उद्देश्य यह था कि वे नगरों में जाकर_banner_ प्रचार-उपदेश करें, रोगियों का इलाज करें, शुद्घता और सच्चाई का प्रचार करें, और लोगों को ईश्वर के राज्य के करीब लाएं।
प्रधान संदेश
मुख्य विषय-धारा और थिम्स
इस पाठ में तीन मुख्य प्रेरक धारणाएँ उभरती हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके मतभेद-समझ
संयोग से मिलते कुछ प्रचलित क्रॉस-रेफरेंसेस यह हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रचार-उपदेश का दायरा और चेलों का दायित्व कैसे बढ़ता है, तथा कैसे वे धर्म-युग के प्रकाश में काम करते हैं।
अनुकरणीय उद्धरण (पुस्तक-आलोचना से)
नीचे दिये गए उद्धरण सार्वजनिक-डायरेक्टोरियों से लिए गए हैं; ये निष्कर्ष हमारे पाठ के विचारों को मजबूत करते हैं:
“मर्यादित उद्देश्य के साथ, प्रभु ने अपने शिष्यों को भेजा; और वे जहाँ भी जाएँगे, वहाँ ईश्वर द्वारा समर्थित होंगे।”
व्यावहारिक ध्यान और प्रार्थना
आज के संदर्भ में यह वचन हमें यह सिखाता है कि हमारी निजी आस्थाएँ केवल गोपनीय अनुभव न रहें, बल्कि उन्हें व्यवहार में लाकर समाज तक पहुँचाना चाहिए। हर एक क्रिया—पदयात्रा की शुरआत से लेकर बोल-चाल तक—ईश्वर के राज्य की स्थापना के लिए हो।
संक्षिप्त उद्धरण-योगदान (जहाँ उपलब्ध)
यदि उपलब्ध हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शाब्दिक छोटे उद्धरण दिए जा सकते हैं; हालाँकि इस पाठ पर उन्हीं की संपूर्ण टेक्स्ट से सीधे उद्धरण यहाँ सम्मिलित नहीं किए गए हैं।
कथन-निर्णय
मत्ती 11:1 हमें यह याद दिलाता है कि यीशु का मिशन समय-सीमा में नहीं रुकता; वह अपने शिष्यों को प्रेरित, प्रशिक्षित और भेजते हैं ताकि यह सुसमाचार हर नगर, हर घर तक पहुँचे। हमारा जीवन भी ऐसे उद्देश्य-युक्त कार्यों के लिए आह्वान है—विश्वास के साथ आगे बढ़ना और दूसरे की भलाई के लिए सेवा करना।
धार्मिक-आउटलाइन
Cross-references: