Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 11:20 का अर्थ स्पष्ट शब्दों में
यह वायदा से स्पष्ट है कि यीशु ने उन नगरों को नहीं छोड़ा जहाँ उसने असाधारण शक्तिशाली चमत्कार किए थे, पर वहाँ लोगों ने अपने दिल को पलटा नहीं दिया। नगरों के प्रति यह उलाहना उनकी अवहेलना और अविश्वास के कारण है, न कि चमत्कारों की कमी के कारण।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
मसीह के विभाग में उन नगरों का उल्लेख है जिनमें उसने बहुविध चमत्कार दिखाए थे—प्रशस्तिकाहे: गैदारा, करेत, कैन्टरसी, आदि—परंतु बड़े- बड़े चमत्कारों के बावजूद वे लोग पश्चात्ताप में नहीं आये। मत्ती 11 अध्याय के पूर्वार्ध में यीशु ने जन एकता और निर्भयता के साथ अपने संदेश की सम्यक प्रस्तुति की, पर अंततः इन नगरों में अविश्वास और ढीले मन के कारण दृढ़ परिणाम सामने नहीं आये। यह अनुभव यह सिखाता है कि चमत्कार केवल बाह्य प्रभाव डालते हैं, आंतरिक परिवर्तन के लिए आवश्यक है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमैटिक बिंदु
अनुप्रयुक्त cross-reference (संक्षेप में)
1) लुका 7:47-50 — जब प्रेम और विश्वास का बन्धन खुलता है, तो चुकौती और क्षमा मिलती है; यह दर्शाता है कि हृदय में विश्वास ही उद्धार का मार्ग है।
2) मरकुस 6:5-6 — चमत्कारों की कमी नहीं रहती जब विश्वास मजबूत हो, परन्तु वहाँ उनका प्रभाव भी मानवीय अवहेलना के कारण सीमित रहा।
3) योहन् 3:19-21 — प्रकाश और अंधकार के द्वंद्व में, जो लोग प्रकाश से डरते हैं वे अपने कर्मों को छिपाते हैं; सचमुच परिवर्तन वही पाते हैं जो प्रकाश को स्वीकारते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
ईश्वर के चमत्कार हमारी आँखों को खोलते हैं, पर परिवर्तन हमारे हृदय की स्वीकृति पर निर्भर है। यदि हम बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि अन्तर से जुड़ें, तो परमेश्वर का मार्ग हमारे जीवन में प्रभावी ढंग से उतर सकता है। धार्मिक आचरण के साथ ईमानदार आत्म-समर्पण महत्वपूर्ण है।
उद्धृत विचारधारा के अनुसार, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ स्पष्ट विचार-रेखाएं उपलब्ध हैं: वे चमत्कारों के साथ मानवीय विश्वास की प्राथमिकता की बात करते हैं—कि चमत्कार केवल संकेत हैं, परिवर्तन हृदय से आता है। इन पंक्तियों के छोटे अंश नीचे उद्धृत नहीं किये जा रहे, पर उनके समन्वय से स्पष्ट है कि एक सक्रिय, विवेकपूर्ण विश्वास ही उद्धार और आशीर्वाद को जन्म देता है।
कुल मिलाकर, मत्ती 11:20 हमें स्मरण दिलाता है कि दिखाई देने वाले चमत्कारों के पीछे ईश्वर का उद्देश्य आंतरिक परिवर्तन है, जिसे लोग अपनाकर ही जीवंत जीवन की दिशा पा सकते हैं।