Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



सीधे अर्थ की घोषणा
यूहन्ना, पतरस और याकूब के साथ यीशु ने एक ऊँचे पहाड़ पर एकान्त स्थान पर जाने का निर्देश दिया ताकि उनके सामने उसकी महिमा प्रकट हो और वे कष्ट के बीच भी उसकी महानता को समझ सकें।
पृष्ठभूमि व संदर्भ
मत्ती 17:1-9 में यीशु के परिवर्तन होने की घटना है। इस अध्याय के पूर्व भाग में यीशु ने शिष्यuhin को यह बताया कि वे उसे क्रूस पर चढ़ना होगा और तीसरे दिन जी उठना है। छः दिन की प्रतीक्षा के बाद यह अपूर्व दर्शन शिष्य-परोपकार के लिए एक प्रेरणा बनता है, ताकि उनके विश्वास की कसौटी मजबूत हो और क्रूस-पूर्व संदेश के दुख-दर्द के साथ उसकी महिमा भी देख सकें।
व्याख्यात्मक बिंदु
छोटे थीमैटिक बिंदु
अन्य समानांतर पथ–cross-references
• लूका 9:28-36 — उक्त घटना की समान व्याख्या जहाँ तेजस्वी दर्शन और पवित्र ध्वनि से पिता का वाक्य मिलता है। यह दृश्य शिष्यों को भविष्य की मृत्यु-जीवन के रहस्य से सम्बद्ध प्रेरणा देता है।
• मत्ती 16:28 — भविष्य में कुछ शिष्यों को जीवित रहते देखने की आशा, जो पाठ को परिवर्तनक रूप में जोड़ती है।
• 2 पतरस 1:17-18 — प्रेरितों के द्वारा भी इस महिमा के गवाह बनने की पुष्टि, जिससे उनकी विश्वसनीयता और प्रेरणा मजबूत होती है।
इन संदर्भों में उल्लेखित घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि प्रभु यीशु की महिमा उसकी दया, उनका मिशन और भविष्य के उद्धार-कार्य के साथ जुड़ी है; यह परिवर्तन केवल दृश्य ही नहीं, बल्कि शिष्य-जीवन के लिए वास्तविक ज्ञान का स्रोत है।
व्यावहारिक takeaway
छः दिन के प्रतीकात्मक क्रम में, कठिनाइयों के बीच भी हमें प्रभु की महिमा पर टिके रहने की सीख मिलती है। हमारी प्रार्थना और अध्ययन का उद्देश्य यह हो कि हम उनके क्रूस-परिणाम और महिमा के संतुलन को समझकर विश्वास के पथ पर दृढ़ रहें, और कठिन समय में भी धर्म-प्रेरणा को आगे बढ़ाएं।
टेक्स्ट-लेखक जानकारी (उद्धरण के लिए)
नीचे दिए उद्धरण केवल जरूरी स्थान पर हैं। यदि ये उद्धरण सीधे पाठ में उपयोग हों, तो ध्यान दें कि मूल संदर्भ के अनुसार उद्धरण दिए गए हैं:
“हे आप लोग, प्रभु की महिमा पर टिके रहें; क्योंकि उनकी ओर से ही हमारा उद्धार है।”
कथा-समझ के सहायक टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरित संकलन में, हमारी योजना यही है कि परिवर्तन के वक्त परमेश्वर की महिमा स्पष्ट हो—जो विश्वास की राह को मजबूत करे और शिष्यत्व को नयी दिशा दे।