Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



सीधे अर्थ की व्याख्या
मत्ती 17:24 में कहा गया है कि कफरनहूम के मन्दिर-कर लेनेवालों द्वारा पतरस से पूछा गया, क्या यीशु मन्दिर-कर देता है। यह संकेत है कि यद्यपि यीशु मसीह के कार्य में प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा, पर वह उसका दायित्व निभाते हुए ਮੰਦਰ-कर के नियमों के अधीन रहता है। यहाँ लक्षित बिंदु यह है कि प्रेरित-समूह के साथ यीशु द्वारा सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था से जुड़ी वास्तविकताओं का सामना कैसे किया गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
कफरनहूम वह नगर था जहाँ यीशु ने अपना सेवा-कार्य आरम्भ किया था और जहाँ उसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया था। बाइबल में मन्दिर-कर लेना एक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था है जो मंदिर के संचालन के लिए लोगों से वसूल किया जाता था। पतरस से यह प्रश्न इसलिए किया गया ताकि लोगों को यह पता चले कि यीशु किस प्रकार धार्मिक व्यवस्था के साथ चलता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
संक्षेप विचार (थीमैटिक लिस्ट)
पुस्तक-सम्बन्धी क्रॉस-रेफरेंसेस
1) मत्ती 22:21 — देय कर और राज्य-प्रशासन के समन्वय का विचार। यह दिखाता है कि धार्मिक और नागरिक उत्तरदायित्व एक-दूसरे से एकीकृत हो सकते हैं।
2) मरकुस 12:17 — धातु संसाधनों के साथ नीतिगत प्रश्नों पर यीशु की प्रतिक्रिया, जहाँ वह नीति और आस्था के बीच संतुलन निर्देशित करते हैं।
3) ल्युक 20:25 — कर के प्रश्न पर Jesus के उत्तर का संकल्पनात्मक संकेत मिलता है: "क्योंकि राजकुमारों के लिए कर देना चाहिए" का सिद्धांत व्यवस्था के भीतर नैतिकता पर जोर देता है।
आख़िरी निष्कर्ष
यह 자리 हमें याद दिलाती है कि यीशु अपने समय के सामाजिक-आर्थिक ढांचे के भीतर रहते हुए भी स्वर्गीय राज्य के मूल्य स्थापित करते हैं। भक्त प्रवचन में जहां व्यक्तिगत आस्था है, वहीं सामाजिक दायित्व भी निभाने चाहिए। धार्मिक नियमों के भीतर भी ईमानदारी और कर-चुकौती जैसी स्थितियाँ विश्वास के साथ संगत हो सकती हैं।
सूक्ष्म उद्धरण (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणीकारों के स्पष्ट शब्द)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रमाणित छोटे दायरे के उद्धरण केवल संक्षेप में शामिल हैं. नीचे उद्धरणों के रोपण में शुद्ध शब्द-श्रेणियाँ दी जा रही हैं:
• “God does not forsake the temple; the temple is used to teach, not to oppress.” (अनुकरण-उद्धरण, संक्षेप)
• “Christ came not to overthrow the lawful orders of men but to fulfill them in mercy.” (अनुकरण-उद्धरण, संक्षेप)