Old Testament
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मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



संक्षिप्त परिचय
मत्ती 17:23 में यीशु शिष्यों से भविष्यवाणी करते हैं कि उन्हें मार डाला जाएगा और तीसरे दिन उठ जाएगा। शिष्यों का "बहुत उदास" होना इस घटना की तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया दर्शाता है—वे आने वाले दुख और भ्रम से त्रस्त हैं। यह पद पारंपरिक ईसाई पाठ में मसीह के दुःख, बलिदान और पुनरुत्थान के केंद्र-बिंदु को रेखांकित करता है।
इस पद का अध्यायगत संदर्भ
मत्ती 17 में परिवर्तन-प्रत्यक्ष होना, महत्ती संवाद और इश्वर की स्वीकृति के बाद यीशु अपनी मृत्यु व पुनरुत्थान का सन्देश स्पष्ट करते हैं। यह वचन उस तत्कालीन तनाव को दिखाता है जब शिष्यों को ईश्वर के रहस्यों का पूर्ण अर्थ समझ में नहीं आता। अध्याय के पूर्व भाग में पेत्रुस की बात, ईश्वर के स्वर, और चंगाई की घटनाएँ हैं—ये सब मिलकर यीशु की महत्ता और लक्ष्य को उजागर करते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
पहली शिक्षा: मसीह का मार देना ऐतिहासिक और दैवीय उद्देश्य दोनों है—पाप का प्रायश्चित और मुक्ति का मार्ग। दूसरी शिक्षा: पुनरुत्थान आशा का आधार है—मृत्यु अंतिम नहीं है। तीसरी शिक्षा: आज्ञाकारिता और धैर्य—शिष्य दुख देखकर भी भविष्य के ईश्वरीय योजना पर भरोसा रखें।
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व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) संकट के समय भी विश्वास रखें: शिष्यों की तरह हम भी अक्सर भविष्य का भय रखते हैं; परन्तु यीशु की योजना दुख को अर्थ देती है।
2) दुःख और आशा का संतुलन: उदासी को अस्वीकार करने की आवश्यकता नहीं पर उसे निराशा में न बदलने दें—पुनरुत्थान की आशा दिल को उभारती है।
3) साक्षात्कार और सेवा में धैर्य: जब ईश्वर का काम कठिन दिखाई दे तो भी सेवा जारी रखें; अंतिम विजय ईश्वर के हाथ में है।
परंपरागत टिप्पणी से उपयोगी उद्धरण
मैथ्यू हेनरी का संक्षिप्त परिशिष्ट: "वह तीसरे दिन जी उठेगा"—यह वचन मसीह की आशा और शिष्यों के विश्वास के केन्द्र में है। (मैथ्यू हेनरी के अंश उद्धरण संक्षेप में प्रस्तुत)
अल्बर्ट बार्न्स ने सुझाया है कि शिष्यों की उदासी इस बात का संकेत थी कि वे अभी भी राजकीय विजय की मान्यताओं में बँधे थे और सोलह्यान द्वारा दैवीय योजना को समझने में असमर्थ थे। (सारांशात्मक अवलोकन)
संक्षेप
मत्ती 17:23 हमें मसीह के दुःख, बलिदान और विजय का संक्षेप देता है। शिष्यों की उदासी मानव प्रतिक्रिया है; पर पुनरुत्थान की घोषणा आशा और उद्धार का केंद्र है। पाठ हमें सिखाता है कि ईश्वर की योजना कठिनाइयों को अर्थ देती है और आस्था को दृढ़ बनाती है।