Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



मत्ती 17:10 पर व्याख्या
इस पद में चेलों ने यीशु से पूछा कि क्यों शास्त्री कहते हैं कि एलिय्याह पहले आना आवश्यक है। घटना तब है जब यीशु पवित्र पर्व के समय पवित्रता और प्रेरणा के विषय पर चमत्कारी प्रभाव से चर्चा कर रहे हैं। यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि शास्त्री भविष्यवाणी के अनुसार एलिय्याह के आगमन के बारे में चर्चा कर रहे हैं, पर वास्तव में मसीह का आगमन एक नया चरण है जिसमें मानवता के उद्धार की दिशा स्पष्ट होती है।
मुख्य अर्थ
यह verse भविष्यवाणी की दोहरी परत को उजागर करता है: एक तरफ एलिय्याह का ऐतिहासिक पूर्वाग्रह और अगला अवकाश, दूसरी तरफ मसीह का अपना कार्य और उनकी आत्म-प्रकटन जो उत्तराधिकारी आशीर्वादों के साथ आता है। यीशु के समय में शास्त्री यह मानते थे कि एलिय्याह का आगमन एक कड़ी के रूप में होगा जो परमेश्वर के योजना को पुनः शुरू करे। परन्तु यीशु यह संकेत करता है कि पूर्ववर्ती “एलिय्याह” के प्रतीक अब नए रूप में आता है — परमेश्वर का आत्मीय आह्वान और उद्धार–कार्य, जो उन चमत्कारों और उपदेशों में स्पष्ट होता है जो यीशु कर रहे थे।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध अंश
उच्चारण: यह विषय मैथ्यू, मरकुस और लूके के समवर्ती पाठों में चलता है कि एलिय्याह के आगमन का प्रश्न कैसे प्रस्तुत होता है और कैसे यीशु उसे एक अद्यतन प्रकाश में देखते हैं।
व्यावहारिक विचार
हम जिसे अपेक्षा करते हैं वह कभी-कभी रूप-रंग में आ सकता है, पर सच मानवीय उद्धार ईश्वर के आत्मिक कार्य से जुड़ा है। हमारी आस्था केवल भविष्य की प्रतीक्षा नहीं, बल्कि आज के जीवन में परमेश्वर के राज्य की अनुभूति है — दया, विश्वास और नम्रता के साथ।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका छोटा अनुप्रयोग
संक्षेप
पद मत्ती 17:10 शास्त्रियों की पुरानी प्रेरणा को स्मरण कराता है कि एलिय्याह का आगमन प्रतीक्षा का हिस्सा था, पर उद्धार के पूर्ण कार्य के रूप में मसीह का आगमन अधिक महत्त्वपूर्ण है। यह संकेत देता है कि परमेश्वर की योजना नए रीति-रिवाज से पूरी होती है, जिसमें विश्वासियों को दया और सामर्थ्य से जीवन जियने की प्रेरणा मिलती है।
सूचनात्मक उद्धरण (उद्धृत स्रोत के उपयुक्त हिस्से के समान): “...या कि एलिय्याह पहले आना अवश्य है”—यह शास्त्रियों के पारंपरिक विचार का छोटा वर्णन है, जिसे यीशु ने अपनी दृष्टि से नया रूप दिया।
हर शास्त्री-मत बनाम यीशु–दृष्टि: संतुलन बनाए रखें कि पुरानी प्रतिज्ञाएँ नई कृपा से परिपूरक होती हैं और मसीह के आगमन से आरम्भ होकर उद्धार का लक्ष्य पूरा होता है।