Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



येशु कहते हैं: मरे हुओं में से जी उठने तक चमत्कारों का गुप्त रहना चाहिए
सीधे अर्थ का सार: मत्ति 17:9 में यीशु अपने शिष्यों को बतलाते हैं कि पर्वत पर मोड़ लेने के बाद जो चमत्कार देखे हैं, उसे वे किसी से न कहें जब तक पुत्र आदमी पुनर्जीवित न हो जाएं। अभी के लिए उनका धक्का यह है कि घटनाओं का उद्देश्य और स्पष्ट अर्थ उनके प्रवचन के समय के बाद ही समझ में आएगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वही घटना-संदर्भ है जब यीशु यीशु के साथ पवित्र पर्वत परTRANSFIGURATION की अनुभूति लेते हैं और वहाँ मोशे और इलियाह दिखते हैं। नीचे उतरते समय वह प्रचारित करते हैं कि यह महान चमत्कार उनके क्रूस पर जाने से पहले धीमी गति से समझ में आएगा; तब तक यह सत्य ऐसे ही गुप्त रहेगा।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
2–3 प्रभावशाली observing insights
– मसीही जीवन मेंप्रकाश तब ही बुझ नहीं जाता जब सब कुछ तुरंत समझ आए; यात्रा और धैर्य में विश्वास स्थिर रहता है।
– चमत्कारों का वास्तविक गहराई और सार तब प्रकट होता है जब पुरुष-यात्रा के अंत की योजना सामने आए।
क्लबित शास्त्रीय विचार (संक्षेप)
यह उद्धृत मार्गदर्शित विचार Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से प्रेरित क्रम में है, पर मूल शब्दों का प्रयोग सीमित है:
– Henry के अनुसार: यह संदेश चिंता नहीं, बल्कि परस्पर अवसर पर गवाही के लिए धैर्य सिखाता है।
– Barnes के अनुसार: पुनर्जीवन का निष्कर्ष शिष्यों को समझाने के लिए आवश्यक है ताकि वे यीशु के क्रूस पर विजय को सही ढंग से स्वीकारें।
– Clarke के अनुसार: यह चिह्नित करता है कि ज्ञान का प्रकाश कठिन समय में ही स्पष्ट होता है, और पवित्र क्रिया के पीछे का उद्देश्य बाद में ही खुलता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके तात्पर्य
1) मत्ती 16:21–23 — यीशु का अपने आप मृत्यु और पुनर्जीवन का संकेत देना; यह संदर्भ बताता है कि पुर्नजीवन पर केन्द्रित संदेश आगे स्पष्ट होगा।
2) मरकुस 9:9 — शिष्य पहाड़ से उतरते समय चुप रहने के निर्देश स्वीकार करते हैं; यह एक ही घटना का समरूप है।
3) लूका 9:43–44 — द्रष्टव्य चमत्कारों के बाद यीशु दुबारा धैर्यपूर्वक कह देते हैं कि यह सब समय के साथ प्रकाशित होगा।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम भी अपनी जिंदगी में यह सीख लें: परमेश्वर के कार्यों की गहराई कभी-कभी तुरंत नहीं खुलती; धैर्य रखें, साक्ष्य और संदेश के पूर्ण अर्थ के लिए सही समय की प्रतीक्षा करें। कठिन अनुभवों में भी विश्वास बनाए रखें कि ईसा मरे हुओं में से जी उठे और यही उद्धार की पूर्णता है।