Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 21:1 मत्ती 21:2 मत्ती 21:3 मत्ती 21:4 मत्ती 21:5 मत्ती 21:6 मत्ती 21:7 मत्ती 21:8 मत्ती 21:9 मत्ती 21:10 मत्ती 21:11 मत्ती 21:12 मत्ती 21:13 मत्ती 21:14 मत्ती 21:15 मत्ती 21:16 मत्ती 21:17 मत्ती 21:18 मत्ती 21:19 मत्ती 21:20 मत्ती 21:21 मत्ती 21:22 मत्ती 21:23 मत्ती 21:24 मत्ती 21:25 मत्ती 21:26 मत्ती 21:27 मत्ती 21:28 मत्ती 21:29 मत्ती 21:30 मत्ती 21:31 मत्ती 21:32 मत्ती 21:33 मत्ती 21:34 मत्ती 21:35 मत्ती 21:36 मत्ती 21:37 मत्ती 21:38 मत्ती 21:39 मत्ती 21:40 मत्ती 21:41 मत्ती 21:42 मत्ती 21:43 मत्ती 21:44 मत्ती 21:45 मत्ती 21:46



मत्ती 21:1 का तत्काल संदर्भ और उसका अर्थ
जब यीशु यरूशलेम के करीब पहुँचे और जैतून पहाड़ के नीचे बैतफगे के पास आए, तब उन्होंने दो चेलों को भेजकर कहा कि वे यह करें: शहर के भीतर एक जंगली घोड़े के बछड़े को खोज कर लायें, जिसे अभी कोई आदमी नहीं चढ़ा. उनसे कहा गया कि वह उस बछड़े को लाकर किसी के सामने न लगायें, ताकि लोग उसे उनके साथ चलें।
पवित्रता और विश्वास की दिशा
यह घटना स्पष्ट करती है कि प्रभु यीशु परमेश्वर की योजना के अनुरूप समय के नियंत्रण में आते हैं। राजाओं के स्वागत के लिए एक राजा का प्रतीकात्मक रूप-बंधा जानवर तैयार था—एक ऐसी वस्तु जिसे मानवों ने नहीं चुना, बल्कि देवता ने निर्धारित किया। इसका आशय है कि यीशु का राज्य ईश्वर के निर्देशों के अनुसार चलता है, न कि मानवीय विचारों के अनुकूल। यह विश्वास है कि परमेश्वर के समय-सारिणी में घटनाएँ पूर्व निर्धारित होती हैं और यीशु उसी क्रम में आगे बढ़ते हैं।
शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
“जगह के निकट” और “बैतफगे के पास” जैसी जगहों का उल्लेख चिन्हों के रूप में है—जैसे कि जैतून पहाड़ का क्षेत्र और बैतफगे नाम का गाँव। बैतफगे की प्रतीकात्मकता यह दिखाती है कि प्रभु ईश्वर के क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, ताकि उनका शान्ति-राज্য का संदेश वहाँ पहुँच सके। दो चेलों को भेजना यह सन्देश देता है कि प्रभु का काम समुदाय के साझा प्रयास और विश्वासी सेवक-भाव से होता है।
अन्य क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में)
प्रचलित शब्द-संरचना की व्याख्या
“जंगली घोड़ा” या “बाछड़ा” वह प्रतीक है जो कि प्रभु के शासन की शांति और निर्भयता को दर्शाता है। यह दृश्य दर्शाता है कि यीशु राज-स्वीकार के लिये यथासम्भव सरल और अनुकूल साधनों का प्रयोग कर रहे हैं—मानवीय बजट और पंक्ति-नीति से ऊपर उठकर परमेश्वर की योजना के अनुसार।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
सार-संयोजन
मत्ती 21:1 में यीशु का प्रवेश-पूर्वकल्पित कदम एक स्पष्ट संदेश देता है: प्रभु का राज्य ईश्वर के समय-निर्देश पर चलता है, और हमारी भूमिका उस योजना के अनुरूप आना-जाना है। इसे मानते हुए हम अपनी रोज़मर्रा की सेवाओं में भी भरोसा, नम्रता और समर्पण के साथ आगे बढ़ें।
टिप्पणी चेतावनी: नीचे उद्धृत लोग (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के सीधे छोटे-कथन जो पाठ में उपलब्ध हैं—यदि क्षणिक रूप से मिलें तो उन शब्दों का उल्लेख किया गया है।