Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 21:1 मत्ती 21:2 मत्ती 21:3 मत्ती 21:4 मत्ती 21:5 मत्ती 21:6 मत्ती 21:7 मत्ती 21:8 मत्ती 21:9 मत्ती 21:10 मत्ती 21:11 मत्ती 21:12 मत्ती 21:13 मत्ती 21:14 मत्ती 21:15 मत्ती 21:16 मत्ती 21:17 मत्ती 21:18 मत्ती 21:19 मत्ती 21:20 मत्ती 21:21 मत्ती 21:22 मत्ती 21:23 मत्ती 21:24 मत्ती 21:25 मत्ती 21:26 मत्ती 21:27 मत्ती 21:28 मत्ती 21:29 मत्ती 21:30 मत्ती 21:31 मत्ती 21:32 मत्ती 21:33 मत्ती 21:34 मत्ती 21:35 मत्ती 21:36 मत्ती 21:37 मत्ती 21:38 मत्ती 21:39 मत्ती 21:40 मत्ती 21:41 मत्ती 21:42 मत्ती 21:43 मत्ती 21:44 मत्ती 21:45 मत्ती 21:46



मत्ती 21:40 के संदर्भ में संकीर्ण भूमिका
पद में उद्धृत प्रश्न: “इसलिए जब दाख की बारी का स्वामी आएगा, तो उन किसानों के साथ क्या करेगा?” यह दाऊद की कथा नहीं, बल्कि यीशु के द्वारा यहूदियों के प्रमुख धार्मिक नेतृत्व के प्रति एक शिक्षण-पाठ है। खेत-उपनिवेश की परिघटना में किसानों ने मालिक के अधिकार-सम्पादन को ठेस पहुँचाई और अपने स्वार्थ के लिए हानि पहुँचाई। यीशु इस दृष्टांत के जरिये यह संकेत देते हैं कि परमेश्वर का राज्य उन लोगों के लिए नहीं है जो बार-बार उसकी नीति को चुनौती दें, बल्कि उन पर जो उसकी अनुमति से फल लाने और अन्य को फल देने के लिए उत्तरदायित्व स्वीकार करें।
मुख्य विचार
इस verse का केंद्रीय पाठ यह है: जब स्वामी आएगा, तो खेती की व्यवस्था और जिम्मेदारी निभाने वाले लोग कैसे जवाब देंगे—यह आत्म-तथ्य की कसौटी है। साफ़ शब्दों में, प्रभु परमेश्वर के सामने हर व्यक्ति अपनी भूमिका और उत्तरदायित्व के साथ खड़ा होगा। यह चेतावनी है कि जो लोग प्रेम, धर्म और निष्पक्षता के बिना प्रभु के घर के संचालन को भ्रष्ट करें, उन्हें न्याय का सामना करना पड़ेगा।
दो प्रमुख विषय
प्रमुख संकेतक विचार (Cross-references)
1) मत्ती 21:43 – परमेश्वर के राज्य के लिए उन लोगों को अच्छी तरह से चुना गया रोजगार मिलता है जो फल लाते हैं; 2) मत्ती 23:37–39 – धार्मिक नेतृत्व की आत्म-हीनता और परिणामस्वरूप शासन-निष्क्रियता का विरोध। 3) मरकुस 12:9 – समान उपमा में स्वामी-नियंत्रण और दायित्व का पुनरुत्थान।
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि प्रभु का राज्य ऐसी व्यवस्था नहीं है जो निष्क्रियता को सहन करे, बल्कि निष्ठा और फलों के साथ जीवन-यात्रा मांगता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज के पाठक के लिये इसका अर्थ है: प्रभु के चर्च और व्यक्तिगत जीवन में उल्लंघन और ढीलापन से बचना; हमारे कार्यों में ईमानदारी, नम्रता, और सेवा-भाव को बनाए रखना। जो लोग प्रभु के साथ-घनिष्ठता रखते हैं वे फल दिखाते हैं—उन्हें परिणाम मिलते हैं, और वे दूसरों को भी प्रेरित करते हैं।
संक्षिप्त सार
इस verse के माध्यम से यीशु हमें यह समझाते हैं कि परमेश्वर के राज्य की व्यवस्था में उत्तरदायित्व और निष्पक्षता जरूरी है। जो लोग इसका सम्मान करते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं; जो-exploit कर तानाशाही दिखाते हैं, उन्हें न्याय का सामना करना पड़ेगा।
प्यारे पन्ने की टिप्पणी (संरचित नोट्स)
यह संदेश Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे पुरानी-जनम के व्याख्यात्मक प्रकाशनों के समान धारा में है—सार यह कि परमेश्वर के राज्य के लिए तैयार रहने वाले उन लोगों में होंगे जो प्रभु के मालिकत्व को मानते हैं और फलों के साथ जीवन जीते हैं।
कुल मिलाकर, यह पद हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के राज्य की वास्तविकता केवल दावे तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार और फलों के प्रदर्शन से प्रमाणित होती है।